विमुक्त एवं घुमंतू समाज के हक में हरियाणा सरकार का जोर, सीएम सैनी बोले- योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाना जरूरी

विमुक्त एवं घुमंतू समाज के हक में हरियाणा सरकार का जोर, सीएम सैनी बोले- योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाना जरूरी

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि विमुक्त एवं घुमंतू समाज के अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए केवल प्रतीकात्मक आयोजन पर्याप्त नहीं हैं। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि लंबे समय से सुविधाओं से वंचित रहे इस वर्ग के प्रत्येक पात्र परिवार तक सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचे। मुख्यमंत्री ने रविवार को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर हरियाणा और पंजाब के घुमंतू एवं विमुक्त जातियों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतू समाज को सम्मानजनक जीवन, आवास, शिक्षा, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज के प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाएं, ताकि पात्र लोग योजनाओं से वंचित न रहें।

सैनी ने कहा कि विमुक्ति दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह आत्ममंथन का दिन भी है कि समाज के जिन वर्गों को लंबे समय तक भेदभाव और अभाव का सामना करना पड़ा, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विमुक्त एवं घुमंतू समाज को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

मुख्यमंत्री ने विमुक्त एवं घुमंतू समाज के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लागू कर कई घुमंतू समुदायों को जन्मजात अपराधी के रूप में चिह्नित कर दिया गया था। इस कानून के कारण इन समुदायों को लंबे समय तक सामाजिक कलंक और भेदभाव झेलना पड़ा।

उन्होंने कहा कि 31 अगस्त 1952 को इस कानून को समाप्त किए जाने के बाद इन समुदायों को उस कलंक से मुक्ति मिली। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिन का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह समाज के उन संघर्षों की याद दिलाता है, जिनसे गुजरकर विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों ने अपनी पहचान और अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी।

सैनी ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र की सुरक्षा में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के लोगों की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। इस समुदाय से जुड़े अनेक योद्धाओं और महापुरुषों ने देश के लिए संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की रक्षा में योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि इतिहास में इन योगदानों को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, लेकिन अब समाज के इन नायकों की भूमिका को सामने लाना जरूरी है। नई पीढ़ी को अपने इतिहास और विरासत से परिचित कराने से उनमें आत्मसम्मान और आगे बढ़ने की भावना मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश सरकार की ओर से विमुक्त एवं घुमंतू परिवारों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि करनाल, पलवल और रोहतक जिलों में 702 घुमंतू परिवारों को प्लाट आवंटित किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, जमीन का मालिकाना हक मिलने से इन परिवारों को स्थायी आवास और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

सैनी ने कहा कि लंबे समय तक अस्थायी जीवन जीने वाले परिवारों के लिए स्थायी आवास केवल एक मकान तक सीमित विषय नहीं है। इससे बच्चों की शिक्षा, परिवार की सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के अवसरों में भी सुधार आता है। इसलिए सरकार आवास से जुड़ी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हरियाणा में 1.60 लाख परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध करवाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र गरीब परिवार सुरक्षित आवास से वंचित न रहे।

आवास के साथ-साथ पुराने मकानों की मरम्मत के लिए भी सहायता बढ़ाई गई है। सैनी ने बताया कि डॉ. आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के तहत मकान की मरम्मत के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना के माध्यम से अब तक 85,815 परिवारों को लगभग 416 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मकान की मरम्मत का खर्च उठाना कठिन होता है और सरकार की वित्तीय मदद से उन्हें अपने घरों को सुरक्षित और रहने योग्य बनाने में सहायता मिलती है।

सैनी ने गरीब परिवारों के लिए रसोई गैस से जुड़ी सरकारी योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 500 रुपये में गैस सिलिंडर उपलब्ध करवाने की योजना से प्रदेश की 15 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी योजनाओं का सीधा असर परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है और विशेष रूप से महिलाओं को राहत मिलती है।

शिक्षा को विमुक्त एवं घुमंतू समाज के सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों से बच्चों की पढ़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के बच्चों को शिक्षित किए बिना स्थायी सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों को 12वीं कक्षा तक मुफ्त किताबें, वर्दी और स्टेशनरी उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

सैनी ने डॉ. आंबेडकर मेधावी छात्रवृत्ति योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि पात्र विद्यार्थियों को 8,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। सरकार की छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सहायता योजनाओं का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है।

मुख्यमंत्री ने समाज के अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और उनकी शिक्षा को बीच में न रुकने दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है, ताकि युवा अपनी क्षमता के अनुसार रोजगार या स्वरोजगार का रास्ता चुन सकें।

युवाओं को संबोधित करते हुए सैनी ने उन्हें हुनर सीखने और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास ऊर्जा और प्रतिभा दोनों हैं, जरूरत केवल उन्हें सही दिशा देने की है। उन्होंने युवाओं से नशे से पूरी तरह दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के साथ-साथ पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पात्र परिवारों को उनकी जानकारी और लाभ दोनों मिलें। इसलिए उन्होंने विमुक्त एवं घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाएं।

उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। ऐसे में सामाजिक प्रतिनिधि सरकार और आम परिवारों के बीच संपर्क का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों को चाहिए कि वे जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें संबंधित विभागों और योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करें।

सैनी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विमुक्त एवं घुमंतू समाज को केवल सरकारी सहायता का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। इसके लिए शिक्षा, आवास, कौशल, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सभी क्षेत्रों में समान रूप से काम करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के विकास में सरकार और समुदाय दोनों की साझी भूमिका है। सरकारी योजनाएं संसाधन उपलब्ध करा सकती हैं, लेकिन उनका प्रभाव तभी बढ़ेगा जब समाज के लोग भी जागरूकता और भागीदारी के साथ आगे आएं।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय डीएनटी कल्याण संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह देसुजोदा, हरियाणा घुमंतू जाति विकास बोर्ड के चेयरमैन सरदार जसमेर सिंह बंजारा और पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक के दौरान विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपने मुद्दों और अपेक्षाओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों को समझते हुए नीतियों और योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सैनी ने कहा कि विमुक्ति दिवस का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा, जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, अवसर और अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि सरकार उन समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिन्हें ऐतिहासिक कारणों से लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की योजनाओं और समाज की सक्रिय भागीदारी के जरिए विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और रोजगार के अवसर मिलें, यही सरकार की प्राथमिकता है।