परगट सिंह के सामने पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने की चुनौती, 2027 से पहले संगठन साधना सबसे बड़ा इम्तिहान

परगट सिंह के सामने पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने की चुनौती, 2027 से पहले संगठन साधना सबसे बड़ा इम्तिहान

पंजाब कांग्रेस की कमान अब पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह के हाथों में है। कांग्रेस हाईकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद शुक्रवार को परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। वड़िंग ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंपा था। इसके बाद पार्टी ने बिना ज्यादा देरी किए परगट सिंह के नाम की घोषणा कर दी।

प्रदेश कांग्रेस में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पिछले कई महीनों से पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व, संगठन और अलग-अलग नेताओं के बीच तालमेल को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने भी राज्य के नेताओं के साथ बातचीत की थी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलने का फैसला हुआ।

अब परगट सिंह के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ प्रदेश संगठन चलाने की नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक धाराओं और वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने की भी होगी। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच उन्हें ऐसा माहौल तैयार करना होगा जिसमें वरिष्ठ नेता, विधायक, सांसद और जमीनी कार्यकर्ता चुनावी तैयारी पर एक साथ काम कर सकें।

वड़िंग के बाद क्यों चुना गया परगट सिंह का नाम

परगट सिंह का नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में सामने आने वाले कई नामों में शामिल था। पार्टी के भीतर प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अलग-अलग नेताओं के नामों पर चर्चा हुई थी। अंततः हाईकमान ने परगट सिंह को जिम्मेदारी दी।

परगट सिंह की राजनीतिक पहचान के साथ उनकी खेल पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रह चुके हैं और ओलंपिक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा वह पंजाब सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और 2012 से जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह 2012, 2017 और 2022 में इस सीट से विधायक चुने गए।

राजनीतिक तौर पर उनका सफर कांग्रेस से शुरू नहीं हुआ था। वह पहले शिरोमणि अकाली दल से जुड़े रहे और 2012 में जालंधर कैंट से चुनाव जीता। बाद में दिसंबर 2016 में कांग्रेस में शामिल हुए और 2017 तथा 2022 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर अपनी सीट बरकरार रखी। चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली सरकार में भी उन्होंने मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

गुटों के बीच संतुलन बनाना पहली चुनौती

परगट सिंह के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती पार्टी के भीतर विभिन्न नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की होगी। पिछले कुछ महीनों में प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। जुलाई में पार्टी की ओर से वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने के बाद भी नेतृत्व को लेकर चर्चा जारी रही। बाद में वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी की खबरें सामने आती रहीं।

सितंबर में कांग्रेस के एक प्रदर्शन में भी संगठन के भीतर मौजूद मतभेदों की चर्चा हुई थी। उस कार्यक्रम में चन्नी से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति को पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा गया। हालांकि कांग्रेस के नेताओं ने समय-समय पर एकजुट होकर चुनाव लड़ने की बात कही है।

अब परगट सिंह के सामने यही स्थिति बदलने की जिम्मेदारी होगी। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ-साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह, त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय बनाना होगा। पार्टी के अलग-अलग खेमों में मौजूद नेताओं को यह भरोसा दिलाना भी जरूरी होगा कि नए संगठनात्मक ढांचे में उनकी राजनीतिक भूमिका और महत्व बना रहेगा।

चन्नी और वड़िंग दोनों से तालमेल जरूरी

परगट सिंह के लिए एक अहम राजनीतिक समीकरण यह भी होगा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग, दोनों के साथ किस तरह तालमेल बनाते हैं। वड़िंग ने इस्तीफे के बाद परगट सिंह को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दी हैं। चन्नी ने भी उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है।

यह शुरुआती प्रतिक्रियाएं नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए संगठन को साथ लेकर आगे बढ़ने का आधार बन सकती हैं। हालांकि आने वाले समय में वास्तविक परीक्षा तब होगी जब टिकट वितरण, संगठनात्मक नियुक्तियों, चुनावी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग नेताओं के हित सामने आएंगे।

वड़िंग का प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल अप्रैल 2022 से रहा। इस्तीफे के समय उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि उन्होंने औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पंजाब कांग्रेस की स्थिति को लेकर अपनी बात पार्टी नेतृत्व के सामने रखी है।

ऐसे में नए अध्यक्ष के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वड़िंग और उनके समर्थक संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहें और नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी के भीतर किसी नए मतभेद की स्थिति न बने।

तीन से पांच महीने का अहम समय

परगट सिंह को जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब विधानसभा चुनाव तक बहुत लंबा समय नहीं बचा है। अब उन्हें प्रदेश कांग्रेस के संगठन को चुनावी तैयारी के लिहाज से तेजी से सक्रिय करना होगा।

सबसे पहले जिला और ब्लॉक स्तर के संगठन पर ध्यान देना होगा। इसके साथ बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता, लंबित संगठनात्मक गतिविधियों को गति देना और पार्टी के कार्यक्रमों को नियमित रूप से जमीन तक पहुंचाना भी जरूरी होगा।

टिकट के दावेदारों के बीच संतुलन बनाना भी आसान काम नहीं होगा। चुनाव नजदीक आने के साथ विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की गतिविधियां बढ़ेंगी। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा संगठन के भीतर खुले विवाद का रूप न ले।

युवाओं और नए कार्यकर्ताओं पर भी नजर

परगट सिंह की खेल पृष्ठभूमि को देखते हुए युवाओं के साथ संवाद भी उनकी राजनीतिक भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हॉकी में लंबा अनुभव रखने वाले परगट सिंह पहले भी पंजाब में खेल और युवा मामलों से जुड़े रहे हैं। पंजाब सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने खेल से संबंधित विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।

प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्हें कांग्रेस के पारंपरिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ युवा कार्यकर्ताओं और नए राजनीतिक चेहरों को भी संगठन से जोड़ने पर काम करना होगा। चुनावी राजनीति में बूथ स्तर का संगठन महत्वपूर्ण होता है और इसके लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं की जरूरत होगी।

पंजाब के मुद्दों पर पार्टी की दिशा तय करना भी चुनौती

संगठन को मजबूत करने के साथ परगट सिंह के सामने पंजाब से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस की राजनीतिक लाइन को स्पष्ट रखने की जिम्मेदारी भी होगी। राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दलों में शामिल है। ऐसे में सरकार की नीतियों और फैसलों पर पार्टी का रुख लगातार जनता तक पहुंचाना होगा।

नशे, कानून-व्यवस्था, रोजगार, कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और राज्य के आर्थिक मुद्दों जैसे विषयों पर पार्टी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। इन मुद्दों को विधानसभा स्तर से लेकर गांव और बूथ स्तर तक ले जाना प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी होगी।

कांग्रेस के लिए नया नेतृत्व, लेकिन पुरानी चुनौतियां बरकरार

परगट सिंह की नियुक्ति से प्रदेश कांग्रेस को नया चेहरा जरूर मिला है, लेकिन पार्टी के सामने मौजूद संगठनात्मक चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। हाईकमान ने लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के बीच नेतृत्व में बदलाव किया है। अब इस बदलाव का असर संगठन के कामकाज में दिखाई देना नए अध्यक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।

सचिन पायलट ने प्रदेश प्रभारी के रूप में पंजाब के नेताओं से बातचीत की थी और संगठन से जुड़े मुद्दों पर फीडबैक लिया था। नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब उस प्रक्रिया का अगला चरण प्रदेश संगठन को सक्रिय करने और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने का होगा।

हॉकी की टीम से कांग्रेस की टीम तक

परगट सिंह का पूरा सार्वजनिक जीवन खेल और राजनीति दोनों से जुड़ा रहा है। हॉकी के मैदान पर वह भारतीय टीम का नेतृत्व कर चुके हैं और अब उन्हें पंजाब कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक संगठन का नेतृत्व करना है।

खेल में टीम के कप्तान की भूमिका केवल मैदान पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि खिलाड़ियों के बीच तालमेल और सामूहिक रणनीति पर भी निर्भर करती है। राजनीति में भी प्रदेश अध्यक्ष के सामने कुछ ऐसी ही संगठनात्मक जिम्मेदारियां होंगी। हालांकि दोनों क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन परगट सिंह के सामने अब पार्टी के अलग-अलग नेताओं को एक साझा राजनीतिक कार्यक्रम के तहत साथ लेकर चलने की चुनौती है।

अब नजर संगठन के अगले कदम पर

परगट सिंह ने पद संभालने के बाद कांग्रेस हाईकमान का आभार जताते हुए कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके लिए केवल पद नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ पार्टी को मजबूत करने तथा पंजाब के लोगों की आवाज बनने की बात कही है।

उनकी नियुक्ति के बाद अब आने वाले दिनों में प्रदेश कांग्रेस की बैठकों, संगठनात्मक नियुक्तियों, जिला स्तर की गतिविधियों और चुनावी तैयारियों पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए अध्यक्ष वरिष्ठ नेताओं के साथ किस तरह समन्वय बनाते हैं और पार्टी के भीतर अलग-अलग धाराओं को किस तरह एक संगठनात्मक ढांचे में सक्रिय करते हैं।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन एक नए संगठनात्मक चरण की शुरुआत है। परगट सिंह के सामने अब चुनौती केवल प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने की नहीं, बल्कि पार्टी के विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच पर सक्रिय करने की है। आने वाले महीनों में उनके फैसले और संगठनात्मक कदम यह तय करेंगे कि नई प्रदेश टीम किस तरह चुनावी तैयारी को आगे बढ़ाती है।