हरियाणा सरकार तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में पढ़ाई के दौरान आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने उन्हें हर महीने 2,000 रुपये का स्टाइपेंड देने की योजना तैयार की है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल आर्थिक अभाव के कारण कोई भी विद्यार्थी तकनीकी प्रशिक्षण से वंचित न रहे या बीच में अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न हो।
राज्य सरकार का मानना है कि तकनीकी शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का सबसे प्रभावी रास्ता है। यही वजह है कि सरकार आईटीआई संस्थानों को मजबूत बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण और उद्योगों से जुड़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दे रही है।
आर्थिक सहायता से बढ़ेगी तकनीकी शिक्षा की पहुंच
सरकार द्वारा प्रस्तावित मासिक स्टाइपेंड का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के पात्र विद्यार्थियों को मिलेगा। इस आर्थिक सहयोग का उद्देश्य छात्रों पर पड़ने वाले रोजमर्रा के खर्च का बोझ कम करना है, ताकि वे बिना किसी वित्तीय चिंता के अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।
अक्सर देखा जाता है कि गरीब परिवारों के छात्र फीस, यात्रा, अध्ययन सामग्री और अन्य आवश्यक खर्चों के कारण तकनीकी शिक्षा बीच में छोड़ देते हैं या रोजगार की तलाश में समय से पहले प्रशिक्षण छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से ऐसे विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर सकेंगे।
2026-27 सत्र में एक लाख सीटों पर होंगे दाखिले
वर्ष 2026-27 के प्रवेश सत्र के लिए हरियाणा में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राज्यभर में कुल 377 आईटीआई संचालित हैं, जिनमें 197 सरकारी और 180 निजी संस्थान शामिल हैं। इन सभी संस्थानों में मिलाकर लगभग एक लाख सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।
इन संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए 89 से अधिक इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग ट्रेड उपलब्ध कराए गए हैं। पारंपरिक तकनीकी ट्रेडों के साथ-साथ आधुनिक उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए और उभरते हुए तकनीकी पाठ्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य की रोजगार संभावनाओं के अनुसार प्रशिक्षण का विकल्प मिलेगा।
उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन
हरियाणा सरकार तकनीकी शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार पाने में कम समय लगे और उद्योगों को प्रशिक्षित एवं दक्ष कर्मचारी आसानी से उपलब्ध हो सकें।
सरकार का मानना है कि यदि प्रशिक्षण का स्वरूप उद्योगों की मांग के अनुरूप होगा तो युवाओं की रोजगार क्षमता स्वतः बढ़ेगी। इससे एक ओर बेरोजगारी कम होगी, वहीं दूसरी ओर राज्य के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग पर विशेष जोर
राज्य सरकार वर्तमान में ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग (DST) मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को केवल कक्षा में पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव भी कराया जाता है।
इस मॉडल के तहत छात्र वास्तविक औद्योगिक वातावरण में मशीनों पर काम करना सीखते हैं, उत्पादन प्रक्रियाओं को समझते हैं, गुणवत्ता नियंत्रण की जानकारी प्राप्त करते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन करना सीखते हैं। इससे उन्हें कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव पहले ही मिल जाता है।
सरकार का मानना है कि जब विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान ही उद्योगों में काम करने का अनुभव प्राप्त कर लेते हैं, तो कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें रोजगार के लिए अलग से प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे उद्योगों को भी ऐसे कर्मचारी मिलते हैं जो पहले दिन से ही काम संभालने में सक्षम होते हैं।
आधुनिक ट्रेडों पर भी बढ़ रहा फोकस
तकनीकी शिक्षा के बदलते स्वरूप को देखते हुए सरकार पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ नई तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दे रही है। विभिन्न आईटीआई में ऐसे पाठ्यक्रमों को शामिल किया जा रहा है, जिनकी मांग वर्तमान औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है।
इसका उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करना भी है। इससे हरियाणा के प्रशिक्षित युवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत होगी।
नियमित उपस्थिति और ड्रॉपआउट में आएगी कमी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सहायता मिलने से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति में सुधार होगा। कई छात्र आर्थिक समस्याओं के कारण प्रशिक्षण के दौरान छोटे-मोटे रोजगार करने लगते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
यदि उन्हें हर महीने निर्धारित स्टाइपेंड मिलता है तो वे बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के नियमित रूप से संस्थान में उपस्थित रह सकेंगे। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होगी और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आने की संभावना है।
युवाओं को मिलेगा रोजगार का मजबूत आधार
हरियाणा सरकार की यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। सरकार चाहती है कि तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने वाले विद्यार्थी सीधे उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और सेवा क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकें।
उद्योगों के साथ बढ़ते सहयोग और व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था से प्रशिक्षित युवाओं की रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे राज्य में कुशल कार्यबल की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
तकनीकी शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
हरियाणा सरकार लगातार तकनीकी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। आईटीआई संस्थानों में नई तकनीकों, आधुनिक मशीनों और उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों को वर्तमान रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
सरकार का मानना है कि यदि आर्थिक सहायता, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी एक साथ आगे बढ़ती है, तो राज्य के हजारों युवाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
कौशल विकास के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में कौशल विकास की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए आईटीआई संस्थानों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को स्टाइपेंड उपलब्ध कराने का निर्णय न केवल तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान करेगा।
हरियाणा सरकार की यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को एक साथ जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में राज्य के हजारों युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण, स्थायी रोजगार और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मिल सकते हैं।



