सीएम मान के साढ़ू को ईडी का समन, पांच करोड़ की कथित रिश्वत के मामले में 9 अक्टूबर को पूछताछ

सीएम मान के साढ़ू को ईडी का समन, पांच करोड़ की कथित रिश्वत के मामले में 9 अक्टूबर को पूछताछ

पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े लोगों पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई भी सामने आई है। ईडी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के साढ़ू अमरदीप सिंह ग्रेवाल को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। उन्हें पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांगने से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में 9 अक्टूबर को दिल्ली स्थित ईडी कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।

इस मामले में मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान का नाम भी सामने आया था। हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। मामले को लेकर उन्होंने संबंधित राजनीतिक नेताओं के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी की है।

ईडी की ओर से जारी समन ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर पंजाब की राजनीति में पहले से ही हलचल है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के एक दिन बाद ईडी ने अमरदीप सिंह ग्रेवाल को पूछताछ के लिए बुलाया है।

पहले 7 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा गया था

जानकारी के अनुसार, ईडी की हाई इंटेंसिटी यूनिट ने अमरदीप सिंह ग्रेवाल को इससे पहले 7 अक्टूबर को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया था। ग्रेवाल की ओर से एजेंसी से पेशी के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था। इसके बाद अब उन्हें 9 अक्टूबर को दिल्ली स्थित ईडी कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

एजेंसी इस मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों को लेकर ग्रेवाल से पूछताछ करेगी। जांच के दौरान कथित रिश्वत की मांग, संबंधित लोगों की भूमिका और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा सकती है।

हालांकि, ईडी की जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों के संबंध में एजेंसी को क्या जानकारी मिलती है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

अमृतसर के दुष्कर्म मामले से जुड़ा विवाद

पूरी कार्रवाई की पृष्ठभूमि अमृतसर में दर्ज एक दुष्कर्म के मामले से जुड़ी बताई जा रही है। आरोप है कि इस मामले की जांच को प्रभावित करने या उसे दबाने के बदले पांच करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग अथवा पेशकश की गई थी।

इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रणजीत सिंह की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए थे। उन्होंने दावा किया था कि कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये की रकम मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान की ओर से मांगी गई थी।

हालांकि, डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सेवानिवृत्त जस्टिस रणजीत सिंह को कानूनी नोटिस भी भेजा था।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच सीबीआई को

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप हुआ। मामले से जुड़े आरोप पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष पहुंचे थे।

हाई कोर्ट ने सोमवार को ईडी से संबंधित आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। अदालत के इस आदेश के अगले ही दिन ईडी की ओर से अमरदीप सिंह ग्रेवाल को समन जारी किया गया है।

जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर अब यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ हाई कोर्ट के निर्देश के तहत मामले की जांच सीबीआई के पास पहुंची है, वहीं दूसरी ओर ईडी भी अपने स्तर पर ग्रेवाल से पूछताछ करने जा रही है।

एनएचआरसी ने भी लिया था संज्ञान

मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका भी सामने आई है। एनएचआरसी ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से इस मामले में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।

आयोग की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न संस्थागत स्तरों पर भी जांच और जवाबदेही का विषय बना।

मामले में आरोपों की प्रकृति को देखते हुए अलग-अलग स्तरों पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों और बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने विपक्षी नेताओं पर किया मानहानि का केस

विवाद के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने सितंबर में शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल, अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दायर की थी।

डॉ. गुरप्रीत कौर का आरोप था कि इन नेताओं ने उनके खिलाफ दुष्कर्म मामले के आरोपित को बचाने में मदद करने संबंधी झूठे और आपत्तिजनक आरोप लगाए। उन्होंने इन बयानों को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया।

इस मामले के सामने आने के बाद पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हुआ। विपक्षी दलों ने सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर सवाल उठाए, जबकि मुख्यमंत्री की पत्नी की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी जवाब दिया गया।

जस्टिस रणजीत सिंह से जुड़े अदालत के आदेश में भी बदलाव

मामले में सेवानिवृत्त जस्टिस रणजीत सिंह को लेकर भी अदालत की कार्यवाही सामने आई। चंडीगढ़ की अदालत ने बाद में उनके खिलाफ लगाए गए अंतरिम प्रतिबंध को हटा दिया।

यह अंतरिम प्रतिबंध उन्हें पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांग से संबंधित सामग्री प्रकाशित या साझा करने से रोकने के लिए लगाया गया था। बाद में अदालत की ओर से इस प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद मामले से जुड़े आरोपों और कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा और बढ़ गई।

जांच के दायरे में कई पहलू

ईडी की ओर से अमरदीप सिंह ग्रेवाल को पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद अब जांच के दायरे में कई पहलुओं के आने की संभावना है। एजेंसी कथित पांच करोड़ रुपये की मांग से जुड़े आरोपों की पड़ताल के साथ यह भी जानने का प्रयास कर सकती है कि इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका रही और आरोपों के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

ग्रेवाल से पूछताछ के दौरान अमृतसर के दुष्कर्म मामले, कथित रिश्वत की मांग और संबंधित लोगों के बीच संपर्क जैसे पहलुओं पर सवाल किए जा सकते हैं। हालांकि, पूछताछ के आधार पर ही किसी व्यक्ति की भूमिका या आरोपों की पुष्टि मानी जाएगी।

इस मामले में अब सीबीआई और ईडी की जांच अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ रही है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को जांच सौंपे जाने और उसके तुरंत बाद ईडी के समन ने इस पूरे प्रकरण को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

राजनीतिक विवाद के बीच बढ़ी जांच की सक्रियता

मुख्यमंत्री भगवंत मान के परिवार से जुड़े व्यक्ति को ईडी की ओर से समन जारी होने के बाद पंजाब में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस पूरे मामले में आरोप लगाने और आरोपों को खारिज करने वाले दोनों पक्ष अपनी-अपनी कानूनी स्थिति रख चुके हैं।

एक तरफ विपक्षी नेताओं की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय और सरकार से जुड़े लोगों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए मानहानि की शिकायत का सहारा लिया है।

अब 9 अक्टूबर को अमरदीप सिंह ग्रेवाल की ईडी के सामने पेशी इस मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगी। पूछताछ के दौरान एजेंसी को क्या जानकारी मिलती है और उसके आधार पर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

फिलहाल पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत की मांग से जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई की जांच और ईडी की पूछताछ के चलते इस मामले में आने वाले दिनों में और तथ्य सामने आने की संभावना है। संबंधित पक्षों के बयानों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।