कांग्रेस में गुटबाजी पर वड़िंग का खुलासा: बोले- आपसी खींचतान का पार्टी को हुआ नुकसान, मैं संघर्ष से पीछे नहीं हटूंगा

कांग्रेस में गुटबाजी पर वड़िंग का खुलासा: बोले- आपसी खींचतान का पार्टी को हुआ नुकसान, मैं संघर्ष से पीछे नहीं हटूंगा

पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पहली बार पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और गुटबाजी को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। वड़िंग ने माना कि कांग्रेस में नेताओं के बीच आपसी मतभेद और गुटबाजी का असर संगठन पर पड़ा और इससे पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों से वह राजनीतिक रूप से पीछे हटने वाले नहीं हैं और आगे भी सक्रिय रूप से संघर्ष करते रहेंगे।

वड़िंग ने अपने राजनीतिक सफर और पार्टी में निभाई जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए खुद को ‘योद्धा’ बताया। उन्होंने कहा कि उनके सामने चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, वह अपने लक्ष्य को हासिल करने तक संघर्ष करते रहेंगे। उनके मुताबिक राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में मैदान छोड़ देना उनके स्वभाव में नहीं है।

वड़िंग ने कांग्रेस के अंदरूनी विवादों पर बात करते हुए कहा कि किसी भी परिवार या राजनीतिक संगठन में जब आपसी खींचतान शुरू होती है तो उसका असर सभी पर पड़ता है। पंजाब कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं रही। उन्होंने माना कि पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद और एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने की स्थिति ने कांग्रेस की संभावनाओं को प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें किसी नेता से कोई परेशानी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि कुछ नेताओं को उनसे परेशानी हो। वड़िंग ने इसी संदर्भ में कहा, “शायद उन्हें मुझसे कुछ समस्या है। क्यों है, मुझे नहीं पता।”

नेताओं की आपसी लड़ाई का जनता पर पड़ा असर

वड़िंग ने कहा कि राजनीतिक दल केवल नेताओं से नहीं चलता, बल्कि उसके साथ कार्यकर्ता और आम लोग भी जुड़े होते हैं। जब पार्टी के बड़े नेता ही सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे से संघर्ष करते दिखाई देते हैं तो इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और जनता के भरोसे पर पड़ता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि पंजाब कांग्रेस में भी ऐसी स्थिति बनी, जिससे लोगों के बीच पार्टी को लेकर चिंता पैदा हुई। उनके अनुसार कांग्रेस एक समय ऐसे मुकाम पर पहुंच रही थी जहां वह खुद को सत्ता की दावेदार के तौर पर मजबूत तरीके से पेश कर सकती थी, लेकिन संगठन के भीतर चल रही खींचतान ने उस स्थिति को प्रभावित किया।

वड़िंग ने पार्टी के पुराने आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद पार्टी के कार्यक्रमों में अपेक्षित संख्या में लोग नहीं पहुंचते थे। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी की स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार 200 लोगों को भी प्रदर्शन के लिए जुटाना मुश्किल हो जाता था।

उन्होंने कहा कि उस दौर में नवजोत सिंह सिद्धू और प्रताप सिंह बाजवा जैसे वरिष्ठ नेता भी पार्टी में सक्रिय थे। इसके बावजूद संगठन को जनता के बीच अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। वड़िंग के मुताबिक बाद के वर्षों में कांग्रेस ने मेहनत की और पार्टी की स्थिति में सुधार आया। कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर संघर्ष किया और संगठन को दोबारा मजबूत करने का प्रयास किया।

हालांकि, उनका कहना है कि जब पार्टी मजबूत स्थिति की ओर बढ़ रही थी, उसी दौरान नेताओं के बीच मतभेद और आपसी विवाद फिर सामने आने लगे। इसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ा और जनता के बीच भी कांग्रेस को लेकर अलग-अलग तरह के संदेश गए।

राजनीतिक सफर में कई बड़े मुकाबले लड़े

अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए वड़िंग ने कहा कि उनका करियर हमेशा चुनौतीपूर्ण चुनावी मुकाबलों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना पहला चुनाव मनप्रीत सिंह बादल के खिलाफ उस विधानसभा सीट से लड़ा था, जिसे उनके मुताबिक कांग्रेस लंबे समय से जीत नहीं सकी थी।

वड़िंग ने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उस चुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद भी उनके राजनीतिक सफर में कई बड़े और चुनौतीपूर्ण मुकाबले आए। उन्होंने हरसिमरत कौर बादल और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे प्रमुख नेताओं के खिलाफ चुनावी मुकाबलों का भी उल्लेख किया।

वड़िंग ने मालवा क्षेत्र की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय आम आदमी पार्टी की मजबूत लहर के बावजूद कांग्रेस के बहुत कम उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे थे। उन्होंने कहा कि मालवा की 69 विधानसभा सीटों के राजनीतिक समीकरण में कांग्रेस के लिए परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन इसके बावजूद वह जीत दर्ज करने वाले उम्मीदवारों में शामिल रहे।

उनका कहना था कि लगातार कठिन मुकाबलों में उतरना और विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ना उनके राजनीतिक जीवन का हिस्सा रहा है। इसलिए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को भी वह अपने संघर्ष का एक चरण मानते हैं।

‘मैंने जिंदगी में कभी हार स्वीकार नहीं की’

वड़िंग ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी हार को अंतिम परिणाम के तौर पर स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, वह संघर्ष जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा, “मैंने जिंदगी में कभी हार स्वीकार नहीं की और आगे भी नहीं करूंगा। आज नहीं तो कल, कोई मुझे रोक नहीं सकता।”

हालांकि, वड़िंग ने यह भी स्वीकार किया कि लगातार आने वाली राजनीतिक बाधाओं से निराशा जरूर होती है। उनके अनुसार हर व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में निराशा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि वह उन परिस्थितियों से बाहर निकलने का रास्ता तलाशे।

उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि मुश्किलों से कैसे पार पाया जाता है। उनके राजनीतिक जीवन में कई ऐसे मौके आए जब परिस्थितियां उनके खिलाफ थीं, लेकिन उन्होंने उन चुनौतियों का सामना किया और आगे बढ़ने की कोशिश की।

राहुल गांधी का जताया आभार

वड़िंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें संघर्ष जारी रखने और कठिन परिस्थितियों में पीछे नहीं हटने की सीख दी है। वड़िंग ने कहा कि वह राहुल गांधी के ऋणी हैं और उनके द्वारा दिए गए संदेश को अपने राजनीतिक जीवन में आगे भी याद रखेंगे।

राहुल गांधी की संघर्ष जारी रखने की सीख का उल्लेख करते हुए वड़िंग ने कहा कि राजनीति में कई लोग रास्ता रोकने की कोशिश करेंगे, लेकिन संघर्ष करने वाला व्यक्ति उन बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा, “बहुत से लोग हमें रोकने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम उस तूफान से निकलकर अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे।”

वड़िंग ने कहा कि राजनीति में किसी व्यक्ति का सफर हमेशा सीधा नहीं होता। कई बार परिस्थितियां पक्ष में होती हैं और कई बार विपरीत। ऐसे में संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहना जरूरी है।

जिम्मेदारी मिली तो पहले की तरह काम करूंगा

प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बावजूद वड़िंग ने संकेत दिया कि वह कांग्रेस से दूरी बनाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जब भी जो जिम्मेदारी दी, उन्होंने उसे पूरी ईमानदारी और पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि आगे पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे भी वह उसी भावना से निभाएंगे। उनके मुताबिक किसी पद पर रहना ही राजनीति में सक्रिय होने का एकमात्र आधार नहीं है। संगठन के लिए काम करने और लोगों के बीच बने रहने की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

वड़िंग ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई और अब आगे पार्टी जो भूमिका तय करेगी, उसके मुताबिक काम करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पद में बदलाव उनके राजनीतिक संघर्ष को समाप्त नहीं करता।

‘योद्धा हूं और योद्धा बना रहूंगा’

वड़िंग ने अपनी बात का समापन भी संघर्ष और आगे बढ़ने के संदेश के साथ किया। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में मुश्किलें नई बात नहीं हैं और आगे भी यदि चुनौतियां आती हैं तो वह उनका सामना करेंगे।

उन्होंने कहा, “मैं एक योद्धा हूं और योद्धा बना रहूंगा।”

उनके इस बयान को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है। वड़िंग ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को लेकर अपनी बात रखते हुए जहां गुटबाजी से कांग्रेस को हुए नुकसान को स्वीकार किया, वहीं यह भी संकेत दिया कि वह आने वाले समय में पार्टी और अपनी राजनीतिक गतिविधियों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

उनके बयान में एक तरफ कांग्रेस के भीतर आपसी खींचतान से हुए नुकसान की स्वीकारोक्ति दिखाई दी, तो दूसरी तरफ व्यक्तिगत स्तर पर राजनीतिक संघर्ष जारी रखने का स्पष्ट संदेश भी रहा। अब प्रदेश संगठन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद कांग्रेस के भीतर विभिन्न नेताओं और गुटों के बीच समन्वय किस तरह कायम होता है, यह आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।