चंडीगढ़ नगर निगम के दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच एक बार फिर चुनावी तालमेल की चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति और राजनीतिक मामलों की समिति की रविवार को हुई बैठक में नगर निगम चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों के साथ-साथ आप के साथ गठबंधन के प्रस्ताव पर भी मंथन हुआ। बैठक में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की, सांसद मनीष तिवारी समेत दोनों समितियों के सदस्य और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में पार्टी नेताओं से नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर राय ली गई। चर्चा के दौरान अधिकांश सदस्यों ने गठबंधन के प्रस्ताव के पक्ष में अपनी सहमति जताई। हालांकि, इसे अभी अंतिम फैसला नहीं माना जा रहा है। प्रदेश स्तर पर नेताओं और समिति सदस्यों की राय सामने आने के बाद प्रस्ताव को पार्टी हाईकमान के समक्ष रखा जाएगा। गठबंधन होगा या नहीं और यदि होगा तो सीटों का बंटवारा किस तरह किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान स्तर पर ही लिया जाएगा।
कांग्रेस नेतृत्व ने बैठक में नगर निगम चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन को वार्ड, ब्लॉक और बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर भी जोर दिया। पार्टी की ओर से आने वाले दिनों में जनसंपर्क अभियान तेज करने और स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान के केंद्र में रखने की तैयारी है।
2024 लोकसभा चुनाव में साथ आया था फार्मूला
कांग्रेस और आप के बीच चंडीगढ़ में चुनावी तालमेल नया नहीं है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने विपक्षी गठबंधन के तहत समझौता किया था। सीट बंटवारे के तहत चंडीगढ़ लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई और मनीष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया। तिवारी ने भाजपा के संजय टंडन को 2,504 वोट के अंतर से हराया था। उन्हें 2,16,657 वोट मिले, जबकि टंडन को 2,14,153 वोट मिले थे। दोनों के बीच वोट शेयर का अंतर भी काफी कम रहा।
इसके बाद चंडीगढ़ के मेयर चुनावों में भी कांग्रेस और आप ने अलग-अलग मौकों पर मिलकर उम्मीदवार उतारे। जनवरी 2024 के मेयर चुनाव में आप-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को लेकर विवाद हुआ था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मतपत्रों की दोबारा जांच के आधार पर कुलदीप कुमार को वैध रूप से निर्वाचित मेयर घोषित किया था।
जनवरी 2025 के मेयर चुनाव में भी दोनों दलों ने मिलकर उम्मीदवार उतारा था। हालांकि उस चुनाव में भाजपा की हरप्रीत कौर बबला ने आप-कांग्रेस गठबंधन की प्रत्याशी प्रेमलता को दो वोट के अंतर से हराया। बबला को 19 और प्रेमलता को 17 वोट मिले थे।
यानी चंडीगढ़ के स्थानीय चुनावी समीकरण में कांग्रेस और आप के बीच तालमेल का प्रयोग पहले भी हो चुका है। हालांकि पंजाब में दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक खेमों में हैं और एक-दूसरे के खिलाफ लगातार राजनीतिक हमले करते रहे हैं। यही वजह है कि चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के लिए संभावित गठबंधन को लेकर दोनों दलों के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भी राजनीतिक चर्चा तेज होना स्वाभाविक है।
2021 का चुनाव बना गठबंधन के मंथन की बड़ी वजह
कांग्रेस के भीतर आप के साथ गठबंधन पर विचार की एक अहम वजह 2021 का नगर निगम चुनाव भी माना जा रहा है। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव लड़ा था। कुल 35 वार्डों में आप ने 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई थी। भाजपा को 12 और कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती थी। चंडीगढ़ प्रशासन के आधिकारिक चुनाव परिणामों में सभी 35 वार्डों के निर्वाचित पार्षदों का विवरण दर्ज है।
इस चुनाव की खास बात यह रही कि सीटों के मामले में आप सबसे आगे रही, लेकिन वोट प्रतिशत में कांग्रेस आगे थी। उपलब्ध चुनाव आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस को 29.79 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा का वोट प्रतिशत 29.30 और आप का 27.08 प्रतिशत रहा था। इस तरह कांग्रेस और भाजपा के वोट शेयर में अंतर बहुत कम था, जबकि आप भी दोनों के काफी करीब रही।
कांग्रेस के भीतर गठबंधन के पक्ष में तर्क देने वाले नेताओं का मानना है कि तीन प्रमुख दलों के अलग-अलग मैदान में उतरने पर विपक्षी मतों के विभाजन की स्थिति बन सकती है। 2021 में भी कांग्रेस, भाजपा और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। उस चुनाव में आप ने पहली बार बड़ी संख्या में वार्डों में जीत हासिल की और नगर निगम में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि 2021 और प्रस्तावित 2026 के चुनावों के बीच राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। दोनों दलों का संगठन, नेतृत्व, पार्षदों की स्थिति और स्थानीय मुद्दे उस समय से अलग हैं। इसलिए पुराने चुनाव के आंकड़ों को मौजूदा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।
सीटों से अलग वोट प्रतिशत की कहानी
2021 के नतीजों में कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य उसका वोट प्रतिशत रहा था। कांग्रेस ने आठ सीटें जीतीं, लेकिन उसे 29.79 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा को 12 सीटें मिलीं और उसका वोट शेयर 29.30 प्रतिशत था। वहीं आप 14 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, लेकिन उसका वोट शेयर 27.08 प्रतिशत रहा।
इससे चंडीगढ़ की उस समय की चुनावी तस्वीर में सीट और वोट प्रतिशत के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। आप को सबसे अधिक सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को सबसे अधिक वोट प्रतिशत मिला। भाजपा भी वोट प्रतिशत के मामले में कांग्रेस से बहुत पीछे नहीं थी।
कांग्रेस के भीतर गठबंधन पर विचार करने वाले नेताओं का एक वर्ग इसी आंकड़े को आधार बनाकर मानता है कि यदि कांग्रेस और आप के वोट एक साथ आते हैं तो चुनावी गणित अलग हो सकता है। हालांकि, किसी भी गठबंधन की वास्तविक स्थिति केवल कुल वोट प्रतिशत जोड़ने से तय नहीं होती। वार्डवार उम्मीदवारों की स्थिति, स्थानीय समीकरण, बागी उम्मीदवार, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी परिणाम को प्रभावित करती हैं।
पंजाब में अलग राह, चंडीगढ़ में अलग समीकरण
कांग्रेस और आप के बीच संभावित चंडीगढ़ गठबंधन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में दोनों दल एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। पंजाब में आप सत्ता में है, जबकि कांग्रेस विपक्ष में रहकर सरकार की नीतियों और कामकाज पर लगातार सवाल उठाती रही है। दोनों दलों के स्थानीय नेता कई मुद्दों पर आमने-सामने रहे हैं।
इसके बावजूद चंडीगढ़ की राजनीतिक स्थिति अलग है। यहां लोकसभा चुनाव से लेकर नगर निगम के मेयर चुनाव तक दोनों दल अलग-अलग मौकों पर साथ आ चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी को आप का समर्थन मिला था और उन्होंने भाजपा के संजय टंडन को 2,504 वोट से हराया था।
इसलिए अब नगर निगम चुनाव में गठबंधन की चर्चा को केवल पंजाब की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा रहा। चंडीगढ़ के स्थानीय चुनावी समीकरण, 35 वार्डों की संरचना और पिछले चुनाव के परिणाम कांग्रेस नेतृत्व के लिए अलग गणित पेश करते हैं।
हाईकमान के फैसले पर टिकी निगाहें
प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में गठबंधन के पक्ष में राय सामने आने के बाद अब अगला कदम कांग्रेस हाईकमान का होगा। प्रदेश नेतृत्व की राय को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा और इसके बाद ही आगे की रणनीति तय होने की संभावना है।
यदि गठबंधन पर सहमति बनती है तो उसके बाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सीटों का बंटवारा होगा। किस पार्टी को कितने वार्ड मिलेंगे और किन इलाकों में कौन सा दल उम्मीदवार उतारेगा, यह स्थानीय स्तर पर सबसे संवेदनशील विषय हो सकता है। इसके अलावा दोनों दलों को अपने-अपने संगठन और संभावित उम्मीदवारों को भी साथ लेकर चलना होगा।
दूसरी ओर, यदि गठबंधन पर अंतिम सहमति नहीं बनती है तो दोनों दलों को अपने दम पर चुनावी तैयारी करनी होगी। ऐसी स्थिति में 2021 के बाद बदले राजनीतिक समीकरण, मौजूदा पार्षदों की स्थिति और वार्डवार संगठन की ताकत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल कांग्रेस ने औपचारिक रूप से गठबंधन को अंतिम रूप नहीं दिया है। रविवार की बैठक में सामने आई राय को अगले स्तर पर ले जाना बाकी है। ऐसे में दिसंबर में होने वाले प्रस्तावित नगर निगम चुनाव से पहले चंडीगढ़ की राजनीति में कांग्रेस-आप के बीच संभावित तालमेल आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकता है।




