पंजाब में गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री सेहत योजना अब हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। विशेष रूप से हृदय रोगों और हार्ट अटैक जैसे आपातकालीन मामलों में यह योजना मरीजों को बिना किसी अग्रिम भुगतान के समय पर इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, योजना के तहत कैशलेस सुविधा मिलने से अस्पतालों में उपचार शुरू करने में होने वाली आर्थिक देरी काफी हद तक समाप्त हुई है, जिससे कई मरीजों की जान बचाई जा सकी है।
हाल ही में मालेरकोटला निवासी शेख ज़ीशान कुरैशी के मामले ने इस योजना की उपयोगिता को एक बार फिर सामने लाया। उन्हें अचानक गंभीर हृदय संबंधी समस्या हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद चिकित्सकों ने उनकी कोरोनरी धमनियों में रुकावट पाई और तुरंत परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए) के साथ डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम करने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों के अनुसार पीटीसीए ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हृदय की बंद या संकरी धमनियों को खोलकर रक्त प्रवाह सामान्य किया जाता है। हार्ट अटैक की स्थिति में यह उपचार जितनी जल्दी किया जाए, मरीज के बचने की संभावना उतनी अधिक होती है। यदि उपचार में देरी होती है तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और मरीज की जान पर भी खतरा बढ़ जाता है।
आमतौर पर इस तरह के आपातकालीन उपचार का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। अचानक लाखों या हजारों रुपये की व्यवस्था करना आसान नहीं होता, जिसके कारण कई बार मरीजों का इलाज देर से शुरू होता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना इसी आर्थिक बाधा को दूर करने का काम कर रही है। शेख ज़ीशान कुरैशी के उपचार पर लगभग 80,320 रुपये का खर्च आया, जिसका पूरा भुगतान योजना के तहत किया गया। इससे परिवार को इलाज के दौरान आर्थिक चिंता का सामना नहीं करना पड़ा।
इलाज के बाद शेख ज़ीशान कुरैशी ने बताया कि यदि उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता न मिलती तो समय पर उपचार संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि योजना के कारण उनका इलाज बिना किसी देरी के शुरू हुआ और परिवार पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ा। उनके अनुसार ऐसी योजनाएं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच आसान बनाती हैं।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 6,000 से अधिक हृदय संबंधी प्रक्रियाएं की जा चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या पीटीसीए की रही है, जो हार्ट अटैक के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपचारों में गिनी जाती है। कैशलेस सुविधा मिलने से मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने या उपचार शुरू कराने से पहले धन की व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम के साथ पीटीसीए योजना के अंतर्गत सबसे अधिक खर्च वाली प्रमुख उपचार श्रेणियों में शामिल है। इस उपचार पर अब तक लगभग 64.82 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। व्यय के मामले में यह केवल घुटना प्रत्यारोपण के बाद दूसरे स्थान पर है। अब तक 6,138 से अधिक मरीज इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। प्रति मरीज औसत उपचार लागत लगभग 1.06 लाख रुपये रही है, हालांकि प्रत्येक मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और उपचार की आवश्यकता के अनुसार यह राशि अलग-अलग हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि धमनियों में आई रुकावट को जल्द नहीं हटाया जाए तो हृदय की मांसपेशियां स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इसलिए अस्पतालों में तत्काल एंजियोप्लास्टी शुरू करना मरीज के जीवन को बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उपलब्ध कैशलेस व्यवस्था डॉक्टरों को आर्थिक औपचारिकताओं की प्रतीक्षा किए बिना उपचार शुरू करने में मदद करती है।
ऐसा ही एक और मामला गुरदासपुर जिले की 60 वर्षीय हरजिंदर कौर का है। उन्हें भी गंभीर हृदय समस्या के बाद अमृतसर के महाजन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी पीटीसीए, डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम और अस्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण जैसी जटिल प्रक्रियाएं कीं।
हरजिंदर कौर के पुत्र गुरमीत सिंह, जो पेशे से किसान हैं, ने बताया कि उनके लिए इतना महंगा इलाज करवाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड की सुविधा उपलब्ध न होती तो वे अपनी मां का इलाज नहीं करा पाते। योजना के कारण पूरा उपचार बिना आर्थिक दबाव के हो सका और अब उनकी मां का स्वास्थ्य लगातार बेहतर हो रहा है।
सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंदरा अस्पताल, पटियाला के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ शर्मा का कहना है कि पीटीसीए हार्ट अटैक के मरीजों के लिए सबसे प्रभावी और जीवनरक्षक उपचारों में से एक है। उनके अनुसार इलाज में प्रत्येक मिनट का महत्व होता है, क्योंकि देरी होने पर हृदय को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि पहले कई बार मरीजों के परिजन उपचार शुरू कराने से पहले धन की व्यवस्था करने में समय लगाते थे, जिससे इलाज प्रभावित होता था। लेकिन अब कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने के कारण डॉक्टर बिना किसी वित्तीय औपचारिकता का इंतजार किए तुरंत उपचार शुरू कर सकते हैं। इससे मरीजों के बचने की संभावना बढ़ी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने भी योजना की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुलभ बना रही है। उन्होंने कहा कि जब लोगों को यह भरोसा होता है कि इलाज के लिए तुरंत बड़ी रकम जमा नहीं करनी पड़ेगी, तो वे बिना हिचक अस्पताल पहुंचते हैं और समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि योजना का सबसे बड़ा लाभ यही है कि मरीज और उनके परिवार आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर इलाज पर ध्यान दे सकते हैं। इससे अस्पतालों में उपचार शुरू होने में देरी कम हुई है और गंभीर मरीजों की जान बचाने में सहायता मिली है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में कार्डियक प्रक्रियाओं की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि लोगों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। अधिक से अधिक परिवार इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर उनका भरोसा मजबूत हो रहा है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य के पात्र परिवारों को विभिन्न गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। योजना में हृदय रोगों के अलावा कई अन्य जटिल उपचार भी शामिल हैं, जिससे मरीजों को महंगे इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि भविष्य में इस योजना का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक केवल आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न रहे। विशेष रूप से हार्ट अटैक जैसे आपातकालीन मामलों में समय पर उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मरीजों को शुरुआती “गोल्डन ऑवर” के भीतर उपचार मिल जाए तो गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना इसी उद्देश्य को मजबूत कर रही है, क्योंकि यह आर्थिक बाधाओं को दूर कर समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में मदद कर रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना एक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की पहचान है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से कैशलेस उपचार की सुविधा न केवल मरीजों के जीवन की रक्षा कर रही है, बल्कि हजारों परिवारों को अचानक आने वाले भारी चिकित्सा खर्च के बोझ से भी बचा रही है। यही कारण है कि यह योजना धीरे-धीरे पंजाब की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है।




