मौसम में बदलाव का असर केवल हमारी दिनचर्या और खान-पान पर ही नहीं पड़ता, बल्कि शरीर के अंदर होने वाली कई प्रक्रियाएं भी इससे प्रभावित होती हैं। खासतौर पर सर्दियों का मौसम दिल की सेहत के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान कई लोगों को ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। जिन लोगों का बीपी सामान्य रहता है, उनका रक्तचाप भी ठंड के दिनों में पहले के मुकाबले बढ़ सकता है। वहीं, पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम अधिक सावधानी बरतने वाला होता है।
अक्सर लोग ठंड के मौसम में बढ़ते ब्लड प्रेशर को सामान्य मौसमी बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल, दिमाग और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर तापमान गिरने के साथ ही ब्लड प्रेशर में बढ़ोतरी क्यों होने लगती है? क्या इसके पीछे केवल ठंड जिम्मेदार है या हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं? आइए जानते हैं कि सर्दियों में शरीर के अंदर क्या बदलाव होते हैं और इस मौसम में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ठंड पड़ते ही नसों में होने लगता है यह बदलाव
सर्दियों में रक्तचाप बढ़ने की सबसे प्रमुख वजह शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। दरअसल, हमारा शरीर अपने सामान्य तापमान को बनाए रखने के लिए लगातार काम करता है। जब बाहर का तापमान कम होने लगता है, तो शरीर गर्मी को बचाकर रखने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में त्वचा के पास मौजूद रक्त वाहिकाएं यानी ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं।
मेडिकल भाषा में इस प्रक्रिया को वासोकंस्ट्रिक्शन (Vasoconstriction) कहा जाता है। जब नसों का रास्ता संकरा हो जाता है, तो उनके अंदर से खून को गुजरने के लिए अधिक दबाव की जरूरत पड़ती है। इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर दिखाई दे सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो ठंड के कारण रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने से दिल को खून पंप करने के लिए पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
यही वजह है कि सर्दियों के दौरान कुछ लोगों का सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ सकता है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। किसी का रक्तचाप थोड़ा बढ़ता है, जबकि कुछ लोगों में यह बदलाव अधिक देखने को मिल सकता है।
सिर्फ ठंड नहीं, आपकी रोजमर्रा की आदतें भी हैं जिम्मेदार
सर्दियों में बीपी बढ़ने के पीछे शारीरिक बदलावों के साथ-साथ हमारी जीवनशैली भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। गर्मियों में लोग सुबह-शाम टहलने, दौड़ने और दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए आसानी से समय निकाल लेते हैं। लेकिन जैसे ही ठंड बढ़ती है, बहुत से लोग सुबह जल्दी उठने और घर से बाहर निकलने से बचने लगते हैं।
इसका नतीजा यह होता है कि शरीर की सक्रियता कम हो जाती है। लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम नहीं करना और शारीरिक मेहनत से दूरी बनाना वजन बढ़ने की आशंका को बढ़ा सकता है। बढ़ता हुआ वजन और कम शारीरिक गतिविधियां हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं।
इसके अलावा, सर्दियों में खान-पान का तरीका भी बदल जाता है। इस मौसम में गर्मागर्म और स्वादिष्ट चीजें खाने का मन अधिक करता है। कई लोग पराठे, अचार, नमकीन, तली हुई चीजें और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा देते हैं। इनमें मौजूद अतिरिक्त सोडियम शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन प्रभावित कर सकता है।
जब शरीर में सोडियम की मात्रा अधिक हो जाती है, तो शरीर अतिरिक्त पानी रोककर रख सकता है। इससे रक्त की मात्रा बढ़ने और रक्तचाप ऊपर जाने की संभावना रहती है। इसलिए सर्दियों में केवल ठंड से बचना ही काफी नहीं है, बल्कि खाने-पीने की आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
हार्मोन में बदलाव भी बढ़ा सकते हैं रक्तचाप
ठंड के मौसम में शरीर के अंदर कुछ हार्मोनल और नर्वस सिस्टम से जुड़े बदलाव भी होते हैं। कम तापमान के संपर्क में आने पर शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम अधिक सक्रिय हो सकता है। इसके चलते नॉरएड्रेनालिन जैसे रसायनों का प्रभाव बढ़ता है, जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने और दिल की धड़कन तथा रक्तचाप को प्रभावित करने में भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा, शरीर में कुछ ऐसे हार्मोनल बदलाव भी हो सकते हैं जो सोडियम और पानी के संतुलन को प्रभावित करते हैं। इन सभी प्रक्रियाओं का संयुक्त असर रक्तचाप पर पड़ सकता है।
यही कारण है कि ठंड में कुछ लोगों को बीपी नियंत्रित रखने के लिए गर्मियों की तुलना में अधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। हालांकि, हार्मोनल बदलाव हर व्यक्ति में समान नहीं होते और ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर सकते हैं।
इन लोगों को सर्दियों में रहना चाहिए ज्यादा सतर्क
कुछ लोगों के लिए सर्दियों में बढ़ता हुआ ब्लड प्रेशर अधिक जोखिम पैदा कर सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को पहले से हाइपरटेंशन की समस्या है, उन्हें नियमित रूप से अपना रक्तचाप जांचना चाहिए।
इसके अलावा डायबिटीज से पीड़ित लोगों और हृदय संबंधी बीमारियों का सामना कर रहे मरीजों को भी इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता में बदलाव आ सकता है, इसलिए बुजुर्गों को भी ठंड के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।
जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी से संबंधित बीमारी हो चुकी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी सेहत की निगरानी करनी चाहिए। ठंड के कारण रक्तचाप में होने वाला उतार-चढ़ाव पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए। अगर सर्दियों में बीपी की रीडिंग लगातार बढ़ी हुई मिल रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। अपनी मर्जी से दवा की मात्रा बढ़ाना, घटाना या दवा बंद करना नुकसानदायक हो सकता है।
सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने पर हमेशा नहीं दिखते लक्षण
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कई बार रक्तचाप बढ़ने के बावजूद व्यक्ति को किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती। वह सामान्य दिनचर्या जारी रखता है और उसे पता भी नहीं चलता कि उसका बीपी सामान्य सीमा से ऊपर पहुंच चुका है।
कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर, बेचैनी या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इन लक्षणों का होना जरूरी नहीं है। केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है या नहीं।
इसलिए सर्दियों में समय-समय पर बीपी की जांच करना बेहद जरूरी है। जिन लोगों को पहले से हाई बीपी है, उन्हें घर पर डिजिटल मशीन की मदद से भी रक्तचाप की निगरानी करनी चाहिए। जांच करते समय कुछ मिनट आराम से बैठें और सही तरीके से मशीन का इस्तेमाल करें। बार-बार अलग-अलग रीडिंग आने पर डॉक्टर से सलाह लें।
ठंड में बीपी को सामान्य रखने के लिए अपनाएं ये तरीके
सर्दियों में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए कुछ सामान्य आदतों में बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले शरीर को ठंड से सुरक्षित रखना जरूरी है। बाहर निकलते समय पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें। सिर, कान, हाथ और पैरों को भी ठंड से बचाकर रखें। अचानक बहुत कम तापमान के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
शारीरिक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखें। अगर बाहर बहुत ज्यादा ठंड है, तो घर के अंदर ही हल्की एक्सरसाइज, योग या टहलने जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने और दिल की सेहत बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
खान-पान में भी संतुलन बनाए रखना जरूरी है। रोजाना जरूरत से ज्यादा नमक खाने से बचें। पैकेट वाले स्नैक्स, अचार, प्रोसेस्ड फूड और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, भले ही ठंड में प्यास कम महसूस होती हो।
इसके अलावा नींद पूरी लें और तनाव को कम करने की कोशिश करें। धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी रक्तचाप तथा हृदय की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए इनसे दूरी बनाना बेहतर है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
अगर घर पर बार-बार ब्लड प्रेशर की जांच करने पर रीडिंग सामान्य से अधिक मिल रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। डॉक्टर से मिलकर रक्तचाप बढ़ने की वजह समझें और जरूरत के अनुसार उपचार लें। जिन लोगों को पहले से हाई बीपी है, उन्हें सर्दियों में अपनी दवाओं और नियमित जांच को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
अगर ब्लड प्रेशर 180/120 mmHg या इससे अधिक आता है, तो कम से कम एक मिनट बाद दोबारा जांच करें। यदि रीडिंग इतनी ही बनी रहती है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक तेज सिरदर्द, कमजोरी, सुन्नपन या देखने-बोलने में परेशानी जैसे लक्षण हों, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
कुल मिलाकर, सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ना शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया, हार्मोनल बदलाव और बदलती जीवनशैली का मिला-जुला परिणाम हो सकता है। इसलिए इस मौसम में दिल की सेहत को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। नियमित जांच, संतुलित भोजन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह का पालन करके रक्तचाप को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे डॉक्टर की सलाह या उपचार का विकल्प न समझें। ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।




