भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस साल के अंत तक इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि समझौते को दिसंबर 2026 तक पूरा किया जा सकता है और इसके बाद फरवरी या मार्च 2027 तक इसे लागू किए जाने की संभावना है।
यह समझौता भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि इसके लागू होने के बाद यूरोपीय संघ के 27 देशों का बाजार भारतीय उत्पादों के लिए पहले से ज्यादा आसान और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। अनुमान है कि इस करार के तहत भारत के करीब 93 फीसदी निर्यात को यूरोपीय बाजार में लगभग शुल्क-मुक्त पहुंच मिल सकती है।
मुंबई में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के लिए यूरोप का विशाल बाजार नए अवसर लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि एफटीए के बाद भारतीय कंपनियों को यूरोपीय देशों में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी और निर्यातकों को कम लागत पर अपने उत्पाद पहुंचाने का मौका मिलेगा।
गोयल ने कहा कि समझौते के बाद लगभग पूरा यूरोपीय बाजार भारतीय व्यापार के लिए खुल जाएगा और ज्यादातर उत्पादों पर शुल्क बेहद कम या लगभग खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया भारत की आर्थिक क्षमता को देख रही है और देश लगातार नए व्यापारिक साझेदार तैयार कर रहा है।
27 देशों के बाजार तक आसान पहुंच
भारत-ईयू एफटीए को दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समूहों में शामिल है और इसमें 27 देश आते हैं। इस करार के बाद भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, फार्मा, कृषि उत्पाद और अन्य क्षेत्रों के निर्यातकों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
मौजूदा समय में कई भारतीय उत्पादों पर यूरोपीय बाजार में अलग-अलग स्तर के आयात शुल्क लगते हैं, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। एफटीए लागू होने के बाद इन शुल्कों में कमी आने से भारतीय उत्पाद यूरोपीय कंपनियों के सामान के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर यूरोपीय कंपनियों को भी भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। समझौते के तहत यूरोप से आने वाली कुछ वस्तुओं, जिनमें लग्जरी कारें और वाइन जैसे उत्पाद शामिल हैं, के भारत में आयात पर शुल्क कम हो सकता है। इससे भारतीय ग्राहकों को भी कुछ उत्पादों की कीमतों में राहत मिल सकती है।
भारत और यूरोप की बड़ी आर्थिक साझेदारी
भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में काफी बड़ा योगदान देते हैं। दोनों के बीच व्यापारिक संबंध पहले से मजबूत हैं, लेकिन एफटीए के जरिए इन्हें नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
दोनों क्षेत्रों का संयुक्त रूप से दुनिया की जीडीपी में करीब 25 फीसदी योगदान है, जबकि वैश्विक व्यापार में इनकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई के आसपास है। यही वजह है कि इस समझौते को केवल व्यापारिक करार नहीं बल्कि रणनीतिक आर्थिक साझेदारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
अधिकारियों ने इस समझौते को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसे अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक करार दिया है। दोनों पक्षों ने 27 जनवरी को बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी, जिसके बाद इसके अंतिम स्वरूप पर काम तेजी से आगे बढ़ा।
G7 बैठक के बाद बातचीत को मिली नई गति
भारत-ईयू एफटीए को लेकर प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अंतरराष्ट्रीय बैठकों के बाद और तेज हुई है। G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात की थी।
इस बैठक के बाद यूरोपीय नेतृत्व की ओर से भी संकेत दिए गए कि व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ साल के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों ने एक बड़े और महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काफी प्रगति की है और अब आगे की प्रक्रिया पूरी करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
IMEC और रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा
भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच केवल व्यापार ही नहीं बल्कि निवेश, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी बातचीत हुई है। दोनों पक्ष भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं।
IMEC को वैश्विक सप्लाई चेन और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जाता है। इसके जरिए भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क मजबूत करने की योजना है।
भारत का लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करना है। एफटीए के जरिए भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में लंबे समय के लिए स्थिर अवसर मिल सकते हैं।
अमेरिका और कनाडा के साथ भी व्यापार वार्ता जारी
पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर इस सप्ताह भारत दौरे पर आने वाले हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ेगी।
इसके अलावा भारत और कनाडा के बीच भी आर्थिक साझेदारी समझौते पर चर्चा जारी है। गोयल के मुताबिक G7 बैठक के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री ने इस साल के भीतर प्रस्तावित भारत-कनाडा कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को पूरा करने की इच्छा जताई थी।
भारत लगातार अमेरिका, यूरोप और अन्य बड़े बाजारों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सरकार का मानना है कि ऐसे समझौतों से भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं मिलेंगी।
निर्यातकों के लिए नए अवसरों का दौर
भारत-ईयू एफटीए के लागू होने के बाद सबसे ज्यादा फायदा उन क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है जो यूरोपीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहते हैं। कम शुल्क और आसान व्यापार नियमों से भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यूरोप जैसे बड़े बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से रोजगार, निवेश और उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अगर तय समय के अनुसार यह समझौता 2027 की शुरुआत में लागू होता है, तो यह भारत की व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। इससे भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।




