हवारा की पैरोल का मामला केंद्र के समक्ष उठाया, बीमार मां से मिलने की अनुमति देने की पैरवी; भ्यौरा और तारा की पैरोल पर भी राज्यपाल से बात करेंगे मुख्यमंत्री
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि राज्य सरकार बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर हर कानूनी और संवैधानिक विकल्प का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय से लंबित इस मामले को अनिश्चितकाल तक अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार का उद्देश्य कानून के दायरे में रहते हुए इस मुद्दे का उचित समाधान निकालना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदी सिंहों के मामले में आम आदमी पार्टी सरकार की मंशा और प्रतिबद्धता स्पष्ट है तथा वह न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री सोमवार को कौमी इंसाफ मोर्चा, किसान यूनियनों और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में बंदी सिंहों की रिहाई, जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने और बुड़ैल जेल में बंद परमजीत सिंह भ्यौरा तथा जगतार सिंह तारा के पैरोल से जुड़े मामलों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि सरकार इन मामलों में कानूनी रास्ते तलाशने और संबंधित अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखने के लिए तैयार है।
मान ने कहा कि सरकार पहले भी केंद्र सरकार और राज्यपाल को आश्वस्त कर चुकी है कि यदि जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाती है, तो पंजाब में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी निभाई जाएगी। इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अब तक अनुमति नहीं दी गई है। मुख्यमंत्री ने इस पर कहा कि मानवीय आधार पर उठाए गए इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए सभी संबंधित पक्षों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल का मामला
जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दिए जाने का मुद्दा बैठक में प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने इस संबंध में पहले ही केंद्र सरकार और राज्यपाल के सामने अपना पक्ष रखा है। सरकार ने यह भरोसा भी दिया है कि पैरोल की अवधि के दौरान राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
मान के अनुसार, पंजाब सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी आश्वासन दिया था कि हवारा को कुछ समय के लिए पैरोल दिए जाने की स्थिति में कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा नहीं होने दी जाएगी। इसके बावजूद केंद्र की ओर से अब तक पैरोल को मंजूरी नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी बंदी को अपनी बीमार मां से मिलने का अवसर देने के मामले पर मानवीय दृष्टिकोण से भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ऐसा समाधान तलाशना जरूरी है, जिससे संबंधित व्यक्ति को राहत मिल सके और राज्य में शांति का माहौल भी बना रहे।
उन्होंने कहा कि यदि हवारा को कुछ दिनों की पैरोल दी जाती है, तो इसे एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। इससे यह संदेश जाएगा कि संवेदनशील मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण वातावरण, आपसी विश्वास और कानून के दायरे में रहकर भी निकाला जा सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ऐसा कदम अन्य बंदी सिंहों से जुड़े मामलों के समाधान की दिशा में भी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, पैरोल देने का अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाना है। राज्य सरकार ने अपनी ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है और अब इस मामले में केंद्र की मंजूरी का इंतजार है।
कौमी इंसाफ मोर्चा और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात
बैठक में कौमी इंसाफ मोर्चा, किसान यूनियनों और अन्य समूहों के प्रतिनिधियों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े विभिन्न मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रामपुर खेड़ा के संत सेवा सिंह, बठिंडा के गुरदीप सिंह, भाई मोहकम सिंह, गुरसेवक सिंह काहनेके, बाबा भूपिंदर सिंह और किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल सहित अन्य नेताओं ने किया।
प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है और कानूनी दायरे में रहते हुए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में भावनाओं के साथ-साथ कानून और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करना भी जरूरी है।
मान ने संगठनों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर विचार करने और संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति समझने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए संबंधित पक्षों के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बंदी सिंहों से जुड़े मामलों को अलग-अलग कानूनी परिस्थितियों के आधार पर देखा जाना चाहिए। प्रत्येक मामले में संबंधित अदालतों के आदेशों, लागू नियमों और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिख संगठनों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से और कानून के दायरे में रहकर जारी रखें। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर आंदोलन करते समय संयम बनाए रखना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
मान ने आगाह किया कि कुछ समूह जानबूझकर ऐसे आंदोलनों को पटरी से उतारने और सिख समुदाय की छवि खराब करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने संगठनों से ऐसे तत्वों के प्रति सतर्क रहने और अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बंदी सिंहों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है और इसे सुलझाने के लिए निरंतर संवाद तथा कानूनी प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है और वह इस विषय पर उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जांच कराएगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी आंदोलन को प्रभावी बनाए रखने के लिए उसका शांतिपूर्ण होना और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना जरूरी है। इससे मांगों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष मजबूती से रखने के साथ-साथ समाधान की संभावनाएं भी बनी रहती हैं।
भ्यौरा और तारा की पैरोल का मामला राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे
बैठक में बुड़ैल जेल में बंद परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह तारा की पैरोल का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मामला चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए पंजाब सरकार सीधे तौर पर इस पर अंतिम निर्णय नहीं ले सकती।
मान ने कहा कि वह इस मामले को राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे, क्योंकि राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत के माध्यम से इस विषय की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति को समझने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग मामलों में अधिकार क्षेत्र और लागू नियमों की स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित मामले में किस प्राधिकरण को कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है।
भ्यौरा और तारा की पैरोल के मामले को राज्यपाल के सामने उठाने का आश्वासन देते हुए मान ने कहा कि सरकार उपलब्ध संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने का प्रयास करेगी। इससे इस विषय पर आगे विचार-विमर्श का रास्ता खुल सकता है।
महाधिवक्ता को कानूनी पहलुओं की जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी को निर्देश दिया कि बंदी सिंहों से जुड़े सभी मामलों के कानूनी पहलुओं की विस्तृत जांच की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों, संबंधित कानूनों और उपलब्ध विकल्पों को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान तलाशा जाना चाहिए।
मान ने कहा कि सरकार किसी भी मामले में कानून के दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं करेगी, लेकिन जहां कानूनी और संवैधानिक विकल्प उपलब्ध हैं, वहां उनका इस्तेमाल करने से पीछे भी नहीं हटेगी। महाधिवक्ता को दी गई जिम्मेदारी का उद्देश्य यही है कि संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो और आगे की कार्रवाई के लिए उचित रास्ता निर्धारित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई का विषय लंबे समय से लंबित है। इसलिए इस पर केवल आश्वासनों तक सीमित रहने के बजाय कानूनी स्थिति का आकलन कर आगे बढ़ने की जरूरत है। सरकार संबंधित पक्षों की मांगों और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की दिशा में प्रयास करेगी।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी भी रहे मौजूद
इस बैठक में पंजाब सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, गृह मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) पीके सिन्हा, जेल विभाग की प्रमुख सचिव भावना गर्ग और मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव कुमार अमित शामिल थे।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बंदी सिंहों से जुड़े मामलों, पैरोल की प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को मामलों की कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक समन्वय बनाए रखने का संदेश दिया।
कुल मिलाकर, बैठक में पंजाब सरकार ने बंदी सिंहों की रिहाई और पैरोल से जुड़े मामलों पर कानूनी तथा संवैधानिक रास्ते अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जगतार सिंह हवारा को बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल देने के मामले में केंद्र की मंजूरी अभी लंबित है, जबकि परमजीत सिंह भ्यौरा और जगतार सिंह तारा के मामले को मुख्यमंत्री राज्यपाल के समक्ष उठाने की बात कह चुके हैं। अब इन मामलों में आगे की दिशा संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगी।




