सरकार ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को अब परिवार और समुदाय के स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में जोड़कर एक ऐसा स्थानीय नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जो नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने, युवाओं में सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने और जरूरतमंद लोगों को समय रहते उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने में मदद करेगा।
श्री मुक्तसर साहिब के मलोट में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सरकार की इस रणनीति की तस्वीर सामने आई। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में योगदान देने वाली 20 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। ये कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में ‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर सेवाएं दे रही हैं।
सरकार का जोर अब नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने या नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम को भी मजबूत करने पर है। इसके लिए परिवारों, स्कूलों, पंचायतों, युवा क्लबों, खेल संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
परिवारों के बीच पहुंच बनाएंगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका इस अभियान में इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनका महिलाओं और बच्चों के साथ लगातार संपर्क रहता है। वे गांवों और शहरी क्षेत्रों में परिवारों के बीच नियमित रूप से पहुंचती हैं और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ी रहती हैं।
‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में इन कार्यकर्ताओं को नशे के नुकसान के बारे में परिवारों को जागरूक करने, बच्चों और युवाओं के व्यवहार में आने वाले शुरुआती बदलावों को समझने तथा जरूरत पड़ने पर संबंधित परिवारों को मदद लेने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि नशे से जुड़ी समस्या गंभीर रूप लेने से पहले ही परिवार और समुदाय स्तर पर हस्तक्षेप किया जा सके। जरूरतमंद लोगों को सरकार की नशा मुक्ति और पुनर्वास सेवाओं की जानकारी देकर उन्हें संबंधित सुविधाओं तक पहुंचाने में भी ये कार्यकर्ता मदद करेंगी।
रोकथाम पर बढ़ रहा सरकार का जोर
पंजाब सरकार की रणनीति में नशे के खिलाफ तीन स्तरों पर काम करने पर जोर दिया जा रहा है। एक तरफ नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है, दूसरी ओर नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। अब तीसरे स्तर पर रोकथाम और जनजागरूकता को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
मलोट में आयोजित कार्यक्रम में भी इसी दृष्टिकोण को सामने रखा गया। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिवार और समुदाय अगर समय रहते किसी व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव को पहचान लें तो उसे सहायता उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ सकती है।
उन्होंने युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार खेल, सामुदायिक गतिविधियां और स्वस्थ मनोरंजन युवाओं के लिए ऐसे विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं, जो उन्हें नशे से दूर रखने में मदद करें।
खेलों को बनाया जा रहा सकारात्मक विकल्प
मलोट कार्यक्रम में खेल गतिविधियों को नशे की रोकथाम के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिले के युवाओं को हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल और क्रिकेट के उपकरणों वाले 100 से अधिक खेल किट वितरित किए गए।
सरकार का प्रयास युवाओं को खेल के मैदानों और अन्य सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ने का है। इसके पीछे सोच यह है कि युवा अपनी ऊर्जा और समय को स्वस्थ गतिविधियों में लगा सकें और उन्हें नशे से दूर रहने के लिए सकारात्मक वातावरण मिल सके।
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि प्रदेश में करीब 3,000 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस वर्ष जनवरी में 500 पिंड जिम का उद्घाटन किया था। इन सुविधाओं का उद्देश्य गांवों और स्थानीय स्तर पर युवाओं को व्यायाम और खेल के लिए स्थान उपलब्ध कराना है।
‘खेडां वतन पंजाब दियां’ से भी युवाओं को जोड़ने की कोशिश
सरकार की खेल-आधारित रणनीति का एक और हिस्सा ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ है। इस वार्षिक खेल महोत्सव के चौथे सत्र के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि खेलों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इन्हें युवाओं के लिए स्वस्थ जीवनशैली का माध्यम बनाने की कोशिश की जा रही है। गांवों और कस्बों में खेल गतिविधियों के विस्तार से युवाओं को अपने आसपास ही सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मलोट में खेल किट का वितरण भी इसी दिशा में एक कदम के तौर पर देखा गया। हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों के उपकरण उपलब्ध होने से स्थानीय युवा क्लब और खिलाड़ी नियमित गतिविधियां आयोजित कर सकेंगे।
शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
नशे की रोकथाम के लिए सरकार अब स्कूलों और परिवारों को भी अभियान से जोड़ने पर जोर दे रही है। डॉ. बलजीत कौर ने शिक्षकों और अभिभावकों से युवाओं के व्यवहार और उनकी गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है। यदि परिवार या शिक्षक किसी बच्चे में अचानक व्यवहार परिवर्तन, पढ़ाई से दूरी या अन्य चिंताजनक संकेत देखते हैं तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत है।
मंत्री ने युवा क्लबों, पंचायतों और सामाजिक कल्याण संगठनों से भी अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि नशे की रोकथाम केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी के बिना इस तरह के अभियान को व्यापक स्तर पर प्रभावी बनाना मुश्किल होगा।
नशे की ओर बढ़ रहे युवाओं का साथ देने की अपील
डॉ. बलजीत कौर ने युवाओं से अपील की कि वे उन दोस्तों से दूरी न बनाएं जो नशे की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बजाय उन्हें मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें और उपचार तथा पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ने में सहयोग करें।
इस दृष्टिकोण के पीछे उद्देश्य नशे से प्रभावित व्यक्ति को सामाजिक रूप से अलग-थलग करने के बजाय उसे सहायता उपलब्ध कराना है। परिवार और मित्र यदि सकारात्मक सहयोग करें तो प्रभावित व्यक्ति के लिए उपचार और सामान्य जीवन की ओर लौटने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
सरकार की ओर से नशा मुक्ति और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि जागरूकता अभियान केवल संदेश देने तक सीमित न रहे बल्कि जरूरतमंद लोगों को वास्तविक सहायता तक पहुंचाया जा सके।
मलोट में बच्चों ने भी दिया नशामुक्ति का संदेश
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को भी जागरूकता अभियान का हिस्सा बनाया गया। बच्चों ने पोस्टर निर्माण और निबंध लेखन प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों ने नशे के दुष्प्रभावों और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े संदेश प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में मलवई गिद्धा और नशे के खिलाफ जागरूकता पर आधारित नाटक भी प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए नशामुक्त समाज और स्वस्थ पंजाब का संदेश लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
इस तरह कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, युवाओं, बच्चों और सामुदायिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया। इससे सरकार की उस रणनीति को भी प्रदर्शित किया गया जिसमें नशे के खिलाफ लड़ाई को सामाजिक भागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
गांव और वार्ड स्तर पर बनेगा नेटवर्क
पंजाब में नशे की रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर एक ऐसा नेटवर्क विकसित किया जा रहा है जिसमें अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं और समुदाय आधारित व्यवस्थाओं को शामिल किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, स्कूल, अभिभावक, पंचायतें, युवा क्लब और खेल सुविधाएं इस प्रयास का हिस्सा बन रही हैं।
गांव और वार्ड रक्षा समितियों को भी इस व्यवस्था में भूमिका दी जा रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर नशे से संबंधित समस्याओं की पहचान और जागरूकता गतिविधियों को मजबूत करना है।
‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की तैनाती इस नेटवर्क को परिवारों तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। चूंकि इन कार्यकर्ताओं का ग्रामीण और शहरी समुदायों के साथ नियमित संपर्क रहता है, इसलिए उनके माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों और उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।
अभियान को घर-घर तक पहुंचाने की कोशिश
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के तहत अब सरकार नशे के खिलाफ संदेश को केवल बड़े आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों, पंचायतों, खेल मैदानों और युवा क्लबों को संभावित जागरूकता केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
मलोट का राज्य स्तरीय कार्यक्रम इसी व्यापक रणनीति का उदाहरण रहा, जहां नशा मुक्ति मित्रों का सम्मान करने के साथ युवाओं को खेल सामग्री दी गई और बच्चों ने जागरूकता गतिविधियों में हिस्सा लिया।
सरकार की यह पहल नशे के खिलाफ कार्रवाई, उपचार, पुनर्वास और रोकथाम को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में है। आने वाले समय में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अन्य स्थानीय समूहों की सक्रिय भागीदारी से यह नेटवर्क परिवारों और समुदायों के स्तर तक और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।




