पंजाब कांग्रेस भवन में रणजीत सिंह तारखानमाजरा से विवाद और गाली-गलौज का आरोप, मामला पुलिस थाने तक पहुंचने के बाद पार्टी ने शुरू की कार्रवाई
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और नेताओं के बीच आपसी खींचतान के बीच अब पार्टी संगठन ने अनुशासनहीनता के मामलों पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने बरिंदर सिंह ढिल्लों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। उन पर चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में पार्टी नेता रणजीत सिंह तारखानमाजरा के साथ दुर्व्यवहार करने, गाली-गलौज करने और विवाद को बढ़ाने के आरोप हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के भीतर अनुशासनहीनता और नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से होने वाले विवादों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी के चेयरमैन एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अवतार हेनरी की ओर से यह नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में बरिंदर सिंह ढिल्लों से पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्हें तीन दिन का समय देते हुए कहा गया है कि वह निर्धारित अवधि के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करें। अब पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि ढिल्लों की ओर से दिए जाने वाले जवाब के आधार पर संगठन आगे क्या कदम उठाता है।
दरअसल, कुछ दिन पहले पंजाब कांग्रेस भवन में बरिंदर सिंह ढिल्लों और रणजीत सिंह तारखानमाजरा के बीच किसी मुद्दे को लेकर विवाद हो गया था। बताया जा रहा है कि शुरुआत में दोनों नेताओं के बीच सामान्य बातचीत के दौरान किसी बात को लेकर असहमति पैदा हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला तीखी बहस में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ने के साथ ही कथित तौर पर गाली-गलौज भी शुरू हो गई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मामला हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आ गई।
पार्टी कार्यालय में हुए इस घटनाक्रम ने संगठन के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी थी। कांग्रेस भवन को पार्टी की गतिविधियों और संगठनात्मक बैठकों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में वहां दो नेताओं के बीच इस तरह का विवाद सामने आने से पार्टी की कार्यप्रणाली और आंतरिक अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे। मामला केवल आपसी कहासुनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विवाद के बाद पुलिस थाने तक पहुंच गया। इससे घटनाक्रम ने राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर और गंभीर रूप ले लिया।
पार्टी कार्यालय में विवाद से संगठन की छवि पर असर
कांग्रेस के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब में पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में पार्टी के नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से विवाद होना संगठन की रणनीति और एकजुटता के प्रयासों के लिए चुनौती बन सकता है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि आपसी मतभेद और व्यक्तिगत विवाद संगठनात्मक गतिविधियों पर हावी हों।
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से विभिन्न नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद और गुटीय खींचतान की चर्चा होती रही है। पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती अलग-अलग नेताओं और उनके समर्थकों को एक मंच पर लाकर चुनावी तैयारियों को गति देने की है। संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियां बांटने, जिला और विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने तथा कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में पार्टी कार्यालय के भीतर ही नेताओं के बीच विवाद होना नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन की मजबूती केवल राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक बयानों से नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन और आपसी समन्वय से भी तय होती है। यदि पार्टी के नेता ही आपस में विवादों में उलझे रहेंगे तो इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और आम जनता के बीच संगठन की छवि पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
तीन दिन में जवाब देना होगा
अवतार हेनरी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अब बरिंदर सिंह ढिल्लों को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। उन्हें यह बताना होगा कि पंजाब कांग्रेस भवन में हुए विवाद के दौरान उनकी क्या भूमिका रही और उन पर लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका पक्ष क्या है। पार्टी की अनुशासनात्मक कमेटी उनके जवाब की समीक्षा करने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।
कारण बताओ नोटिस जारी होने का अर्थ फिलहाल पार्टी की ओर से आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगना है। अंतिम निर्णय ढिल्लों के जवाब और मामले से जुड़े तथ्यों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। यदि पार्टी नेतृत्व जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई के अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी अंतिम फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।
मिशन-2027 के बीच अनुशासन की चुनौती
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व राज्य में दोबारा सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से संगठनात्मक स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुटा है। वरिष्ठ नेताओं की बैठकों, राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के लिए सबसे बड़ी जरूरत एकजुटता बनाए रखना है।
ऐसे समय में नेताओं के बीच विवाद और अनुशासनहीनता के आरोप पार्टी की चुनावी तैयारियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि संगठन में व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर पार्टी का हित होना चाहिए। पार्टी भवन में हुए विवाद पर नोटिस जारी करना भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें बरिंदर सिंह ढिल्लों के जवाब पर टिकी हैं। तीन दिन की समयसीमा पूरी होने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी इस मामले में आगे का रुख तय करेगी। यह भी देखना होगा कि पार्टी केवल स्पष्टीकरण लेकर मामले को समाप्त करती है या संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए कोई सख्त कदम उठाती है। फिलहाल इस घटनाक्रम ने पंजाब कांग्रेस के भीतर अनुशासन, आपसी तालमेल और नेताओं की जवाबदेही को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।




