हरियाणा की युवा पर्वतारोही रीना भट्टी एक बार फिर चर्चा में हैं। अपनी पर्वतारोहण उपलब्धियों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली रीना ने अब राज्य सरकार से अपनी उपलब्धियों के अनुरूप सम्मान और अवसर देने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर ग्रुप-A श्रेणी की सरकारी नौकरी देने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता की भी मांग की है, ताकि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकें।
रीना भट्टी ने अपनी मांग को केवल पत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी मुख्यमंत्री को टैग करते हुए अपनी बात सार्वजनिक की। उनका कहना है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में रहकर कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनसे हरियाणा और भारत का नाम वैश्विक स्तर पर ऊंचा हुआ है। ऐसे में राज्य सरकार को खिलाड़ियों और साहसिक खेलों से जुड़े प्रतिभाशाली युवाओं को भी समान अवसर और प्रोत्साहन देना चाहिए।

सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री तक पहुंचाई अपनी बात
मुख्यमंत्री को लिखा विस्तृत पत्र
रीना भट्टी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेजे गए पत्र में लिखा कि उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में लगातार मेहनत करते हुए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनका मानना है कि इन उपलब्धियों के आधार पर उन्हें ग्रुप-A स्तर की सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से भी मजबूत हो सकें और भविष्य में अपने खेल करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकें।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सरकार लगातार खिलाड़ियों और बेटियों के हित में सकारात्मक निर्णय ले रही है। ऐसे में उन्हें भी उम्मीद है कि उनकी उपलब्धियों को गंभीरता से देखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।
‘X’ पर साझा किया अपना संदेश
रीना ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने साहस और मेहनत के बल पर हरियाणा और देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उनकी उपलब्धियों को नजरअंदाज न किया जाए और उन्हें भी उचित सम्मान एवं अवसर प्रदान किया जाए।
सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद कई लोगों ने उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने साहसिक खेलों से जुड़े खिलाड़ियों के लिए अलग नीति बनाने की मांग भी उठाई।
आर्थिक सहायता की भी रखी मांग
ग्रुप-A नौकरी के साथ-साथ रीना भट्टी ने आर्थिक सहायता की भी मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कांग्रेस विधायक और खिलाड़ी विनेश फोगाट को दी गई आर्थिक सहायता का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अन्य खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर सम्मान और सहायता मिल सकती है, तो पर्वतारोहण जैसे कठिन खेल में देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को भी समान अवसर मिलने चाहिए।
उनका कहना है कि पर्वतारोहण अत्यधिक खर्चीला खेल है। अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने, प्रशिक्षण, उपकरण, यात्रा और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़ी राशि खर्च होती है। ऐसे में सरकारी सहयोग खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हिसार के साधारण परिवार से हैं रीना भट्टी
रीना भट्टी हरियाणा के हिसार जिले की रहने वाली हैं। उनका परिवार सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता ट्रैक्टर मैकेनिक के रूप में काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद रीना ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में लगातार मेहनत की और कठिन प्रशिक्षण के बाद कई ऊंची चोटियों पर सफलता हासिल की।
उन्होंने कई अवसरों पर बताया है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया, जिसके कारण वे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकीं।

एवरेस्ट और ल्होत्से अभियान का दावा
रीना भट्टी ने दावा किया है कि उन्होंने दुनिया की दो प्रसिद्ध चोटियों—माउंट एवरेस्ट और माउंट ल्होत्से—पर मात्र 20 घंटे 50 मिनट के भीतर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। यह उपलब्धि पर्वतारोहण की दुनिया में बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है क्योंकि दोनों चोटियों के बीच का अभियान अत्यधिक कठिन और जोखिम भरा होता है।
यदि इस प्रकार की उपलब्धि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप प्रमाणित होती है, तो यह भारतीय पर्वतारोहण के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है।
एक साथ दो चोटियों पर तिरंगा फहराने का दावा
रीना ने बताया कि वह हरियाणा की पहली महिला हैं जिन्होंने माउंट कांग यात्से (6270 मीटर) और माउंट जो जोंगो (पश्चिम) (6240 मीटर) जैसी ऊंची चोटियों को लगभग 70 घंटों के भीतर फतह किया। इन दोनों चोटियों पर उन्होंने भारत का तिरंगा फहराने का दावा किया है।
इन अभियानों के दौरान अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी, कठिन चढ़ाई और मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण ऐसे अभियान केवल प्रशिक्षित पर्वतारोही ही पूरा कर पाते हैं।
आमा दबलम अभियान भी रहा चर्चा में
रीना भट्टी ने नेपाल स्थित दुनिया की तकनीकी रूप से कठिन चोटियों में गिनी जाने वाली माउंट आमा दबलम (6812 मीटर) पर भी सफल चढ़ाई करने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह अभियान पांच दिनों में पूरा किया।
आमा दबलम को पर्वतारोहण की दुनिया में अत्यधिक तकनीकी और जोखिमपूर्ण पर्वत माना जाता है, जहां विशेष प्रशिक्षण और अनुभव की आवश्यकता होती है।
अन्य उपलब्धियों का भी किया उल्लेख
रीना ने अपने पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट में अन्य उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वह “डिप्रेशन अगेंस्ट रनिंग” नामक विश्व की लंबी रिले दौड़ का हिस्सा रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने ऑक्सफोर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में 10,000 पुश-अप्स पूरे करने का भी दावा किया है।
इन उपलब्धियों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उनका योगदान केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं है, बल्कि फिटनेस और सामाजिक जागरूकता अभियानों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
साहसिक खेलों के खिलाड़ियों की चुनौतियां
भारत में क्रिकेट, कुश्ती, हॉकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों की तुलना में पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेलों को अपेक्षाकृत कम संसाधन और प्रायोजन मिलते हैं। पर्वतारोहियों को अभियान शुल्क, पर्वतारोहण उपकरण, प्रशिक्षण, यात्रा, बीमा और अन्य व्यवस्थाओं पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।
इसी कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक कठिनाइयों के चलते अपने अभियान जारी नहीं रख पाते। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे खिलाड़ियों को सरकारी सहयोग और संस्थागत सहायता मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
राज्य सरकार की खेल नीति पर भी नजर
हरियाणा लंबे समय से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने वाले राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार, सरकारी नौकरियां और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराती रही है। इसी संदर्भ में रीना भट्टी ने भी अपनी उपलब्धियों के आधार पर समान अवसर की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार उनके आवेदन पर क्या निर्णय लेती है और पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेलों से जुड़े खिलाड़ियों के लिए भविष्य में किस प्रकार की नीतियां बनाई जाती हैं।




