पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा में शामिल होने के करीब चार साल बाद पार्टी के भीतर अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर खुलकर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा में रहते हुए अब तक वह ऐसा कुछ हासिल नहीं कर पाए, जिसे अपनी राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर गिना जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस में लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है और चुनावी राजनीति में बतौर उम्मीदवार उनकी सक्रियता का दौर अब लगभग समाप्त हो चुका है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह सितंबर 2022 में भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस से अलग होकर पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया था। बाद में उनकी पार्टी का भाजपा में विलय हो गया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें पंजाब की राजनीति में एक वरिष्ठ और अनुभवी चेहरे के तौर पर देखा गया था। हालांकि, करीब चार साल के राजनीतिक सफर के बाद अब उनके ताजा बयान ने भाजपा में उनकी भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
वरिष्ठ नेता होने के बावजूद सलाह नहीं ली गई
कैप्टन ने कहा कि जब कोई वरिष्ठ नेता किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो सामान्य तौर पर उससे उम्मीद होती है कि पार्टी उसके अनुभव और राजनीतिक समझ का इस्तेमाल करेगी। खासतौर पर ऐसे नेता से, जिसने लंबे समय तक राज्य की राजनीति को करीब से देखा हो और सरकार चलाने का अनुभव हासिल किया हो।
उन्होंने कहा कि पंजाब को लेकर उनके पास हर सवाल का जवाब होने का दावा नहीं है, लेकिन वह राज्य की राजनीति, सामाजिक परिस्थितियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लंबे समय से समझते आए हैं। ऐसे में उनकी भूमिका का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह पार्टी को तय करना था।
उनके बयान का संकेत इस ओर है कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें वह राजनीतिक जिम्मेदारी या प्रभाव नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में लंबा राजनीतिक अनुभव रखने वाले कैप्टन का कहना है कि चार साल के दौरान वह पार्टी के भीतर अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान नहीं दे पाए।
भाजपा में शामिल होने का फैसला कैसे हुआ था
कैप्टन अमरिंदर सिंह का भाजपा में प्रवेश पंजाब की राजनीति में बड़े बदलाव के दौर में हुआ था। 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ सीटों का समझौता भी किया। चुनाव के बाद पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय कर दिया गया।
भाजपा में उनके शामिल होने से पार्टी को पंजाब में एक ऐसे नेता का साथ मिला था, जिसका राज्य की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। कैप्टन कई बार विधायक रहे, मुख्यमंत्री पद संभाला और केंद्र में भी मंत्री रह चुके हैं। इसके बावजूद भाजपा में शामिल होने के बाद वह राज्य की सक्रिय चुनावी राजनीति में पहले जैसी प्रमुख भूमिका में दिखाई नहीं दिए।
यही वजह है कि अब उनके बयान को उनके भाजपा के साथ राजनीतिक संबंधों की मौजूदा स्थिति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
कांग्रेस में वापसी के रास्ते भी बंद बताए
भाजपा में अपनी स्थिति पर असंतोष जाहिर करने के बावजूद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस में वापसी की किसी संभावना से इनकार किया है। उन्होंने साफ कहा कि वह कांग्रेस में वापस जाने की योजना नहीं बना रहे हैं।
उनका कहना है कि जिस राजनीतिक सफर के बाद उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का फैसला लिया था, उसके बाद वापस उसी पार्टी में लौटने की स्थिति वह नहीं देखते। इस तरह उन्होंने एक तरफ भाजपा में अपेक्षित भूमिका नहीं मिलने की बात कही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस में वापसी का विकल्प भी खारिज कर दिया है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वर्तमान समय में उनके सामने कोई स्पष्ट राजनीतिक विकल्प नहीं है। अकाली दल में जाने की संभावना से भी उन्होंने इनकार किया। ऐसे में उनका राजनीतिक भविष्य फिलहाल भाजपा के साथ ही जुड़ा हुआ नजर आता है, भले ही उन्होंने पार्टी में अपनी मौजूदा भूमिका को लेकर असंतोष व्यक्त किया हो।
‘पहले खुद चीजें ठीक करनी होंगी’
अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कैप्टन ने यह भी स्वीकार किया कि वह कुछ हद तक असमंजस की स्थिति में हैं। उनका संकेत था कि आगे की दिशा तय करने से पहले उन्हें अपने स्तर पर कई चीजों को व्यवस्थित करना होगा।
उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि वह फिलहाल किसी जल्दबाजी में राजनीतिक कदम उठाने के पक्ष में नहीं हैं। लंबे समय तक सक्रिय चुनावी राजनीति में रहने के बाद अब उनकी प्राथमिकता अपनी भूमिका और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की है।
84 वर्ष की उम्र में कैप्टन ने चुनाव लड़ने को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के तौर पर चुनावी राजनीति में उनकी सक्रियता का दौर अब प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है। इसका अर्थ यह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वह खुद मैदान में उतरने की संभावना नहीं देखते।
2027 के चुनाव पर कैप्टन की नजर
हालांकि खुद चुनाव नहीं लड़ने की बात कहने के बावजूद कैप्टन अमरिंदर सिंह की नजर पंजाब की अगली चुनावी तस्वीर पर बनी हुई है। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कई अहम टिप्पणियां की हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में यह कहना आसान नहीं है कि पंजाब में कौन सी राजनीतिक पार्टी स्पष्ट बढ़त की स्थिति में है। राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी ताकतों में शामिल है। भाजपा भी पिछले कुछ वर्षों में अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं अकाली दल का भी पंजाब की राजनीति में अपना पारंपरिक आधार रहा है।
ऐसे में कैप्टन के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव का राजनीतिक मुकाबला कई कारकों पर निर्भर करेगा।
आप और कांग्रेस के मुकाबले पर भी टिप्पणी
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित मुकाबले को लेकर भी अपनी बात रखी। हालांकि उन्होंने किसी एक दल को स्पष्ट रूप से बढ़त में नहीं बताया। उनके अनुसार अभी पंजाब की राजनीतिक स्थिति ऐसी नहीं है कि चुनाव से काफी पहले किसी पार्टी को निश्चित तौर पर मजबूत स्थिति में माना जा सके।
उनकी टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच पहुंच बढ़ा रही है, कांग्रेस संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने में जुटी है और भाजपा भी राज्य में अपना आधार विस्तार करने की कोशिश कर रही है।
अकाली दल भी अपने राजनीतिक आधार को दोबारा मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है। ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधनों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं बढ़ना स्वाभाविक है।
भाजपा-अकाली दल गठबंधन की पैरवी
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में भाजपा की संभावित चुनावी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सरकार बनाने की स्थिति हासिल करना चाहती है तो उसे अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना पर विचार करना चाहिए।
भाजपा और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने मिलकर विधानसभा चुनाव भी लड़े और राज्य में गठबंधन सरकार भी चलाई। हालांकि कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच संबंधों में बड़ा बदलाव आया और अकाली दल ने भाजपा से अपना पुराना गठबंधन समाप्त कर लिया।
अब कैप्टन का यह सुझाव पंजाब में भविष्य के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं कहा कि ऐसा गठबंधन होना तय है। उन्होंने केवल इस विकल्प पर विचार करने की बात कही है।
चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन राजनीतिक राय जारी रहेगी
कैप्टन अमरिंदर सिंह के ताजा बयान से एक बात स्पष्ट है कि वह सक्रिय चुनावी राजनीति से पीछे हटने की तैयारी में हैं, लेकिन पंजाब की राजनीति पर उनकी नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री के तौर पर लंबे समय तक राज्य की सत्ता संभाल चुके कैप्टन के पास पंजाब की राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी समीकरणों का व्यापक अनुभव रहा है।
इसलिए उनके बयानों को आने वाले विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। खासकर भाजपा में अपनी भूमिका को लेकर असंतोष और अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की पैरवी ने उनके बयान को राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल कैप्टन ने कांग्रेस में लौटने की संभावना से इनकार किया है, अकाली दल में जाने से भी दूरी बनाई है और भाजपा में रहते हुए अपनी उपलब्धियों को लेकर असंतोष जाहिर किया है। ऐसे में उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका क्या होगी, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
2027 के विधानसभा चुनाव तक पंजाब की राजनीति में कई बदलाव और नए गठबंधन देखने को मिल सकते हैं। कैप्टन खुद चुनावी मैदान से दूर रहने की बात कह चुके हैं, लेकिन राज्य की राजनीतिक दिशा, भाजपा की रणनीति और संभावित गठबंधन को लेकर उनकी राय आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी रह सकती है।




