परगट सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिमाओं पर सियासत, रवनीत बिट्टू ने इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह को लेकर उठाए सवाल

परगट सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिमाओं पर सियासत, रवनीत बिट्टू ने इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस भवन में राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण, बाकी प्रतिमाओं को लेकर भाजपा सांसद ने मांगा जवाब; राहुल और प्रियंका गांधी से भी की मामले पर ध्यान देने की अपील

चंडीगढ़। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह के शपथ ग्रहण समारोह के बाद कांग्रेस भवन में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्रियों और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री की प्रतिमाओं को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस कार्यक्रम का वीडियो जारी कर सवाल उठाया कि समारोह के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाई गई, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह की प्रतिमाओं के सामने ऐसा क्यों नहीं किया गया।

बिट्टू ने इस घटनाक्रम को लेकर परगट सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इसके पीछे कोई विशेष रणनीति थी या फिर इसके अन्य कारण हैं। उनके बयान के बाद पंजाब की राजनीति में कांग्रेस की विरासत, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सम्मान और शपथ ग्रहण समारोह में अपनाई गई परंपराओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने इस मामले में गांधी परिवार का भी उल्लेख किया। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से सवाल किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा को सम्मान नहीं दिए जाने के घटनाक्रम को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए। हालांकि, परगट सिंह की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि समारोह के दौरान कुछ प्रतिमाओं पर माल्यार्पण क्यों किया गया और अन्य को क्यों छोड़ दिया गया।

राजीव गांधी को श्रद्धांजलि, इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह पर सवाल

कांग्रेस भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रतिमाओं के सामने श्रद्धांजलि देने के तरीके को लेकर रवनीत बिट्टू ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि राजीव गांधी की प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाकर उन्हें सम्मान दिया गया, तो इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह की प्रतिमाओं के साथ भी ऐसा किया जाना चाहिए था।

बिट्टू ने सवाल किया कि आखिर इस अंतर के पीछे क्या वजह रही। उन्होंने परगट सिंह के फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि इस घटनाक्रम को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए और इसके पीछे की सोच पर चर्चा होनी चाहिए।

उनके बयान का केंद्र कांग्रेस भवन में स्थापित प्रतिमाओं के प्रति सम्मान का सवाल रहा। बिट्टू ने संकेत दिया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों को श्रद्धांजलि देने के मामले में समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी नेता की प्रतिमा को सम्मान दिया जाता है, तो अन्य नेताओं के प्रति भी सम्मान प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि समारोह के आयोजकों ने प्रतिमाओं पर माल्यार्पण को लेकर कोई औपचारिक निर्णय लिया था या यह कार्यक्रम की निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा था। इस कारण प्रतिमाओं के सामने श्रद्धांजलि देने के घटनाक्रम को लेकर उठे सवालों पर संबंधित नेताओं का पक्ष महत्वपूर्ण हो गया है।

बेअंत सिंह की प्रतिमा को लेकर दिया लाइब्रेरी में स्थानांतरित करने का सुझाव

रवनीत बिट्टू ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह की प्रतिमा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस नेतृत्व को कांग्रेस भवन में बेअंत सिंह की प्रतिमा स्थापित होने पर कोई आपत्ति है, तो उसे वहां से हटाकर चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित बेअंत सिंह मेमोरियल लाइब्रेरी में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।

बिट्टू ने इसे अपना व्यक्तिगत सुझाव बताया। उनके बयान के अनुसार, यदि पार्टी किसी प्रतिमा को सम्मान देने के मामले में असहज है, तो उसके स्थान को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बेअंत सिंह की स्मृति और उनके राजनीतिक योगदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए।

बेअंत सिंह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री थे और उनकी हत्या के बाद उनकी स्मृति में चंडीगढ़ में मेमोरियल लाइब्रेरी बनाई गई थी। रवनीत बिट्टू उनके पोते हैं। ऐसे में कांग्रेस भवन में बेअंत सिंह की प्रतिमा को लेकर उठाया गया सवाल उनके परिवार की राजनीतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है।

बिट्टू ने कांग्रेस नेतृत्व से यह स्पष्ट करने की मांग की कि यदि पार्टी भवन में स्थापित प्रतिमाओं के सामने श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया में अंतर रहा है, तो उसके पीछे क्या कारण हैं। उन्होंने इस मुद्दे को केवल एक समारोह तक सीमित रखने के बजाय पूर्व नेताओं के सम्मान और कांग्रेस की राजनीतिक परंपराओं से जोड़कर उठाया।

राहुल और प्रियंका गांधी से भी मांगा जवाब

इस विवाद में रवनीत बिट्टू ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का नाम लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए और यह देखना चाहिए कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा को श्रद्धांजलि देने के दौरान क्यों नजरअंदाज किया गया।

बिट्टू ने इंदिरा गांधी को गांधी परिवार की वरिष्ठ सदस्य और देश की पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में सम्मान दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया, तो इंदिरा गांधी की प्रतिमा के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ।

उनकी टिप्पणी ने इस घटनाक्रम को कांग्रेस की आंतरिक राजनीतिक परंपराओं से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय राजनीति के विमर्श से भी जोड़ दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या परगट सिंह या पार्टी के अन्य नेता इस घटनाक्रम के पीछे की वजह स्पष्ट करते हैं।

1984 की हिंसा का भी किया गया उल्लेख

इंदिरा गांधी की प्रतिमा को लेकर उठे सवालों के बीच वर्ष 1984 की घटनाओं का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण हो गया है। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा हुई थी। इस हिंसा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के सवाल पर कांग्रेस तथा गांधी परिवार की भूमिका लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है।

पंजाब की राजनीति में वर्ष 1984 की घटनाओं का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। अलग-अलग राजनीतिक दल समय-समय पर इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। रवनीत बिट्टू की टिप्पणी भी ऐसे समय सामने आई है, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिमाओं के सामने श्रद्धांजलि देने के तरीके को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

हालांकि, इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं किए जाने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस घटनाक्रम को किसी निश्चित राजनीतिक रणनीति या जानबूझकर लिए गए फैसले का परिणाम मानने से पहले संबंधित पक्षों का स्पष्टीकरण सामने आना जरूरी है।

कांग्रेस से भाजपा तक का सफर और बेअंत सिंह की विरासत

रवनीत सिंह बिट्टू पहले कांग्रेस में सक्रिय थे और पंजाब की राजनीति में पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया और इसके बाद उन्होंने केंद्रीय रेल राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।

बेअंत सिंह के पोते होने के कारण उनका राजनीतिक सफर पंजाब के राजनीतिक इतिहास और कांग्रेस की विरासत से जुड़ा रहा है। कांग्रेस से अलग होने के बाद अब वह भाजपा के नेता के तौर पर कांग्रेस के फैसलों और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं।

कांग्रेस भवन में प्रतिमाओं को लेकर दिया गया उनका ताजा बयान भी इसी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने परगट सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में श्रद्धांजलि देने के तरीके पर सवाल उठाकर कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की कोशिश की है।

दूसरी ओर, परगट सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिमाओं के सामने श्रद्धांजलि देने के घटनाक्रम को लेकर अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि आयोजन के दौरान प्रतिमाओं पर माल्यार्पण को लेकर कोई विशेष कार्यक्रम निर्धारित था या नहीं।

अब कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर नजर

परगट सिंह के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद आयोजित समारोह में प्रतिमाओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। रवनीत बिट्टू ने जहां इस घटनाक्रम के जरिए कांग्रेस की परंपराओं और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर सवाल उठाए हैं, वहीं इस मामले में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

विवाद का मुख्य सवाल यही है कि समारोह के दौरान राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया, लेकिन इंदिरा गांधी और बेअंत सिंह की प्रतिमाओं के सामने ऐसा क्यों नहीं हुआ। जब तक परगट सिंह या कांग्रेस नेतृत्व इस बारे में अपना पक्ष नहीं रखता, तब तक इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकेगी।

फिलहाल, इस घटनाक्रम ने पंजाब कांग्रेस की राजनीतिक विरासत, उसके पूर्व नेताओं के सम्मान और पार्टी के भीतर अपनाई जाने वाली परंपराओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण से यह साफ हो सकता है कि प्रतिमाओं को लेकर उठे सवालों के पीछे कोई प्रशासनिक कारण था या यह केवल समारोह की प्रक्रिया से जुड़ा मामला था।