सोनीपत। लघु सचिवालय में आयोजित जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में उस समय माहौल गरमा गया, जब एक शिकायत पर कार्रवाई के बजाय कथित तौर पर गलत रिपोर्ट तैयार किए जाने का मामला शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के सामने आया। अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत की सुनवाई के दौरान संबंधित कानूनगो के रवैये और कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए हैं, आम लोगों पर अधिकार जताने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगवाएं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिपाल ढांडा ने अधिकारियों के कामकाज और आम जनता के साथ उनके व्यवहार को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों को समय पर राहत देना और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता कायम करना है। यदि किसी नागरिक को अपनी छोटी-सी समस्या के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों को केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए बंद न किया जाए, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए। उनका कहना था कि किसी शिकायतकर्ता को संतुष्ट किए बिना अथवा समस्या का वास्तविक समाधान किए बिना फाइल बंद करना सुशासन की भावना के विपरीत है।
जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़ी कुल 16 शिकायतों पर सुनवाई की गई। इनमें आठ मामले नए थे, जबकि आठ शिकायतें पहले से लंबित थीं। मंत्री ने प्रत्येक शिकायत को क्रमवार सुना और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान आठ मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया, जिनमें चार नई और चार लंबित शिकायतें शामिल रहीं। शेष मामलों में संबंधित विभागों से विस्तृत जानकारी लेने के बाद आगे की कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
पांच शिकायतों के समाधान के लिए मंत्री ने अलग-अलग कमेटियां गठित करने के निर्देश भी दिए। इन समितियों में संबंधित विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रीवेंश कमेटी के सदस्यों को शामिल किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मामलों की जांच केवल औपचारिकता के तौर पर न की जाए, बल्कि तथ्यों की पूरी पड़ताल कर अगली बैठक तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
गांव प्रीतमपुरा निवासी अनिकेत की शिकायत ने बैठक में अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी पैदा की। शिकायतकर्ता का कहना था कि उसके प्लाट और गली की पैमाइश से जुड़ी शिकायत के बावजूद मौके पर कोई अधिकारी जांच के लिए नहीं पहुंचा। इसके बावजूद कथित रूप से एक ऐसी रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिसके आधार पर शिकायत को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
मामले की जानकारी मिलने पर शिक्षा मंत्री ने संबंधित कानूनगो से जवाब मांगा। मंत्री ने अधिकारी की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी का काम जनता की समस्या सुनना और उसका समाधान करना है, न कि शिकायतकर्ता के साथ इस तरह व्यवहार करना कि उसे अपनी समस्या बताने में भी परेशानी हो। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं और उन्हें अपने पद का रौब दिखाने के बजाय लोगों की मदद करनी चाहिए।
महिपाल ढांडा ने डीडीपीओ को निर्देश दिया कि वह तहसीलदार के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच करें। साथ ही मौके पर जाकर स्थिति की वास्तविकता पता लगाने और यदि अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े मामलों में केवल कार्यालयी रिपोर्ट के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर मौके का निरीक्षण किया जाना चाहिए।
बैठक के दौरान बिजली विभाग से जुड़ी एक शिकायत पर भी मंत्री ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। गन्नौर क्षेत्र के गांव पीपली खेड़ा निवासी ओमपती ने शिकायत करते हुए बताया कि वह बिजली के बिल नियमित रूप से जमा करती हैं। इसके बावजूद 6 जुलाई को बिजली निगम के कर्मचारी उनके घर पहुंचे और तीन महीने से बिल जमा नहीं होने की बात कहते हुए बिजली मीटर उतार ले गए।
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों के सामने यह भी बताया कि उसके पास समय पर बिल भुगतान की रसीदें मौजूद हैं। मामले की सुनवाई के दौरान बिजली निगम के अधिकारियों ने इसे एवरेज बिल से संबंधित मामला बताया। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि यदि उपभोक्ता ने विभाग की ओर से भेजा गया बिल समय पर जमा किया है तो उसका मीटर किस आधार पर उतारा गया।
मंत्री ने अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को इस तरह परेशान करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने तत्काल मीटर लगाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारी ने बैठक में बताया कि मीटर पहले ही दोबारा लगा दिया गया है। इसके बाद मंत्री ने बिजली बिलों से जुड़ी अन्य शिकायतों का भी संज्ञान लिया और उपायुक्त को निर्देश दिया कि बिजली निगम के अधिकारियों के साथ बैठक करके ऐसे मामलों का स्थायी समाधान निकाला जाए।
महिपाल ढांडा ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि बिजली बिलों और मीटर से संबंधित शिकायतों को तकनीकी समस्या बताकर टालने की बजाय उनकी जड़ तक पहुंचा जाए। यदि बिलिंग व्यवस्था में कोई खामी है तो उसे दूर किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार शिकायत लेकर प्रशासन के पास न आना पड़े।
बैठक में गांव जाटी कलां निवासी शकुंतला की पैतृक संपत्ति से जुड़ी शिकायत पर भी गंभीरता से विचार किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी पैतृक संपत्ति को गैरकानूनी तरीके से हड़पने का प्रयास किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंत्री ने जांच के लिए एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए।
इस कमेटी में राई की विधायक कृष्णा गहलावत, सोनीपत के विधायक निखिल मदान और खरखौदा के विधायक पवन खरखौदा को शामिल किया गया है। इसके साथ अतिरिक्त उपायुक्त और चार ग्रीवेंश सदस्यों को भी कमेटी का हिस्सा बनाया गया है। मंत्री ने समिति को मामले की विस्तृत जांच कर अगली बैठक तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
अखंड हिंदू स्वाभिमान के अध्यक्ष मनीष की ओर से खान कॉलोनी में अवैध कब्जों को लेकर दी गई शिकायत पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मामले की जांच के लिए विधायक निखिल मदान और डीसीपी की अध्यक्षता में समिति बनाने को कहा गया। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि जांच में अवैध कब्जे पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
गांव बाघडू निवासी दीपचंद ने एक निजी कंपनी पर खुले में दूषित पानी छोड़ने और वायु प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंपनी को पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना होगा और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों को हल्के में न लिया जाए। यदि किसी औद्योगिक इकाई अथवा निजी कंपनी की गतिविधियों से आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य या पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तो प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। संबंधित कंपनी को नियमों के अनुसार काम करने की हिदायत देने के साथ उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गांव राठधाना निवासी जगवंत सिंह की शिकायत भी बैठक में सामने आई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने उसे नौकरी लगवाने के नाम पर 15 लाख रुपये लिए, लेकिन बाद में न तो नौकरी लगवाई और न ही रकम वापस की। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने विधायक निखिल मदान और ग्रीवेंश कमेटी के सदस्य को मामले की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायत के तथ्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में लगातार अधिकारियों से जवाब मांगते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी शिकायत को केवल फाइल बंद करने की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है और इस व्यवस्था में अधिकारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
महिपाल ढांडा ने कहा कि आम नागरिक सरकारी व्यवस्था से सबसे पहले अधिकारी और कर्मचारी के स्तर पर जुड़ता है। यदि उसे सम्मानजनक व्यवहार मिलता है और उसकी समस्या पर समय रहते कार्रवाई होती है तो उसके मन में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ता है। इसके विपरीत यदि शिकायत को नजरअंदाज किया जाता है, गलत रिपोर्ट तैयार की जाती है या नागरिक को लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो इससे प्रशासन की छवि खराब होती है।
उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ काम करने की नसीहत देते हुए कहा कि जनता की शिकायतों को सुनना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। जहां समस्या का समाधान मौके पर संभव है, वहां अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर स्थिति देखें और आवश्यक कार्रवाई करें।
शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है तो उसे समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। जिन शिकायतों की जांच के लिए समितियां बनाई गई हैं, उनकी रिपोर्ट अगली बैठक तक प्रस्तुत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
बैठक में शिकायतों की सुनवाई के दौरान मंत्री ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विधायक और ग्रीवेंश कमेटी के सदस्य स्थानीय समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं। इसलिए गंभीर मामलों की जांच में उनके अनुभव और स्थानीय जानकारी का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे शिकायतों के समाधान में तेजी आ सकती है और प्रशासन को जमीनी तथ्यों को समझने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का रुख अधिकारियों के प्रति स्पष्ट रूप से सख्त रहा। उन्होंने एक ओर मौके पर शिकायतों का समाधान करवाने पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर लंबित मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में भी कदम उठाए। अवैध कब्जे, संपत्ति विवाद, बिजली बिल, प्रदूषण और नौकरी के नाम पर पैसे लेने जैसे मामलों को लेकर दिए गए निर्देशों से यह संकेत मिला कि सरकार शिकायतों के निपटारे में केवल औपचारिकता नहीं चाहती।
बैठक में विधायक कृष्णा गहलावत, विधायक निखिल मदान, विधायक पवन खरखौदा, जिला परिषद चेयरपर्सन मोनिका दहिया, पुलिस आयुक्त ममता सिंह, उपायुक्त नेहा सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम जनता से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए।
महिपाल ढांडा ने अंत में स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें नागरिकों को अपनी समस्या लेकर बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। उनका संदेश साफ था कि सरकारी कुर्सी अधिकार जताने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने की जिम्मेदारी के लिए है। अधिकारियों को इसी भावना के साथ काम करना होगा और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।



