बैसाखी के अवसर पर लखनऊ के गुरुद्वारे पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर दी शुभकामनाएं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैसाखी के पावन अवसर पर लखनऊ के नाका हिंडोला स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे पहुंचकर गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और प्रदेशवासियों के साथ-साथ देश-विदेश में रह रहे सिख समुदाय को बैसाखी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने गुरु परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए सिख गुरुओं के योगदान, बलिदान और खालसा पंथ की स्थापना के ऐतिहासिक महत्व पर भी विस्तार से अपने विचार रखे।
मुख्यमंत्री का गुरुद्वारे में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। उन्होंने धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया और संगत के बीच उपस्थित होकर बैसाखी पर्व की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के सदस्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए लोग मौजूद रहे।
बैसाखी का पर्व देशभर में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह एक ओर किसानों के लिए नई फसल की खुशियां लेकर आता है तो दूसरी ओर सिख धर्म के इतिहास में वर्ष 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की स्मृति के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इसी ऐतिहासिक परंपरा को याद करते हुए समाज में एकता, सेवा और साहस के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर लिया आशीर्वाद
गुरुद्वारा पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष श्रद्धापूर्वक मत्था टेका और अरदास में शामिल हुए। उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति तथा सभी नागरिकों के कल्याण की कामना की। इसके बाद उन्होंने उपस्थित संगत को बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह अवसर केवल धार्मिक आस्था का नहीं बल्कि समाज को नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देने का भी प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पर्व समाज में आपसी भाईचारे, सहयोग और सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने लोगों से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और सेवा की भावना को जीवन में अपनाने का भी आह्वान किया।

बैसाखी को बताया प्रेरणा और उत्साह का पर्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि बैसाखी केवल नई फसल की खुशी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सिख इतिहास का एक अत्यंत गौरवशाली अध्याय भी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1699 में गुरु गोविंद सिंह महाराज ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिसने धर्म, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए एक नई दिशा प्रदान की।
उन्होंने कहा कि खालसा पंथ आज भी पूरी दुनिया में सत्य, साहस, सेवा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसके आदर्श आज भी समाज को प्रेरित करते हैं और मानवता की रक्षा का संदेश देते हैं।
गुरु गोविंद सिंह के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह महाराज ने अपने जीवन को देश, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह द्वारा स्थापित खालसा पंथ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देने वाला आंदोलन भी था। यही कारण है कि आज भी उनके विचार नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं।
सिख गुरुओं के बलिदान, वीर बाल दिवस और करतारपुर कॉरिडोर का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में केवल बैसाखी और खालसा पंथ की स्थापना तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि सिख गुरुओं के ऐतिहासिक योगदान, उनके बलिदानों और आधुनिक समय में उनसे जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास सिख गुरुओं के त्याग और राष्ट्र सेवा की अमूल्य गाथाओं से भरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि देश सिख गुरुओं के योगदान के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी उनके आदर्शों से प्रेरणा मिलती रहेगी।
सिख गुरुओं के बलिदान को बताया राष्ट्र की धरोहर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव से लेकर गुरु गोविंद सिंह तक सभी सिख गुरुओं ने समाज को समानता, सेवा, मानवता और आध्यात्मिकता का संदेश दिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि इन गुरुओं का जीवन केवल धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की अमूल्य धरोहर है। उनके आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रहे हैं।
वीर बाल दिवस का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाए जाने के निर्णय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सिख इतिहास के उन वीर बालकों के अद्भुत साहस और बलिदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि यह दिवस देश के युवाओं और बच्चों को साहस, त्याग, राष्ट्रभक्ति तथा अपने मूल्यों के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देता है। ऐसे ऐतिहासिक प्रसंगों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
करतारपुर कॉरिडोर का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने गुरु नानक देव से जुड़े पवित्र स्थल करतारपुर साहिब का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के बाद श्रद्धालुओं के लिए इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल तक पहुंचना आसान नहीं था। लंबे समय तक लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर बनने से श्रद्धालुओं को अपने धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिला है। इससे गुरु नानक देव की शिक्षाओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी उपलब्ध हुआ है।
समाज में एकता और सद्भाव का दिया संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविधता और सामाजिक समरसता में निहित है। विभिन्न धर्मों, परंपराओं और संस्कृतियों का सम्मान करना भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता रही है।
उन्होंने कहा कि बैसाखी जैसे पर्व लोगों को एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटने, समाज में सद्भाव बनाए रखने और सेवा की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने इस सम्मान के लिए गुरुद्वारा प्रबंधन और संगत का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता और सामाजिक सद्भाव की भावना का सम्मान है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न शिक्षाविदों और सेवादारों को भी किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले कई प्रमुख व्यक्तियों को भी सम्मानित किया। इनमें गुरुद्वारा नजरबाग अयोध्या के प्रधान सेवादार बाबा महेंद्र सिंह, गुरु नानक विद्यालय चंदन नगर की प्राचार्य रंजित कौर, गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज बांसमंडी की प्रधानाचार्य निशा तिवारी तथा खालसा इंटर कॉलेज के प्राचार्य वीरेंद्र सिंह शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने सभी को अंगवस्त्र पहनाकर और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके सामाजिक एवं शैक्षिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों का योगदान समाज निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
बैसाखी के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता नीरज सिंह, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार राजेंद्र सिंह बग्गा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। गुरुद्वारे में धार्मिक आयोजन, कीर्तन और सामूहिक अरदास का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
बैसाखी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
बैसाखी का पर्व भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। पंजाब और उत्तर भारत में यह नई फसल की खुशी का प्रतीक माना जाता है, जबकि सिख समुदाय के लिए यह खालसा पंथ की स्थापना का ऐतिहासिक दिवस भी है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष दीवान, कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया जाता है।
यह पर्व सेवा, समानता, साहस, त्याग और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश देता है। इसी कारण देश और दुनिया में रहने वाले सिख समुदाय के लोग बैसाखी को अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।




