सीनियर कांग्रेस नेता और विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। खैहरा ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से सवाल करते हुए कहा कि जिन नेताओं ने राजनीति में ईमानदारी को अपना सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था, उन्हें अब अपनी सरकार में उठ रहे विवादों पर जवाब देना चाहिए।
खैहरा ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने निजी विदेश यात्रा का खर्च सरकारी खजाने से लेने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में बैंस कनाडा की निजी यात्रा पर गए थे और इस दौरान यात्रा खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए कथित तौर पर सरकारी धन से दावा किया गया। कांग्रेस विधायक ने कहा कि यदि यात्रा निजी थी तो उसका खर्च सरकारी खाते से कैसे लिया जा सकता है, इसकी जांच होनी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खैहरा ने कहा कि कथित तौर पर शिक्षा मंत्री 17 से 20 जनवरी 2024 के बीच निजी दौरे पर कनाडा गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस यात्रा से जुड़े करीब 4.48 लाख रुपये के खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा किया गया और लगभग तीन लाख रुपये यात्रा भत्ते के रूप में भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। खैहरा ने सवाल उठाया कि निजी दौरे को सरकारी यात्रा के रूप में दिखाना नियमों का उल्लंघन है या नहीं, इसका फैसला जांच के बाद होना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस अवधि में मंत्री विदेश में मौजूद थे, उसी दौरान सरकारी वाहनों के इस्तेमाल से जुड़े कुछ बिल भी सामने आए हैं। खैहरा के मुताबिक, मंत्री की गैरमौजूदगी में चंडीगढ़, मोहाली और दिल्ली में सरकारी गाड़ियों की आवाजाही दिखाई गई और करीब 70 हजार रुपये के वाहन एवं यात्रा संबंधी बिल कथित तौर पर पास करवाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल खड़ा करता है।
खैहरा ने मांग की कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह नियमों का पालन करने में उदाहरण पेश करे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के मंत्री ही नियमों को नजरअंदाज करेंगे तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।
कांग्रेस विधायक ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने कहा कि अब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कथित वित्तीय अनियमितताओं पर उसकी नीति क्या है और आरोपों की जांच कब शुरू की जाएगी।
खैहरा ने पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य पर भारी कर्ज का बोझ है और ऐसे समय में सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सरकार को अधिक सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ पंजाब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चला रही है।
उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार द्वारा टीवी चैनलों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्रचार के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। खैहरा ने कहा कि भविष्य में बनने वाली सरकार को मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए सभी बड़े खर्चों का विशेष ऑडिट करवाना चाहिए ताकि जनता के सामने पूरा हिसाब रखा जा सके।
उन्होंने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को पहले से चल रहे विवादों को लेकर भी घेरा। खैहरा ने कहा कि शिक्षा विभाग में भर्ती परीक्षाओं और कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार लगातार सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पेपर लीक से इनकार किए जाने के बावजूद पुराने बयान और घटनाक्रम इस मामले में कई सवाल खड़े करते हैं।
खैहरा ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से बेरोजगार युवाओं में निराशा बढ़ रही है। उन्होंने फरीदकोट में फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में कथित नकल और अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के इस्तीफे की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो संबंधित मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना चाहिए। खैहरा ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार सामने आ रहे विवादों से बचने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता जवाब चाहती है।
कांग्रेस विधायक ने अवैध खनन के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र से भी अवैध खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में भी खनन गतिविधियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रही है।
खैहरा ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में आप नेता जब विपक्षी राज्यों में छात्रों या कर्मचारियों पर कार्रवाई का विरोध करते हैं, तो पंजाब में अपनी सरकार के रवैये पर भी उन्हें जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं, छात्रों और सफाई कर्मचारियों के आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की घटनाएं सामने आई हैं।
उन्होंने हाल ही में सफाई कर्मचारियों द्वारा किए गए पंजाब बंद का जिक्र करते हुए कहा कि यह सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत है। खैहरा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार लोकतांत्रिक विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और पंजाब को “पुलिस स्टेट” की दिशा में ले जाया जा रहा है।
हालांकि, खैहरा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में और गरमा सकता है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार और जवाबदेही का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार पर आरोपों का जवाब देकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ रहा है।




