बांग्लादेश के राष्ट्रपति का इस्तीफा, बोले- बीमारी के कारण जिम्मेदारी निभाना अब संभव नहीं

बांग्लादेश के राष्ट्रपति का इस्तीफा, बोले- बीमारी के कारण जिम्मेदारी निभाना अब संभव नहीं

बांग्लादेश की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंप दिया। राष्ट्रपति ने अपने त्यागपत्र में साफ कहा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अब वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि, उनके इस्तीफे को केवल स्वास्थ्य से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। पिछले कुछ सप्ताह से शेख हसीना से कथित संपर्क और देश के बदलते राजनीतिक माहौल को लेकर भी उन पर लगातार दबाव बढ़ रहा था।

राष्ट्रपति द्वारा दिए गए इस्तीफे में बताया गया कि वह लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी बीमारियों का इलाज करा रहे हैं। हाल ही में चिकित्सकों ने उनमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नामक बीमारी की पुष्टि की है। इस बीमारी के कारण कई बार अचानक बेहोशी जैसी स्थिति बन जाती है और शरीर के कई जरूरी कार्यों पर नियंत्रण प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में देश के राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी निभाना न तो उनके लिए संभव है और न ही उचित।

राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर अचानक सामने जरूर आई, लेकिन इसके संकेत पिछले कई दिनों से मिल रहे थे। बांग्लादेश के कई प्रमुख समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि राष्ट्रपति पद छोड़ सकते हैं। राजनीतिक हलकों में भी इस बात को लेकर अटकलें तेज थीं कि सरकार और सत्तारूढ़ दल के साथ उनके संबंध पहले जैसे नहीं रहे हैं। स्वास्थ्य कारणों के साथ-साथ राजनीतिक घटनाक्रम ने भी उनके फैसले को प्रभावित किया।

दरअसल, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि लंदन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर संपर्क किया था। इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि दोनों के बीच बातचीत की कोशिश हुई थी। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन यह खबर सामने आने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मच गई।

रिपोर्टों के मुताबिक, जैसे ही यह जानकारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंची, उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी का मानना था कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में शेख हसीना से किसी भी तरह का संपर्क उचित नहीं माना जा सकता। इसके बाद राष्ट्रपति पर पद छोड़ने का दबाव और बढ़ गया। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने भी माना कि यह विवाद उनके इस्तीफे की बड़ी वजहों में शामिल रहा।

स्थानीय मीडिया में यह भी दावा किया गया कि सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति के इस कथित संपर्क को लेकर नाराजगी जताई थी। बताया गया कि राष्ट्रपति द्वारा दोबारा शेख हसीना से बातचीत की कोशिश की जानकारी सामने आने के बाद शीर्ष स्तर पर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई। हालांकि सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से इस संबंध में ज्यादा बयान नहीं दिए गए।

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में बांग्लादेश के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उस समय अवामी लीग सरकार सत्ता में थी और शेख हसीना प्रधानमंत्री थीं। लेकिन जुलाई और अगस्त 2024 में देशभर में हुए छात्र आंदोलन ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदल दी। आंदोलन लगातार उग्र होता गया और अंततः अवामी लीग सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा। राजनीतिक संकट गहराने के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और वह भारत आ गईं।

सरकार बदलने के बावजूद राष्ट्रपति शहाबुद्दीन अपने पद पर बने रहे। वह अवामी लीग शासनकाल के ऐसे प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारी थे, जिन्होंने सत्ता परिवर्तन के बाद भी अपना कार्यकाल जारी रखा। इसी कारण विपक्ष और कई राजनीतिक दल लगातार उनके भविष्य को लेकर सवाल उठाते रहे। समय-समय पर उनके इस्तीफे की मांग भी होती रही, लेकिन उन्होंने उस समय पद नहीं छोड़ा था।

मई महीने में राष्ट्रपति इलाज के लिए लंदन गए थे। वह 9 मई को वहां पहुंचे और करीब नौ दिन बाद 18 मई को ढाका लौट आए। इसी विदेश यात्रा के दौरान उनके और शेख हसीना के बीच कथित फोन संपर्क की खबरें सामने आईं। स्थानीय अखबारों ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया था। विपक्षी दलों ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया और राष्ट्रपति से जवाब मांगा।

राजनीतिक दबाव उस समय और बढ़ गया जब कुछ दिन पहले शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह निर्वासन समाप्त कर बांग्लादेश लौटना चाहती हैं और अपने खिलाफ चल रहे मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगी। उनके इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने आशंका जताई कि राष्ट्रपति यदि पद पर बने रहते हैं तो किसी संवैधानिक प्रक्रिया के दौरान उनकी भूमिका विवाद का विषय बन सकती है।

बीएनपी नेताओं का कहना था कि यदि शेख हसीना की वापसी के दौरान कोई संवैधानिक या कानूनी विवाद पैदा होता, तो राष्ट्रपति की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति किसी फैसले को प्रभावित कर सकते हैं या संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।

द डेली स्टार सहित कई समाचार पत्रों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शेख हसीना की वापसी संबंधी बयानबाजी के बाद राजनीतिक हालात पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गए थे। विपक्ष का मानना था कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति का पद पर बने रहना भविष्य में नए विवादों को जन्म दे सकता है। यही कारण रहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता गया।

अब राष्ट्रपति पद खाली होने के बाद बांग्लादेश के संविधान के अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। संविधान के अनुच्छेद 54 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है तो संसद के स्पीकर कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी प्रावधान के तहत स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद अब अंतरिम रूप से राष्ट्रपति का कार्यभार संभालेंगे।

संवैधानिक नियमों के अनुसार संसद को 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव करना होगा। जो नया राष्ट्रपति चुना जाएगा, वह केवल शेष कार्यकाल पूरा करेगा। मोहम्मद शहाबुद्दीन का मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2028 तक निर्धारित था, इसलिए नए राष्ट्रपति को इसी अवधि तक पद पर रहना होगा।

दिलचस्प बात यह भी है कि स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद स्वयं हाल ही में इलाज के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक गए थे। वह 19 जुलाई को वहां पहुंचे थे और उनकी वापसी कुछ दिन बाद तय थी। लेकिन राष्ट्रपति के संभावित इस्तीफे की खबरों के बीच उन्होंने अपना विदेश दौरा समय से पहले समाप्त करने का फैसला किया और दो दिन पहले ही ढाका लौट आए।

ढाका एयरपोर्ट पहुंचने पर पत्रकारों ने जब उनसे राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि विदेश में होने की वजह से उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि देश लौटने के बाद ही उन्हें स्थिति की पूरी जानकारी मिली और अब संविधान के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एक ओर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वापसी की चर्चा तेज है, वहीं दूसरी ओर नए राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद किस व्यक्ति को देश का नया राष्ट्रपति चुनती है और बदलते राजनीतिक समीकरणों का बांग्लादेश की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।