UP: अब किसी भी राज्य से गाड़ी खरीद कर ले सकेंगे UP का VIP नंबर।

UP: अब किसी भी राज्य से गाड़ी खरीद कर ले सकेंगे UP का VIP नंबर।

उत्तर प्रदेश में वाहन पंजीकरण और पसंदीदा (VIP/Fancy) नंबर लेने की प्रक्रिया को लेकर परिवहन विभाग ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब ऐसे वाहन मालिक भी उत्तर प्रदेश में अपनी पसंद का वीआईपी नंबर प्राप्त कर सकेंगे, जिन्होंने अपनी कार या अन्य वाहन किसी दूसरे राज्य से खरीदा है। पहले यह सुविधा मुख्य रूप से उन्हीं वाहनों के लिए उपलब्ध थी, जिन्हें उत्तर प्रदेश के भीतर स्थित अधिकृत डीलरशिप से खरीदा जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र या किसी अन्य राज्य से खरीदे गए वाहनों को भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उत्तर प्रदेश में फैंसी नंबर लेने का अवसर मिलेगा।

परिवहन विभाग का मानना है कि इस बदलाव से वाहन मालिकों को सुविधा मिलने के साथ-साथ राज्य सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विभाग ने पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद पाया कि बड़ी संख्या में ऐसे वाहन थे, जिनके लिए वीआईपी नंबर आवंटित नहीं किए जा सके। इसी वजह से संभावित राजस्व का बड़ा हिस्सा विभाग को प्राप्त नहीं हो पाया। अब नियमों में संशोधन कर इस व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

नई गाइडलाइन अप्रैल माह से लागू कर दी गई है। इसके लिए सभी सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि प्रदेश के सभी जिलों में एक समान प्रक्रिया के तहत आवेदन स्वीकार किए जा सकें।

पहले क्या थी व्यवस्था?

अब तक उत्तर प्रदेश में वीआईपी या फैंसी नंबर लेने की सुविधा केवल उन वाहनों तक सीमित थी, जिनकी खरीद राज्य के भीतर पंजीकृत डीलर से की गई होती थी। यदि कोई व्यक्ति दिल्ली, हरियाणा या किसी अन्य राज्य से नई कार खरीदकर उत्तर प्रदेश में उसका पंजीकरण कराना चाहता था, तो उसे पसंदीदा नंबर प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था।

ऐसे मामलों में वाहन का स्थायी पंजीकरण उत्तर प्रदेश में होने के बावजूद विभाग की पुरानी व्यवस्था के कारण कई लोकप्रिय नंबर उपलब्ध नहीं कराए जाते थे। परिणामस्वरूप वाहन मालिकों को सामान्य क्रमांक स्वीकार करना पड़ता था, जबकि वे अतिरिक्त शुल्क देकर अपनी पसंद का नंबर लेने के इच्छुक रहते थे।

इस स्थिति के कारण न केवल वाहन मालिक असंतुष्ट थे, बल्कि परिवहन विभाग को भी संभावित राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

नए नियम से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य से वाहन खरीदता है और वहां से अस्थायी पंजीकरण (Temporary Registration) के साथ अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करके उत्तर प्रदेश लाता है, तो वह अब उत्तर प्रदेश में वाहन का पंजीकरण कराने के साथ-साथ मनचाहा वीआईपी नंबर भी प्राप्त कर सकेगा।

इसके लिए निर्धारित दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन स्वीकृत होने के बाद संबंधित वाहन मालिक ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध फैंसी नंबरों के लिए आवेदन कर सकेगा।

फॉर्म-27 के माध्यम से करना होगा आवेदन

परिवहन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार दूसरे राज्य से लाए गए वाहन के लिए केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 के तहत निर्धारित फॉर्म-27 में आवेदन करना होगा। इसके साथ संबंधित राज्य से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जमा करना अनिवार्य होगा।

दस्तावेजों के सत्यापन के बाद वाहन का उत्तर प्रदेश में पंजीकरण किया जाएगा और यदि संबंधित श्रेणी का नंबर उपलब्ध होगा तो वाहन मालिक उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्राप्त कर सकेगा।

VIP नंबरों की नीलामी प्रक्रिया, राजस्व बढ़ाने की तैयारी और वाहन मालिकों को मिलने वाले लाभ

ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से होगा नंबर आवंटन

उत्तर प्रदेश में फैंसी और वीआईपी नंबरों का आवंटन पहले की तरह ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। जिन नंबरों की मांग अधिक होती है, उनके लिए ई-ऑक्शन (ऑनलाइन नीलामी) आयोजित की जाएगी। जो व्यक्ति सबसे अधिक बोली लगाएगा, उसे संबंधित नंबर आवंटित किया जाएगा।

कुछ श्रेणियों के नंबरों का आवंटन ‘प्रथम आगत-प्रथम पावत’ (First Come, First Serve) के सिद्धांत पर भी किया जाता है। यह व्यवस्था उन नंबरों पर लागू होती है जिनकी मांग अपेक्षाकृत कम होती है।

इन नंबरों की रहती है सबसे अधिक मांग

वाहन मालिकों के बीच कुछ विशेष नंबरों की लोकप्रियता वर्षों से बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर 0001, 0007, 0011, 0099, 0786, 1111, 2222, 3333, 5555, 7777, 8888 और 9999 जैसे नंबरों की मांग सबसे अधिक रहती है।

ऐसे नंबरों की नीलामी के दौरान कई बार हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की बोली लगाई जाती है। लग्जरी कार मालिक, कारोबारी, उद्योगपति और कई अन्य लोग अपनी पसंद के नंबर के लिए अतिरिक्त राशि खर्च करने को तैयार रहते हैं।

विभाग को हुआ था हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमानित नुकसान

परिवहन विभाग द्वारा किए गए आंतरिक अध्ययन में यह सामने आया कि एक सितंबर 2021 से 28 फरवरी 2025 के बीच बड़ी संख्या में वीआईपी नंबर आवंटित नहीं किए जा सके। विभाग के अनुसार इस अवधि में लगभग 2.84 लाख फैंसी नंबर बिना आवंटन के रह गए।

यदि प्रत्येक नंबर से न्यूनतम निर्धारित शुल्क भी प्राप्त होता, तो विभाग को लगभग 1424.99 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता था। वहीं लोकप्रिय नंबरों की नीलामी को शामिल किया जाए तो संभावित आय इससे भी कहीं अधिक हो सकती थी।

विशेष श्रेणी के नंबरों की बोली कई बार 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच जाती है। विभाग का अनुमान है कि यदि सभी उपलब्ध वीआईपी नंबरों का प्रभावी तरीके से आवंटन किया जाए तो कुल राजस्व दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है।

अन्य राज्यों की व्यवस्था का किया गया अध्ययन

नियमों में संशोधन से पहले परिवहन विभाग ने विभिन्न राज्यों की पंजीकरण प्रणाली और वीआईपी नंबर आवंटन प्रक्रिया का अध्ययन किया। कई राज्यों में दूसरे राज्यों से आए वाहनों को भी निर्धारित शर्तों के तहत फैंसी नंबर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं का विश्लेषण करने के बाद उत्तर प्रदेश में भी समान सुविधा लागू करने का निर्णय लिया गया।

विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन मालिकों को अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े और सभी पात्र आवेदकों को समान अवसर मिल सके।

दिल्ली और हरियाणा से वाहन खरीदने वालों को मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश के अनेक निवासी नई कारें और लग्जरी वाहन दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान तथा अन्य पड़ोसी राज्यों से खरीदते हैं। कई बार इन राज्यों में मॉडल की उपलब्धता अधिक होती है या कीमतों और ऑफर्स में अंतर होने के कारण लोग वहां से खरीदारी करना पसंद करते हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे वाहन मालिकों को अब केवल वाहन खरीदने के स्थान के कारण अपने पसंदीदा नंबर से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। निर्धारित दस्तावेजों और प्रक्रिया का पालन करने पर वे उत्तर प्रदेश में अपनी पसंद का पंजीकरण नंबर प्राप्त कर सकेंगे।

डिजिटल प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता

परिवहन विभाग लगातार अपनी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, ई-ऑक्शन और भुगतान जैसी सुविधाओं के कारण पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनने की उम्मीद है।

ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

वाहन मालिकों के लिए जरूरी दस्तावेज

दूसरे राज्य से खरीदे गए वाहन के लिए उत्तर प्रदेश में वीआईपी नंबर प्राप्त करने हेतु वाहन मालिक को अस्थायी पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), निर्धारित आवेदन पत्र (फॉर्म-27), पहचान संबंधी दस्तावेज, पते का प्रमाण तथा परिवहन विभाग द्वारा मांगे गए अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे। सभी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद वाहन के स्थायी पंजीकरण और नंबर आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

राजस्व और सुविधा दोनों पर रहेगा फोकस

नई नीति का उद्देश्य केवल सरकारी राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि वाहन पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और नागरिकों के अनुकूल बनाना भी है। इससे उन लोगों को भी समान अवसर मिलेगा, जो अपनी पसंद के राज्य से वाहन खरीदना चाहते हैं, लेकिन पंजीकरण अपने गृह जनपद या उत्तर प्रदेश में कराना पसंद करते हैं। साथ ही ऑनलाइन प्रणाली और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के माध्यम से वीआईपी नंबर आवंटन प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है।

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