सीबीआई-ईडी की कार्रवाई पर धालीवाल का भाजपा पर हमला, बोले- पंजाबियों को दबाव से नहीं झुका सकती केंद्र सरकार

सीबीआई-ईडी की कार्रवाई पर धालीवाल का भाजपा पर हमला, बोले- पंजाबियों को दबाव से नहीं झुका सकती केंद्र सरकार

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्र और चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से जुड़ी सीबीआई की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को भाजपा का राजनीतिक हथियार बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को निशाना बनाने और बदनाम करने के लिए कर रही है।

धालीवाल ने कहा कि भाजपा को पंजाब में राजनीतिक स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में राजनीतिक मुकाबला करने के बजाय केंद्र की ओर से जांच एजेंसियों की कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।

आप नेता ने दावा किया कि सीबीआई की ओर से पंजाब में कई स्थानों पर की गई कार्रवाई के बावजूद जांच अधिकारियों के हाथ कुछ खास नहीं लगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच और कार्रवाई के बाद अधिकारी खाली हाथ लौटे तो फिर इस पूरी कवायद का उद्देश्य क्या था। धालीवाल ने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर पंजाब की जनता के मन में भी सवाल उठ रहे हैं और सरकार को इन कार्रवाइयों के पीछे की मंशा स्पष्ट करनी चाहिए।

जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का लगाया आरोप

कुलदीप सिंह धालीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों की सरकारों और नेताओं पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को राजनीतिक रूप से घेरने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को लगता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है तो उसे चुनावी मैदान में जनता के बीच जाकर इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करनी चाहिए। जांच एजेंसियों के जरिए कार्रवाई कर राजनीतिक दबाव बनाने का रास्ता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

धालीवाल ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है और यही कारण है कि भाजपा को राजनीतिक स्तर पर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, राजनीतिक समर्थन हासिल करने में असफल रहने के बाद केंद्र सरकार की एजेंसियों को आगे किया जा रहा है।

नशामुक्ति यात्रा को लेकर भी भाजपा पर निशाना

धालीवाल ने पंजाब में भाजपा की ओर से निकाली गई नशामुक्ति यात्रा और उससे जुड़े कार्यक्रमों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पंजाब में अपनी राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन दिखाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री पंजाब पहुंचे तथा बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

आप नेता ने दावा किया कि इतने बड़े स्तर पर प्रचार और केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी के बावजूद भाजपा अपेक्षित जनसमर्थन जुटाने में कामयाब नहीं रही। उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया गया था, लेकिन वास्तविक स्थिति उससे काफी अलग रही।

धालीवाल ने दावा किया कि भाजपा की ओर से रैली में करीब एक लाख लोगों के पहुंचने की बात कही गई थी, जबकि उनके अनुसार कार्यक्रम में लगभग चार हजार लोग ही नजर आए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने अपनी मौजूदगी और गैरमौजूदगी के जरिए भाजपा को राजनीतिक संदेश दे दिया है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेताओं के लगातार पंजाब दौरे के बावजूद यदि पार्टी व्यापक जनसमर्थन नहीं जुटा पा रही है तो भाजपा को इस पर आत्ममंथन करना चाहिए। केवल बड़े नेताओं की रैलियां और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई किसी राज्य में राजनीतिक आधार मजबूत नहीं कर सकती।

‘पंजाबियों को दबाव से नहीं झुका सकते’

धालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब का राजनीतिक और सामाजिक इतिहास ऐसा रहा है जहां लोगों ने किसी भी तरह के दबाव या जबरदस्ती को स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग अपनी बात मजबूती से रखने के लिए जाने जाते हैं और किसी भी राजनीतिक दल को यह नहीं समझना चाहिए कि दबाव बनाकर उन्हें अपने पक्ष में किया जा सकता है। धालीवाल ने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए यदि भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि पंजाब में विपक्षी सरकार को दबाव में लाया जा सकता है तो यह उसकी गलतफहमी है।

आप नेता ने कहा कि पंजाब के लोगों को राजनीतिक रूप से प्रभावित करने के लिए विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था, नशे और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर जनता के बीच जाना होगा। उनके अनुसार, केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

‘भाजपा को जनता के बीच जवाब देना चाहिए’

धालीवाल ने कहा कि भाजपा को पंजाब में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करनी है तो उसे जनता के बीच जाकर अपने काम और नीतियों के बारे में बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल केंद्र सरकार की ताकत या जांच एजेंसियों की कार्रवाई के आधार पर पंजाब में राजनीतिक समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के कामों को जनता देख रही है। सरकार की योजनाओं और नीतियों को लेकर लोगों के बीच चर्चा है और आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता अपने अनुभव के आधार पर फैसला करेगी।

धालीवाल ने कहा कि पंजाब में राजनीतिक मुकाबला अब और तेज होने वाला है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।

नशे के मुद्दे पर भी सियासत तेज

पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस के केंद्र में है। भाजपा ने इसे राज्य सरकार को घेरने के लिए प्रमुख मुद्दा बनाया है, जबकि आम आदमी पार्टी सरकार का दावा है कि नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

धालीवाल ने भाजपा की नशामुक्ति यात्रा को राजनीतिक अभियान करार देते हुए कहा कि यदि भाजपा वास्तव में पंजाब को नशे से मुक्त करना चाहती है तो उसे राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग नशे की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं, न कि इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप।

उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल चुनावी मुद्दा नहीं होनी चाहिए। राजनीतिक दलों को मिलकर नशे के नेटवर्क, तस्करी और युवाओं को इससे दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

2027 से पहले बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। आम आदमी पार्टी जहां अपनी सरकार के कामकाज को आधार बनाकर दोबारा सत्ता में लौटने की तैयारी कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में अपना राजनीतिक आधार विस्तार देने के प्रयास में है। कांग्रेस और अन्य दल भी सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाकर अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय और अन्य स्थानों पर सीबीआई की कार्रवाई ने राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है। आम आदमी पार्टी इसे केंद्र के राजनीतिक दबाव के तौर पर पेश कर रही है, जबकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।

धालीवाल ने अपने बयान के जरिए साफ संकेत दिया कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से जोर-शोर से उठाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाबियों को किसी भी प्रकार की धौंस या दबाव से पीछे नहीं हटाया जा सकता।

उन्होंने कहा, “पंजाबी किसी की धौंस नहीं मानते और न ही किसी से डरते हैं। पंजाबियों को बांह मरोड़कर पीछे नहीं लगाया जा सकता।”

धालीवाल ने दावा किया कि केंद्र की ओर से जितना अधिक दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी, पंजाब की जनता उतनी ही मजबूती के साथ इसका राजनीतिक जवाब देगी। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला जांच एजेंसियां या राजनीतिक दल नहीं, बल्कि चुनाव के समय पंजाब की जनता करेगी।