5 अक्टूबर की हिमाचल कैबिनेट बैठक पर नजर, कर्मचारियों-पेंशनरों के डीए समेत कई अहम फैसलों की उम्मीद

5 अक्टूबर की हिमाचल कैबिनेट बैठक पर नजर, कर्मचारियों-पेंशनरों के डीए समेत कई अहम फैसलों की उम्मीद

हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 5 अक्टूबर को प्रस्तावित मंत्रिमंडल बैठक में कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े महंगाई भत्ते के मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना है। प्रदेश सरकार की इस बैठक पर कर्मचारी वर्ग की नजरें टिकी हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाल ही में मंडी जिले के दौरे के दौरान कर्मचारियों को लेकर संकेत देते हुए कहा था कि इस बार कर्मचारी अच्छी तरह दीपावली मना सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि सरकार आगामी त्योहारों को देखते हुए कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते की लंबित किस्त देने पर विचार कर सकती है।

हालांकि अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के बाद ही होगा। सरकार की ओर से अभी तक डीए की किस्त जारी करने को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में 5 अक्टूबर की बैठक में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आर्थिक स्थिति में सुधार का मुख्यमंत्री ने दिया था संकेत

मुख्यमंत्री सुक्खू ने मंडी दौरे के दौरान प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए कर्मचारियों को दीपावली बेहतर तरीके से मनाने की बात कही थी। उनके इस बयान को कर्मचारी संगठनों की ओर से डीए को लेकर उम्मीद से जोड़कर देखा जा रहा है।

राज्य सरकार पर कर्मचारियों और पेंशनरों के वित्तीय देनदारियों का दबाव पहले से रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने का फैसला सीधे तौर पर बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रभावित करेगा।

कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग की स्थिति और राज्य की मौजूदा वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए चर्चा होने की संभावना है। यदि सरकार डीए की किस्त जारी करने का निर्णय लेती है तो त्योहारों से पहले कर्मचारी और पेंशनर वर्ग को आर्थिक राहत मिल सकती है।

पशुपालकों और बागवानों को भी मिल सकता है तोहफा

त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार आम लोगों के साथ-साथ पशुपालकों और बागवानों के लिए भी राहत का फैसला ले सकती है। मंत्रिमंडल बैठक में पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार होने की संभावना है।

इसके अलावा मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खरीदे जाने वाले सेब और नींबू प्रजाति के फलों के समर्थन मूल्य में भी बदलाव पर चर्चा हो सकती है। यदि इन दरों में वृद्धि का फैसला होता है तो इसका सीधा असर किसानों और बागवानों की आय पर पड़ेगा।

हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन और बागवानी की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में दूध और फलों के समर्थन मूल्य से जुड़े निर्णय का असर बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है।

सरकार पहले भी बागवानों और पशुपालकों को बेहतर कीमत उपलब्ध कराने तथा कृषि-बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देती रही है। अब त्योहारों से पहले कैबिनेट में इन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना ने संबंधित वर्गों की उम्मीद बढ़ा दी है।

सरकार ने 600 करोड़ रुपये कर्ज लेने का फैसला किया

प्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 600 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का निर्णय लिया है। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की जरूरत है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों, पेंशनरों और विभिन्न वर्गों की मांगों को पूरा करने की चुनौती भी है।

सरकार की वित्तीय स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए कैबिनेट में विभिन्न प्रस्तावों पर प्राथमिकता के आधार पर चर्चा हो सकती है। यदि डीए या अन्य राहत से संबंधित फैसला होता है तो उसके वित्तीय प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाएगा।

सरकार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए राजस्व बढ़ाने और खर्च को व्यवस्थित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी फैसलों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

खनन के लिए अलग विभाग बनाने पर भी चर्चा संभव

मानसून सीजन समाप्त होने के बाद राज्य सरकार खनन गतिविधियों से जुड़े प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी फैसला ले सकती है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने पहले खनन से संबंधित कार्यों के लिए नए विभाग के गठन की घोषणा की थी।

ऐसे में 5 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में इस विषय पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि नए विभाग के गठन और उससे जुड़े ढांचे पर अंतिम फैसला इसी बैठक में होगा या इसके लिए अगली बैठक का इंतजार करना पड़ेगा।

प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की स्थिति में नदियों की ड्रेजिंग सहित खनन से संबंधित अन्य कार्यों की जिम्मेदारी नए विभाग को दी जा सकती है। सरकार का उद्देश्य खनन गतिविधियों को व्यवस्थित करने के साथ-साथ सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी करना भी हो सकता है।

नदियों की ड्रेजिंग पर बढ़ेगा फोकस

मानसून के दौरान नदियों और खड्डों में जमा होने वाली सिल्ट, रेत और अन्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से हटाने की जरूरत सामने आती है। ड्रेजिंग नीति बनने से इन गतिविधियों को एक निर्धारित व्यवस्था के तहत संचालित किया जा सकता है।

सरकार यदि इसके लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करती है तो नदियों की ड्रेजिंग, खनन गतिविधियों की निगरानी, अनुमति और राजस्व से जुड़े मामलों को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा सकता है।

इसके साथ ही खनन गतिविधियों से मिलने वाले सरकारी राजस्व को बढ़ाने की संभावना भी देखी जा रही है। हालांकि इसके लिए पर्यावरणीय नियमों और नदी तंत्र की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन भी आवश्यक होगा।

खाली पदों को भरने की दिशा में भी कदम

प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2026 तक 50 हजार सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।

कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग समेत अन्य विभागों में खाली पदों को भरने से संबंधित प्रस्ताव भी आ सकते हैं। अलग-अलग विभागों की ओर से भर्ती और पदों से संबंधित प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।

शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पदों को भरने की आवश्यकता है। इसके अलावा अन्य विभागों में भी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार के 50 हजार नौकरियां देने के लक्ष्य को देखते हुए आने वाली कैबिनेट बैठकों में भर्ती से जुड़े प्रस्ताव महत्वपूर्ण रहेंगे।

बजट घोषणाओं पर लग सकती है मुहर

मुख्यमंत्री सुक्खू ने वित्तीय वर्ष के बजट में कई घोषणाएं की थीं। इनमें से जिन घोषणाओं को लागू करने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक है, उन्हें संबंधित विभागों की ओर से कैबिनेट के सामने लाया जा सकता है।

ऐसे प्रस्तावों पर विभागीय रिपोर्ट, वित्तीय प्रावधान और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा। सरकार की कोशिश बजट घोषणाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की है।

इस बैठक में बजट घोषणाओं के अलावा पहले से गठित विभिन्न मंत्रिमंडलीय उपसमितियों की सिफारिशों पर भी चर्चा हो सकती है। उपसमितियों ने कर्मचारी, प्रशासनिक और अन्य नीतिगत विषयों पर जो सुझाव सरकार को दिए हैं, उनमें से कुछ मामलों पर कैबिनेट अंतिम फैसला ले सकती है।

मंत्रिमंडलीय उपसमितियों की सिफारिशों पर भी नजर

सरकार ने अलग-अलग मुद्दों पर विचार के लिए कई मंत्रिमंडलीय उपसमितियों का गठन किया है। इन समितियों में शामिल मंत्रियों की ओर से संबंधित विषयों पर चर्चा करने के बाद सिफारिशें सरकार को दी जाती हैं।

अब इन सिफारिशों के आधार पर कुछ प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने रखे जा सकते हैं। कैबिनेट में चर्चा के बाद इन्हें स्वीकार करने, संशोधित करने या आगे की समीक्षा के लिए भेजने का फैसला किया जा सकता है।

इससे बैठक का एजेंडा केवल डीए या त्योहारों से जुड़े फैसलों तक सीमित रहने के बजाय प्रशासनिक और नीतिगत विषयों तक भी विस्तृत हो सकता है।

टीसीपी से जुड़े प्रस्तावों पर भी हो सकता है फैसला

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से जुड़े कुछ प्रस्ताव भी बैठक में लाए जा सकते हैं। यदि विभाग की ओर से संबंधित विषयों पर प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं तो उन पर चर्चा के बाद निर्णय लिया जा सकता है।

टीसीपी से जुड़े मामलों का सीधा संबंध शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नियोजन, निर्माण और विकास गतिविधियों से होता है। ऐसे में इनसे जुड़े प्रस्तावों पर सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों का प्रभाव संबंधित क्षेत्रों की विकास गतिविधियों पर पड़ सकता है।

त्योहारों से पहले फैसलों पर टिकी नजर

5 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक ऐसे समय हो रही है जब प्रदेश में त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। इसलिए कर्मचारी, पेंशनर, पशुपालक, बागवान और नौकरी की तैयारी कर रहे युवा वर्ग की नजर सरकार के संभावित फैसलों पर है।

एक तरफ सरकार वित्तीय अनुशासन और राजस्व बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न वर्गों को राहत देने की मांगें भी सामने हैं। ऐसे में कैबिनेट बैठक में सरकार के सामने वित्तीय संसाधनों और जन अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाने का विषय महत्वपूर्ण रहेगा।

सबसे ज्यादा चर्चा कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए को लेकर है। मुख्यमंत्री के हालिया बयान के बाद इस मुद्दे पर उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन अंतिम फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद ही स्पष्ट होगा।

इसके साथ ही दूध, सेब और नींबू प्रजाति के फलों के समर्थन मूल्य, खनन के लिए नए विभाग, ड्रेजिंग नीति, सरकारी रिक्तियों को भरने, बजट घोषणाओं और मंत्रिमंडलीय उपसमितियों की सिफारिशों से जुड़े विषय भी बैठक के एजेंडे को महत्वपूर्ण बना सकते हैं।

अब 5 अक्टूबर को होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में यह स्पष्ट होगा कि सरकार किन प्रस्तावों को मंजूरी देती है और किन विषयों पर आगे विचार की जरूरत महसूस की जाती है। त्योहारों से पहले होने वाली इस बैठक से कई वर्गों को राहत से जुड़े फैसलों की उम्मीद है।