हरसिमरत बादल ने महिलाओं को नशे के खिलाफ लामबंद किया, गांवों में 15-15 के जत्थे बनाने की अपील

हरसिमरत बादल ने महिलाओं को नशे के खिलाफ लामबंद किया, गांवों में 15-15 के जत्थे बनाने की अपील

जीरकपुर में मावां-धीयां इंसाफ यात्रा के दौरान आप सरकार पर निशाना, बोलीं—नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले झोटा के परिवार को अब तक इंसाफ नहीं मिला

जीरकपुर। पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने महिलाओं को संगठित करने की मुहिम तेज कर दी है। इसी कड़ी में मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने जीरकपुर में मावां-धीयां इंसाफ यात्रा के दौरान आम आदमी पार्टी सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने महिलाओं से पंजाब में नशे के कारोबार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया और गांवों में 15-15 महिलाओं के जत्थे बनाकर इस अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल सरकारी अभियानों और घोषणाओं पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, बल्कि समाज को भी इसके खिलाफ सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने महिलाओं से अपने गांवों में नशे के कारोबार पर नजर रखने और इससे संबंधित जानकारी एकत्र करने की अपील की। उनके अनुसार, माताओं और बेटियों की सामूहिक भागीदारी से नशे के खिलाफ जनजागरण को मजबूत किया जा सकता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया कि सरकार नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा तो कर रही है, लेकिन इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाने वालों को न्याय दिलाने के मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मानसा के परमिंदर सिंह झोटा के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परिवार को अब तक इंसाफ नहीं मिला है।

नशे के खिलाफ महिलाओं को आगे आने का आह्वान

जीरकपुर में महिलाओं को संबोधित करते हुए हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या का असर परिवारों और समाज पर पड़ रहा है। ऐसे में महिलाओं को इस चुनौती के खिलाफ एकजुट होकर आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि माताएं और बेटियां अपने परिवारों तथा गांवों में नशे के दुष्प्रभावों को सबसे करीब से महसूस करती हैं, इसलिए इस अभियान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने-अपने गांवों में छोटे-छोटे समूह बनाकर नशे के कारोबार के खिलाफ जागरूकता फैलाएं। उनके मुताबिक, 15-15 महिलाओं के जत्थे बनाकर गांवों में सक्रियता बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि नशे की समस्या से जुड़े मामलों की जानकारी सामने लाई जा सके।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे पंजाब के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा विषय मानकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने महिलाओं से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने और समाज के अन्य वर्गों को भी इससे जोड़ने की अपील की।

मावां-धीयां दी फौज के जरिए गांवों तक पहुंचने की तैयारी

शिअद की ओर से चलाई जा रही मावां-धीयां इंसाफ यात्रा के दौरान महिलाओं को संगठित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हरसिमरत कौर बादल ने बताया कि नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से मावां-धीयां दी फौज बनाई गई है। इस पहल के जरिए महिलाओं को एक मंच पर लाकर सामाजिक समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गांवों में महिलाओं के जत्थे बनाकर नशे के कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी एकत्र करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने अभियान में शामिल महिलाओं से नशा बेचने वालों के बारे में विवरण दर्ज करने की अपील भी की।

हालांकि, ऐसी जानकारी एकत्र करने के दौरान कानून के दायरे में रहना और संबंधित अधिकारियों तक तथ्य पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा। नशे के कारोबार से जुड़ी किसी भी शिकायत की जांच और कार्रवाई संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आती है। महिलाओं की भागीदारी का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाने और प्रशासन तक जानकारी पहुंचाने में सहयोग देना हो सकता है।

हरसिमरत कौर बादल की इस अपील से स्पष्ट है कि अकाली दल महिलाओं को नशे के खिलाफ अपनी मुहिम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहता है। गांवों में छोटे समूह तैयार करने की रणनीति के माध्यम से पार्टी इस अभियान को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

आप सरकार पर ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप

पूर्व विधायक एनके शर्मा के क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हरसिमरत कौर बादल ने आम आदमी पार्टी सरकार की नशा विरोधी नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास ड्रग माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति नहीं है। उनके अनुसार, यदि नशे के कारोबार को रोकना है तो समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ नशे के खिलाफ अभियान चलाने की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और उनके परिवारों को न्याय मिलने के सवाल बने हुए हैं। उन्होंने परमिंदर सिंह झोटा के परिवार का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब को नशे के खतरे से बचाने के लिए लोगों को स्वयं आगे आना होगा। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने गांवों में इस मुद्दे पर चुप रहने के बजाय सामूहिक रूप से जागरूकता फैलाएं और नशे के कारोबार से संबंधित जानकारी उचित माध्यमों से सामने लाएं।

उनके बयान से नशे का मुद्दा एक बार फिर पंजाब की राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों की ओर से सरकार की नशा विरोधी कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि नशे की समस्या को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

परमिंदर सिंह झोटा के मामले को लेकर उठाए सवाल

हरसिमरत कौर बादल ने अपने संबोधन में मानसा के परमिंदर सिंह झोटा के मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले झोटा के परिवार को अभी तक इंसाफ नहीं मिला है। इस मुद्दे के माध्यम से उन्होंने सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान तभी प्रभावी माना जा सकता है, जब इस समस्या के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों की शिकायतों पर भी गंभीरता से कार्रवाई हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले। उनके मुताबिक, नशे के कारोबार को रोकने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ समाज का सहयोग भी जरूरी है।

झोटा के परिवार को इंसाफ मिलने के संबंध में हरसिमरत कौर बादल ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी कार्यक्रम में सामने नहीं आई। इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं पर अकाली दल का फोकस

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों की ओर से अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिशें तेज हो रही हैं। शिरोमणि अकाली दल की मावां-धीयां इंसाफ यात्रा को भी महिलाओं तक पहुंच बढ़ाने और उन्हें राजनीतिक तथा सामाजिक मुद्दों पर संगठित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

हरसिमरत कौर बादल ने जीरकपुर में महिलाओं को संबोधित करते हुए नशे के खिलाफ अभियान को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने गांवों में 15-15 महिलाओं के समूह तैयार करने की अपील कर इस मुहिम को स्थानीय स्तर पर विस्तार देने का संदेश दिया। पार्टी का जोर महिलाओं को एकजुट करके नशे के खिलाफ जनजागरण बढ़ाने पर दिखाई दिया।

नशा पंजाब में लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रहा है। इस समस्या का असर युवाओं, परिवारों और ग्रामीण समुदायों पर पड़ता है। ऐसे में राजनीतिक दल इस विषय को अपने अभियानों में प्रमुखता देते रहे हैं। हालांकि, नशे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता के साथ प्रभावी जांच, कानून के अनुसार कार्रवाई, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास जैसी व्यवस्थाएं भी आवश्यक हैं।

महिलाओं की भागीदारी से अभियान को गांवों तक पहुंचाने की कोशिश

जीरकपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हरसिमरत कौर बादल का मुख्य संदेश महिलाओं को नशे के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करना रहा। उन्होंने महिलाओं से समूह बनाकर अपने गांवों में अभियान चलाने, नशे के कारोबार से जुड़ी जानकारी दर्ज करने और इस समस्या के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने की अपील की।

उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे के कारोबार के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए परमिंदर सिंह झोटा के परिवार को न्याय दिलाने का मुद्दा भी उठाया। इस तरह मावां-धीयां इंसाफ यात्रा के दौरान नशे के खिलाफ लड़ाई, परिवारों को न्याय और महिलाओं की सामाजिक भागीदारी को प्रमुखता दी गई।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल की यह पहल महिलाओं को एक मंच पर लाने और नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महिलाओं के जत्थे बनाने की अपील के बाद अभियान को गांवों में कितना विस्तार मिलता है और नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।