तकनीकी हमसे संचालित हो, हम तकनीकी से नहीं : CM Yogi

तकनीकी हमसे संचालित हो, हम तकनीकी से नहीं : CM Yogi

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 91 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास, शिक्षकों व विद्यार्थियों को भी किया सम्मानित

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा, तकनीक और आधारभूत विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की। कार्यक्रम में उन्होंने करीब 91 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, शोधार्थी, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और प्रशासनिक नेतृत्व को तैयार करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य और देश की प्रगति का आधार उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को आधुनिक तकनीक, शोध और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 13 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक प्रयोगशालाओं का विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

91 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से विश्वविद्यालय को मिलेगा नया विस्तार

विश्वविद्यालय में जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, उनमें शैक्षणिक भवनों का निर्माण, नई प्रयोगशालाओं की स्थापना, अधोसंरचना विकास, तकनीकी सुविधाओं का विस्तार तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सुविधाओं का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं पर लगभग 91 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर निवेश कर रही है ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण युवाओं को रोजगार तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

26 शिक्षकों और 60 विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शिक्षकों और विद्यार्थियों का सम्मान समारोह भी रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के 26 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक योगदान के लिए सम्मानित किया। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले 60 छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए गए।

उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके शिक्षक और विद्यार्थी होते हैं। शिक्षक जहां ज्ञान और संस्कार प्रदान करते हैं, वहीं विद्यार्थी अपने परिश्रम और उपलब्धियों से संस्थान का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करते हैं।

टीम वर्क को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताया

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक होते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था, संगठन या देश तभी प्रगति करता है जब सभी लोग मिलकर एक साझा उद्देश्य के लिए कार्य करें।

उन्होंने कहा कि टीम वर्क केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान, विज्ञान और तकनीकी विकास के हर क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब शिक्षक, विद्यार्थी, प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तभी बेहतर परिणाम सामने आते हैं।

भारत की तकनीकी क्षमता का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भारत की ऐतिहासिक तकनीकी और वैज्ञानिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत विज्ञान, गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करता था। भारतीय ज्ञान परंपरा ने विश्व को अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान दोनों का समन्वय करते हुए नए शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाए, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी पहचान और मजबूत कर सके।

औपनिवेशिक काल का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ब्रिटिश शासन का जिक्र करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल में भारत के संसाधनों का व्यापक दोहन किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय देश की आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक संरचना को काफी नुकसान पहुंचा था।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने धीरे-धीरे विकास की दिशा में कदम बढ़ाए और अब भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

भारत की आर्थिक प्रगति पर रखे विचार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, उद्योग, स्टार्टअप और तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में सड़क, रेल, हवाई अड्डे, डिजिटल भुगतान प्रणाली, इंटरनेट सेवाओं और औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में निरंतर विस्तार हुआ है, जिससे विकास को नई गति मिली है।

कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए कार्यों का जिक्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी के कठिन समय में देशभर में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया, जिससे करोड़ों लोगों को सुरक्षा प्रदान की गई।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए गए।

तकनीक को जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बताया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तकनीक केवल उद्योग या व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन को सरल बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुकी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शिता के साथ लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नवाचार, अनुसंधान और स्टार्टअप संस्कृति को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का होगा और उसमें तकनीकी दक्षता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सस्ती और सुलभ तकनीक पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य आम लोगों का जीवन आसान बनाना होना चाहिए। यदि तकनीकी संसाधन सभी वर्गों तक कम लागत में उपलब्ध होंगे, तभी समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उसका लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाएं, ई-गवर्नेंस और आधुनिक सूचना प्रणाली के माध्यम से सरकारी सेवाओं की उपलब्धता पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी हुई है।

सरकारी योजनाओं का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों तक खाद्यान्न वितरण, पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशि भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका कम हुई है।

उच्च शिक्षा और शोध को बताया भविष्य की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि केवल परीक्षा पास करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। उच्च शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य नए विचारों का विकास, शोध, नवाचार और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी संगठनों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा मिल सके। इससे राज्य और देश दोनों के विकास को गति मिलेगी।

युवाओं से नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की अपील

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के अंत में युवाओं से नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है और यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और बेहतर अवसर मिलें तो वे देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विश्वविद्यालय आने वाले समय में शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Leave a Reply