पंजाब में सिंचाई व्यवस्था को नई रफ्तार, खन्ना क्षेत्र के 37 हजार एकड़ से ज्यादा खेतों को मिलेगा नहरी पानी का लाभ

पंजाब में सिंचाई व्यवस्था को नई रफ्तार, खन्ना क्षेत्र के 37 हजार एकड़ से ज्यादा खेतों को मिलेगा नहरी पानी का लाभ

पंजाब में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने और तेजी से गिर रहे भूजल स्तर को सुधारने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग पंजाब की ओर से खन्ना क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई सिंचाई परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इन परियोजनाओं के शुरू होने से क्षेत्र के करीब 30 गांवों के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नहरी सिंचाई व्यवस्था से जुड़ जाएगी।

खन्ना के गांव भट्टियां में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 70.52 करोड़ रुपये की लागत से तैयार विभिन्न सिंचाई योजनाओं का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल और कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने संयुक्त रूप से किया। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल किसानों को पानी उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि लंबे समय से भूजल पर बढ़ रहे दबाव को कम करना और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना भी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब की सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नहरी नेटवर्क के विस्तार से किसानों को समय पर पानी मिल रहा है, जिससे खेती की लागत कम होगी और कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि खन्ना क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नहरों के सुधार और आधुनिकीकरण का काम पूरा किया गया है। इसके तहत खन्ना रजवाहा, बीड़ किशन, ललहेड़ी, बरधल, कोटला और नारायणगढ़ माइनर समेत कुल 68.32 किलोमीटर लंबे नहरी नेटवर्क की कंक्रीट लाइनिंग पूरी की गई है। इस कार्य पर लगभग 50.02 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

नहरों की कंक्रीट लाइनिंग से पानी के रिसाव को कम करने में मदद मिलेगी और किसानों तक अधिक मात्रा में पानी पहुंच सकेगा। इससे न केवल सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि जल संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। विभाग का कहना है कि पुरानी नहरों के सुधार से पानी की बर्बादी कम होगी और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।

इसके अलावा क्षेत्र में 23.40 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाने का काम भी पूरा किया गया है। इस परियोजना पर 20.50 करोड़ रुपये की लागत आई है। भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से करीब 30 गांवों की 37 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि को नहरी सिंचाई सुविधा के दायरे में लाया गया है।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पंजाब के अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को नहरी पानी उपलब्ध कराना है ताकि किसानों की ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बाकी बचे कृषि क्षेत्रों को भी नहरी ढांचे से जोड़ने की योजना पर काम किया जाएगा।

उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में खन्ना क्षेत्र के लगभग 21,506 एकड़ क्षेत्र को ही नहरी पानी की सुविधा मिल रही थी, लेकिन अब यह दायरा बढ़कर 42,079 एकड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सरकार की योजनाबद्ध रणनीति और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों का परिणाम है।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि पंजाब लंबे समय से भूजल संकट का सामना कर रहा है। खेती के लिए लगातार ट्यूबवेलों पर निर्भरता बढ़ने से भूजल स्तर में गिरावट आई है। ऐसे में नहरी सिंचाई को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को वैकल्पिक सिंचाई साधन उपलब्ध कराना है ताकि भूजल का संरक्षण किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधन सुरक्षित रह सकें।

उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नहरी प्रणाली को मजबूत करने के लिए 7,572 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके परिणामस्वरूप पंजाब में नहरी पानी के इस्तेमाल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में जहां केवल 26 प्रतिशत नहरी पानी खेतों तक पहुंच रहा था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 86 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

मंत्री ने कहा कि पंजाब में लंबे समय बाद भूजल स्तर में सुधार के संकेत मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि इस सुधार का उल्लेख केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की ओर से संसद में भी किया गया है। उन्होंने कहा कि नहरी सिंचाई को बढ़ावा देने से किसानों को लाभ मिलने के साथ-साथ राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी हो रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि जल संसाधन विभाग ने बिना अतिरिक्त जमीन अधिग्रहण किए और बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले पंजाब की नहरों की क्षमता में 12,000 क्यूसेक की वृद्धि की है। वर्तमान में राज्य की 1,511 नहरों के माध्यम से करीब 39,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह हो रहा है।

सरकार का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था में सुधार का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। नहरी पानी मिलने से किसानों को महंगे भूजल दोहन पर कम निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे डीजल और बिजली खर्च में भी कमी आ सकती है। साथ ही फसलों की बेहतर सिंचाई होने से उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना है।

कार्यक्रम में बिजली मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने भी किसानों के हितों को लेकर सरकार की नीतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों को ट्यूबवेलों के लिए दिन के समय आठ घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों को रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करने की मजबूरी से राहत मिली है।

उन्होंने कहा कि पहले कई किसानों को बिजली आपूर्ति के समय के कारण रातभर खेतों में रहना पड़ता था, जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब दिन के समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध होने से किसानों की सुविधा बढ़ी है और उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार हुआ है।

तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर सिंचाई व्यवस्था, नहरी पानी की उपलब्धता और कृषि क्षेत्र से जुड़े सुधार सरकार की किसान हितैषी नीतियों का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार खेती को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य किसानों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में नहरी सिंचाई का विस्तार बेहद महत्वपूर्ण है। लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सिंचाई के वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा देना आवश्यक हो गया है। नहरों और भूमिगत पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

खन्ना क्षेत्र में शुरू की गई इन परियोजनाओं से जहां हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं यह पंजाब की जल संरक्षण नीति को भी मजबूती प्रदान करेंगी। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में राज्य के अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को नहरी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कुल मिलाकर खन्ना में शुरू हुई 70.52 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाएं पंजाब के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। इनसे किसानों को समय पर पानी उपलब्ध होगा, भूजल पर दबाव कम होगा और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार का कहना है कि नहरी सिंचाई के विस्तार के माध्यम से पंजाब को जल संकट से उबारने और किसानों की आय व सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में लगातार काम जारी रहेगा।