‘नौकरशाही का राजनीतिकरण, राजनीति का अपराधीकरण’, AAP सरकार पर सुनील जाखड़ का तीखा वार

‘नौकरशाही का राजनीतिकरण, राजनीति का अपराधीकरण’, AAP सरकार पर सुनील जाखड़ का तीखा वार

चंडीगढ़: पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक प्रणाली दोनों को प्रभावित करने वाली नीतियां अपना रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले सरकारी तंत्र को राजनीतिक दबाव में लाया गया और अब राजनीति में आपराधिक तत्वों को जगह देकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। जाखड़ ने कहा कि सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है और भारतीय जनता पार्टी ऐसे किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी।

चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सुनील जाखड़ ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका निष्पक्ष और संविधान के अनुरूप होनी चाहिए, लेकिन पंजाब में हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार सरकार की नीतियों और राजनीतिक दबाव के कारण नौकरशाही की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है, जिससे प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जाखड़ ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान और उसके बाद नगर निगमों तथा नगर परिषदों में मेयर और अध्यक्षों के चुनाव के समय प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन मौजूदा सरकार इस कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई।

उन्होंने कहा कि नौकरशाही लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और अधिकारियों का दायित्व संविधान तथा कानून के अनुसार कार्य करना है। यदि अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बढ़ेगा तो आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा। जाखड़ ने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियों में कई अधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं और उन्हें सरकार के दबाव में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं रहेगी तो आम जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किस पर भरोसा करेगी।

भाजपा नेता ने राज्य की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी जनता का भरोसा खोने के बाद अब नए राजनीतिक समीकरण बनाने में लगी हुई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ऐसे लोगों को राजनीति में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है जिनकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठते रहे हैं। उनके अनुसार यदि राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की भागीदारी बढ़ती है तो इसका सबसे अधिक नुकसान लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज दोनों को होगा।

सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब पहले भी कठिन दौर देख चुका है और राज्य की सामाजिक तथा राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक नियंत्रण और राजनीति में आपराधिक तत्वों की भूमिका बढ़ती रही तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर राज्य सरकार “ऑपरेशन प्रहार” जैसे अभियानों के माध्यम से गैंगस्टरों और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक स्तर पर ऐसे लोगों को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। जाखड़ ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अपराध के खिलाफ गंभीर है तो उसे कानून के दायरे में निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए और किसी भी प्रकार के राजनीतिक संरक्षण की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए।

भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान की भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था की पक्षधर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार किसी भी प्रकार की ऐसी नीति अपनाती है जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों या पंजाब के हितों को नुकसान पहुंचता है तो भाजपा उसका लोकतांत्रिक और राजनीतिक स्तर पर विरोध करेगी।

जाखड़ ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए भी राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब की राजनीति और प्रशासन को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है, वह राज्य के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य के लोगों के हितों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर अपनी आवाज उठाती रहेगी।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अबोहर नगर निगम और फाजिल्का नगर परिषद में भाजपा को मिली सफलता पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन का परिणाम है। उनके अनुसार इन परिणामों से स्पष्ट है कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में लोग भाजपा की नीतियों और कार्यशैली पर भरोसा जता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया और जनता ने भी भाजपा को समर्थन देकर सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने इन क्षेत्रों के मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा भविष्य में भी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।

सुनील जाखड़ ने राज्य में चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास करती हुई दिखाई नहीं दे रही। उनके अनुसार यदि आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी लंबे समय तक हड़ताल पर रहते हैं तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह समय रहते बातचीत के माध्यम से समाधान निकाले।

उन्होंने मनरेगा कर्मचारियों के आंदोलन का भी उल्लेख करते हुए सरकार की आलोचना की। जाखड़ ने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के साथ सख्ती बरती गई, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों और आम नागरिकों की बात सुनना सरकार का दायित्व होता है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना ही सबसे बेहतर रास्ता है।

भाजपा नेता ने कहा कि राज्य में विभिन्न वर्गों के कर्मचारी लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय संवाद स्थापित करना चाहिए। उनके अनुसार यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और जनसेवाओं पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और सरकार को जवाबदेह बनाने का प्रयास करेगी। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता की आवाज को प्रमुखता से सामने रखने की होती है तथा भाजपा इसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज हो रहा है। एक ओर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को जनता के बीच रख रही है, वहीं विपक्ष सरकार की कार्यशैली, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

फिलहाल सुनील जाखड़ के इन आरोपों के बाद पंजाब की राजनीतिक बहस एक बार फिर प्रशासनिक निष्पक्षता, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर केंद्रित होती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।