एसजीपीसी सराय में बहरीन की महिला के ठहरने पर आप ने उठाए सवाल, बलतेज पन्नू बोले- हर खर्च का देना होगा हिसाब

एसजीपीसी सराय में बहरीन की महिला के ठहरने पर आप ने उठाए सवाल, बलतेज पन्नू बोले- हर खर्च का देना होगा हिसाब

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के जनरल सेक्रेटरी एवं मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने श्री आनंदपुर साहिब स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की सराय में बहरीन की एक महिला के लंबे समय तक ठहरने से जुड़े आरोपों को लेकर शिरोमणि अकाली दल (बादल) के वरिष्ठ नेताओं और एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर सवाल उठाए हैं। पन्नू ने कहा कि इस पूरे मामले में महिला के ठहरने, उसे उपलब्ध कराई गई सुविधाओं, एसजीपीसी के संसाधनों के इस्तेमाल और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर कई सवाल सामने आ चुके हैं, लेकिन अब तक इनका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बलतेज पन्नू ने कहा कि वह इस मुद्दे पर पहले भी कई बार सवाल उठा चुके हैं और करीब चार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। उनके मुताबिक, इसके बावजूद सिख संगत की ओर से उठाए जा रहे मूल सवालों का जवाब सामने नहीं आया है। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया और हरजिंदर सिंह धामी से सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

हरसिमरत कौर बादल की चुप्पी पर सवाल

पन्नू ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं, लेकिन इस मामले में एक महिला के एसजीपीसी की सराय में कथित तौर पर महीनों तक रहने को लेकर उठ रहे सवालों पर उनकी ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उन्होंने सवाल किया कि जब महिला के साथ किए गए व्यवहार और एसजीपीसी के संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो इस पर जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा। पन्नू ने कहा कि मामला केवल किसी राजनीतिक दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक धार्मिक संस्था के संसाधनों और उसके संचालन से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।

बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर भी पन्नू ने कहा कि उन्हें वीडियो जारी करने के बजाय पत्रकारों के सामने आकर सवालों का जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि यदि मजीठिया के पास इस पूरे मामले से संबंधित तथ्य और जवाब हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

धामी से पूछा- कब देंगे जवाब

एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर निशाना साधते हुए पन्नू ने कहा कि उन्होंने भी मीडिया के सामने विस्तृत जवाब देने के बजाय वीडियो जारी किया है। पन्नू के मुताबिक, पटियाला में जब मीडिया ने धामी से इस मामले को लेकर सवाल किए तो उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार किया कि वह वहां किसी अन्य काम से आए हैं।

पन्नू ने सवाल किया कि आखिर धामी इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कब करेंगे और उन सवालों के जवाब कब देंगे जो लगातार उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के अध्यक्ष होने के नाते संस्था के संसाधनों और उसके संचालन से जुड़े सवालों पर स्पष्टता जरूरी है।

चार सदस्यीय जांच कमेटी पर भी सवाल

पन्नू ने एसजीपीसी की ओर से बनाई गई चार सदस्यीय जांच कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि मामले में वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल हैं तो जांच करने वाली कमेटी की स्वतंत्रता और अनुभव भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी सवाल उठाया था कि क्या जूनियर स्तर के सदस्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से प्रभावी ढंग से पूछताछ कर पाएंगे। पन्नू ने सुझाव दिया कि यदि एसजीपीसी वास्तव में निष्पक्ष जांच चाहती है तो किसी सेवानिवृत्त सिख न्यायाधीश या वरिष्ठ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी जैसे अनुभवी व्यक्ति से जांच कराई जा सकती थी।

उनका कहना था कि मामले में प्रशासनिक और वित्तीय दोनों तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में जांच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका, जानकारी और निर्णय प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।

15 दिन की समयसीमा पर भी उठाया सवाल

पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी ने जांच कमेटी को रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इतनी अवधि तय करने से मामले से जुड़े सवाल खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोगों के सवाल तब तक बने रहेंगे जब तक उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल जाते।

उन्होंने कहा कि यदि जांच कमेटी 10 या 15 दिन बाद रिपोर्ट देती भी है तो उससे पहले उठाए गए सवाल अपने आप समाप्त नहीं होंगे। पन्नू के मुताबिक, यह मामला केवल कुछ दिनों की चर्चा नहीं है और सिख संगत को यह जानने का अधिकार है कि वास्तव में क्या हुआ, किसने निर्णय लिए और किस आधार पर एसजीपीसी के संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।

महिला को कौन लाया, किसने ठहराया?

पन्नू ने मामले से जुड़े कई बिंदुओं पर जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि बहरीन की महिला को श्री आनंदपुर साहिब स्थित एसजीपीसी की सराय में कौन लेकर आया, उसके रहने की व्यवस्था किसने कराई और उसे वहां महीनों तक रहने की अनुमति किसने दी।

उन्होंने यह भी पूछा कि महिला को रहने और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। इसके अलावा उन्होंने सरबजीत सिंह झिंजर और विरसा सिंह वल्टोहा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि जिन लोगों के नाम इस प्रकरण में सामने आए हैं, उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।

पन्नू ने कहा कि यदि सराय, वाहन, चालक और सेवादार जैसी सुविधाएं एसजीपीसी की ओर से उपलब्ध कराई गई थीं तो संस्था को इन संसाधनों पर हुए खर्च का पूरा विवरण सामने रखना चाहिए।

एक लाख रुपये के कथित ट्रांसफर का मुद्दा

पन्नू ने दावा किया कि 23 जुलाई 2026 को पंजाब नेशनल बैंक में एसजीपीसी सचिव के नाम पर संचालित खाते से बहरीन की महिला के खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। उन्होंने इस कथित लेनदेन की जांच की मांग करते हुए पूछा कि यह राशि किस उद्देश्य से दी गई, इसे किसने मंजूरी दी और एसजीपीसी के किस मद से यह भुगतान किया गया।

उन्होंने कहा कि यदि संस्था के खाते से किसी व्यक्ति के निजी खाते में राशि ट्रांसफर की गई है तो उसका उद्देश्य और स्वीकृति प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। पन्नू ने कहा कि केवल एक लाख रुपये के कथित भुगतान का सवाल नहीं है, बल्कि महिला के पूरे आठ महीने के ठहराव के दौरान हुए अन्य खर्चों का भी हिसाब सामने आना चाहिए।

उन्होंने पूछा कि रहने, खाने, यात्रा, वाहन, ईंधन, चालक और अन्य सुविधाओं पर कितना खर्च हुआ। यदि किसी तरह का नकद भुगतान किया गया तो उसका भी रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

संगत के पैसे की जवाबदेही का मुद्दा

पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी को सिख संगत से मिलने वाले दान और संस्थाओं के संसाधनों के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार गोलक में राशि डालता है और वह पैसा धार्मिक संस्थाओं के कामकाज के लिए दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि एसजीपीसी के खाते से किसी व्यक्ति को भुगतान हुआ है तो उसके उद्देश्य, स्वीकृति और उपयोग का विवरण सामने आना चाहिए। पन्नू के मुताबिक, संस्था से जुड़े प्रत्येक रुपये की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

उन्होंने एसजीपीसी से मांग की कि महिला के ठहरने से संबंधित सभी खर्चों का पूरा विवरण जारी किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि अलग-अलग भुगतानों को किस अधिकारी या पदाधिकारी ने मंजूरी दी।

एसजीपीसी के कामकाज को लेकर व्यापक सवाल

पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के कामकाज और खर्चों को लेकर समय-समय पर अलग-अलग विवाद सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में विशेष रूप से इसलिए गंभीर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि जिस सराय और सुविधाओं की बात हो रही है, वे सीधे एसजीपीसी के नियंत्रण में थीं।

उन्होंने कहा कि केवल जांच कमेटी का गठन कर देना पर्याप्त नहीं है। सिख समुदाय यह जानना चाहता है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या थी, किसने अनुमति दी और संस्था के संसाधनों का उपयोग किस आधार पर किया गया।

सुखबीर बादल से भी मांगा जवाब

पन्नू ने सुखबीर सिंह बादल से भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि महिला की ओर से यह दावा किए जाने की बात सामने आई है कि उसने सुखबीर सिंह बादल को मामले की जानकारी दी थी। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उन्हें कब और किस माध्यम से जानकारी मिली तथा उसके बाद क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने हरजिंदर सिंह धामी से भी पूछा कि उन्हें इस मामले की जानकारी कब हुई और एसजीपीसी स्तर पर इसके बाद कौन-कौन से फैसले लिए गए।

पन्नू ने कहा कि महिला को पंजाब लाने, उसकी यात्रा की व्यवस्था करने, उसे रिसीव करने और एसजीपीसी की सराय में ठहराने की प्रक्रिया में शामिल लोगों से भी पूछताछ होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जांच का दायरा केवल एक व्यक्ति या एक भुगतान तक सीमित नहीं होना चाहिए।

एसजीपीसी चुनाव को लेकर भी उठाया सवाल

आप नेता ने एसजीपीसी चुनावों को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से एसजीपीसी के चुनाव नहीं हुए हैं और सिख संगत को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्था के कामकाज, निर्णय प्रक्रिया और वित्तीय संसाधनों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है और इनका जवाब संस्था के स्तर पर दिया जाना चाहिए।

पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) और एसजीपीसी के संबंधों को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं को किसी व्यक्ति या राजनीतिक परिवार की निजी संपत्ति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इन संस्थाओं में दुनिया भर की सिख संगत का योगदान है और इसलिए इनके कामकाज में जवाबदेही जरूरी है।

बोले- जांच से आगे बढ़कर जवाबदेही जरूरी

पन्नू ने कहा कि इस मामले में महिला के ठहरने, एसजीपीसी के संसाधनों के इस्तेमाल, कथित एक लाख रुपये के भुगतान और इससे जुड़े लोगों की भूमिका पर उठाए गए सभी सवालों का जवाब मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वीडियो जारी करने या सवालों से बचने के बजाय संबंधित पदाधिकारियों को सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पन्नू ने कहा कि 15 दिन की जांच अवधि पूरी होने के बाद भी यदि मूल सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं तो मामला समाप्त नहीं माना जा सकता।

उन्होंने दोहराया कि सिख संगत यह जानना चाहती है कि महिला को एसजीपीसी की सराय में किस आधार पर ठहराया गया, उसे कौन-कौन सी सुविधाएं दी गईं, इन सुविधाओं पर कितना खर्च हुआ, कथित एक लाख रुपये का भुगतान किस उद्देश्य से किया गया और पूरे मामले में किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही। पन्नू ने कहा कि इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब और पूरी जवाबदेही ही इस विवाद से जुड़े सवालों का समाधान कर सकती है।