पंजाब में ग्रामीण रोजगार योजना के लिए केंद्र की पहली बड़ी मदद, 439.8 करोड़ रुपये जारी

पंजाब में ग्रामीण रोजगार योजना के लिए केंद्र की पहली बड़ी मदद, 439.8 करोड़ रुपये जारी

पंजाब में ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़ी नई केंद्रीय योजना विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) के लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का अपना हिस्सा तय कर दिया है। केंद्र की ओर से पंजाब को इस योजना के तहत कुल 1,331.61 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा उपलब्ध कराया जाना है। इसमें से 439.8 करोड़ रुपये की पहली किस्त राज्य को जारी भी की जा चुकी है।

केंद्र सरकार ने यह जानकारी लोकसभा में दी। योजना को पंजाब में 1 जुलाई 2026 से लागू किया गया है और मौजूदा वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2027 तक इसके तहत गतिविधियां संचालित की जानी हैं। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ आजीविका के अवसर बढ़ाने और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों को गति देने पर जोर दिया जाएगा।

वीबी-जी राम जी योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है। इसका मतलब है कि योजना के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि वहन करेगी। पंजाब के लिए केंद्र की ओर से निर्धारित 1,331.61 करोड़ रुपये के मुकाबले राज्य सरकार को करीब 887.7 करोड़ रुपये अपनी हिस्सेदारी के रूप में लगाने होंगे। दोनों सरकारों की हिस्सेदारी को मिलाकर पंजाब में इस योजना के तहत करीब 2,219 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होने की संभावना है।

हालांकि, केंद्र से पहली किस्त मिलने के बाद आगे की राशि स्वत: जारी नहीं होगी। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगली किस्तों का आवंटन कई मानकों के आधार पर किया जाएगा। इनमें राज्य का स्वीकृत श्रम बजट, रोजगार की मांग, पहले जारी की गई राशि की स्थिति, उपलब्ध फंड, लंबित देनदारियां, योजना का प्रदर्शन और आवश्यक दस्तावेज प्रमुख होंगे। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि पहले मिली राशि का निर्धारित उद्देश्यों के लिए समय पर इस्तेमाल हो और उसकी उपयोगिता से जुड़े दस्तावेज केंद्र को उपलब्ध कराए जाएं।

केंद्र ने राज्यों को पिछली वित्तीय वर्षों से जुड़ी लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए भी प्रस्ताव भेजने को कहा है। इससे पुरानी देनदारियों का निपटारा करने और नई योजना के तहत वित्तीय व्यवस्था को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पंजाब में पूर्ववर्ती मनरेगा योजना से जुड़ी लंबित देनदारियों को लेकर भी केंद्र ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025-26 तक पंजाब की मनरेगा से संबंधित 178.8 करोड़ रुपये की लंबित देनदारियों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 5 अगस्त तक पंजाब को मनरेगा के तहत 246 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसमें 167.9 करोड़ रुपये मजदूरी और 67.3 करोड़ रुपये सामग्री के लिए शामिल हैं।

केंद्र सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंजाब में रोजगार की मांग करने वाले 99.7 प्रतिशत श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया गया। सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि ग्रामीण स्तर पर पर्याप्त संख्या में काम पहले से तैयार रखें, कार्यों की योजना समय पर बनाएं और रोजगार की मांग आने पर श्रमिकों को काम उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी न हो। इसके साथ ही श्रमिकों को योजना के तहत मिलने वाले उनके कानूनी अधिकारों के बारे में भी जागरूक करने पर जोर दिया गया है।

वीबी-जी राम जी योजना को लेकर पंजाब सरकार का शुरुआती रुख काफी विरोध वाला रहा था। दिसंबर 2025 में पंजाब विधानसभा ने योजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। उस समय राज्य सरकार ने योजना को दलित विरोधी बताते हुए केंद्र से इसे वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की थी। पंजाब सरकार ने योजना के 60:40 के वित्तीय अनुपात पर भी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

उस समय राज्य सरकार का तर्क था कि ग्रामीण रोजगार जैसी योजनाओं में राज्यों की वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। पंजाब सरकार ने केंद्र से मनरेगा की पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने की मांग की थी। हालांकि, कुछ महीनों बाद राज्य सरकार ने अपना रुख बदलते हुए जुलाई 2026 में वीबी-जी राम जी योजना को पंजाब में लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना में योजना को 1 जुलाई 2026 से लागू माना गया है।

योजना लागू होने के बाद अब केंद्र की ओर से पंजाब के लिए निर्धारित राशि और पहली किस्त जारी की गई है। इस बदलाव को लेकर राज्य की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार के फैसले को विधानसभा में लिए गए पुराने रुख से यू-टर्न बता रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जिस योजना का पंजाब सरकार ने पहले विधानसभा में विरोध किया था, उसी योजना को बाद में लागू करने का निर्णय लिया गया।

फतेहगढ़ साहिब के सांसद डा. अमर सिंह ने लोकसभा में पंजाब से जुड़े ग्रामीण रोजगार के मुद्दों को उठाया था। उन्होंने राज्य में मजदूरी और सामग्री से संबंधित लंबित देनदारियों तथा श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की स्थिति को लेकर केंद्र से जानकारी मांगी थी। केंद्र के जवाब में पंजाब के लिए निर्धारित केंद्रीय हिस्से, पहली किस्त और मनरेगा की पुरानी देनदारियों से जुड़ी जानकारी सामने आई।

अब पंजाब सरकार के सामने योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती है। केंद्र की ओर से 439.8 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष के लिए 1,331.61 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा निर्धारित है। इसके साथ राज्य को अपनी हिस्सेदारी के तौर पर करीब 887.7 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी।

अगली किस्तों के लिए राज्य सरकार को रोजगार की वास्तविक मांग, श्रम बजट, पहले जारी राशि के उपयोग और योजना के प्रदर्शन पर विशेष ध्यान देना होगा। ग्रामीण इलाकों में समय पर काम उपलब्ध कराना, मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना और सामग्री से जुड़े खर्चों का उचित प्रबंधन योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।

इस योजना के लागू होने से पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित हो सकेगा जब रोजगार की मांग के अनुरूप पर्याप्त कार्य उपलब्ध हों और श्रमिकों को समय पर भुगतान मिले। केंद्र की ओर से अगली किस्तों के लिए निर्धारित शर्तों को देखते हुए राज्य सरकार को योजना के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन दोनों स्तरों पर सतर्कता बरतनी होगी।

कुल मिलाकर, पंजाब में वीबी-जी राम जी योजना की शुरुआत केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय साझेदारी के नए ढांचे के साथ हुई है। केंद्र ने 2026-27 के लिए पंजाब के लिए 1,331.61 करोड़ रुपये का अपना हिस्सा तय किया है और इसमें से 439.8 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। वहीं राज्य सरकार को अपने हिस्से की करीब 887.7 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करानी होगी। अब योजना की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि पंजाब में रोजगार की मांग कितनी रहती है, राज्य उपलब्ध फंड का कितना प्रभावी इस्तेमाल करता है और केंद्र के निर्धारित मानकों के आधार पर अगली किस्तों के लिए पात्रता कितनी जल्दी पूरी करता है।