सीबीआई जांच की मांग को लेकर राज्यपाल के नाम सौंपे ज्ञापन, पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की उठाई मांग; मानसा में अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े समर्थक
मानसा। पंजाब के मानसा में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राज्यभर में प्रदर्शन करते हुए आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जिलों में धरना देकर नारेबाजी की और डिप्टी कमिश्नरों के माध्यम से पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को ज्ञापन भेजकर मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। पार्टी ने आशंका जताई कि हत्या के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र की भूमिका हो सकती है। साथ ही, पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
दूसरी ओर, मानसा में हत्या के विरोध में लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। शहर के तिकोनी चौक पर बुधवार को भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों और एक्शन कमेटी ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। परिवार के सदस्य और समर्थक मोर्चरी के बाहर डटे हुए हैं।
भाजपा ने 36 स्थानों पर किया प्रदर्शन
भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने बताया कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में पार्टी ने पंजाब के 36 स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों के माध्यम से राज्य सरकार को घेरते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से मानसा में नशा तस्करी और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। वह युवाओं को नशे से बचाने के लिए अभियान चला रहे थे और समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहे थे। ऐसे व्यक्ति की हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी नेताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। भाजपा ने मांग की कि इस मामले की जांच केवल हत्या की परिस्थितियों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे जुड़े संभावित कारणों और सभी पहलुओं की भी पड़ताल की जाए।
सीबीआई जांच से सामने आए सच्चाई
भाजपा ने राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में मांग की कि परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच से घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सकता है। भाजपा नेताओं ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि इस हत्या के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
भाजपा नेताओं ने कहा कि मामले में किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि हत्या किन परिस्थितियों में हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और क्या घटना के पीछे कोई अन्य कारण या नेटवर्क भी सक्रिय था।
पार्टी ने कहा कि मामले की जांच ऐसी होनी चाहिए, जिससे पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का भरोसा कायम हो सके। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। भाजपा ने यह भी मांग की कि जांच के दौरान किसी भी तरह के राजनीतिक या बाहरी दबाव की आशंका को दूर किया जाए और सभी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो।
कॉल रिकॉर्ड से लेकर फेसबुक लाइव तक की जांच की मांग
भाजपा ने अपने ज्ञापन में जांच से जुड़ी कई अहम मांगें रखी हैं। पार्टी ने कहा कि मामले के सभी संभावित डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी नष्ट न हो।
इन मांगों में हमलावर के कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, सीसीटीवी फुटेज और फेसबुक लाइव से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना शामिल है। भाजपा का कहना है कि आधुनिक तकनीक से जुड़े ये साक्ष्य घटना की परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
पार्टी ने यह भी मांग की कि जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच करें और आवश्यकता के अनुसार संबंधित रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर उनका विश्लेषण करें। किसी भी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की आशंका को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
भाजपा नेताओं के अनुसार, हत्या जैसे गंभीर मामले में जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए। घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग, संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच से कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, इन साक्ष्यों से क्या जानकारी मिलती है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पीड़ित परिवार और बच्चों को सुरक्षा देने की मांग
भाजपा ने परविंदर सिंह झोटा के परिवार की सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। पार्टी ने मांग की कि पीड़ित परिवार, विशेष रूप से नाबालिग बच्चों को तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। नेताओं का कहना है कि हत्या के बाद परिवार गहरे सदमे में है और उसे प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा सहयोग का भरोसा मिलना चाहिए।
भाजपा ने कहा कि परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसके सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। किसी भी तरह की धमकी या दबाव की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। प्रशासन को परिवार की सुरक्षा संबंधी जरूरतों का आकलन करके उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
पार्टी ने पंजाब में नशा तस्करी के नेटवर्क की व्यापक जांच कराने की मांग भी उठाई। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय से नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस दिशा में पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर काम करना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने जताया दुख
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मंगलवार सुबह मानसा में नशे के खिलाफ मुहिम चला रहे परविंदर सिंह झोटा की हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताते हुए कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
ढिल्लों ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति की हत्या से समाज में चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। इस मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजपा ने इस घटना को पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के संदर्भ में उठाया है। पार्टी ने राज्य सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वालों को भयमुक्त माहौल मिलना चाहिए।
मानसा में तिकोनी चौक पर अनिश्चितकालीन धरना जारी
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को भी शहर के तिकोनी चौक पर अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारी हत्या के मामले में सख्त कार्रवाई और अपनी मांगों को पूरा करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
धरने में शामिल लोगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। एक्शन कमेटी ने भी साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के चलते पार्थिव शरीर अभी सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है।
परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने मंगलवार से ही मोर्चरी के बाहर डेरा डाला हुआ है। परिवार का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिवार और समर्थक चाहते हैं कि मामले में ठोस कार्रवाई हो और उन्हें न्याय मिलने का विश्वास दिलाया जाए।
धरने के दौरान लोगों में घटना को लेकर गहरा रोष दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और जांच के संबंध में स्पष्ट कदम उठाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय कार्रवाई के स्तर पर प्रगति दिखाई देनी चाहिए।
नशे के खिलाफ अभियान और सुरक्षा पर उठे सवाल
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद नशे के खिलाफ स्थानीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियानों में शामिल लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। भाजपा ने इसे प्रमुखता से उठाते हुए कहा है कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए।
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। ऐसे में मानसा की इस घटना ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, स्थानीय स्तर पर निगरानी और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। भाजपा का आरोप है कि सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए, जबकि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हत्या की परिस्थितियों और संभावित साजिश को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, भाजपा सीबीआई जांच की मांग पर अड़ी है और मानसा में एक्शन कमेटी तथा परिवार अंतिम संस्कार को लेकर अपनी शर्तों पर कायम हैं।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजरें
हत्याकांड को लेकर अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। एक तरफ भाजपा ने राज्यभर में प्रदर्शन कर मामले की केंद्रीय जांच की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर मानसा में धरना दे रहे लोग मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
पीड़ित परिवार की सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण, नशा तस्करी के संभावित नेटवर्क की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई इस पूरे मामले के प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। इन मांगों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच में होने वाली प्रगति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल, परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने मानसा में तनाव और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। भाजपा ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि परिवार और समर्थक न्याय मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।




