सीबीआई पूछताछ के बाद राजबीर घुम्मण का आरोप- चुनाव करीब आते ही तेज हुई कार्रवाई, मान सरकार को बदनाम करने की कोशिश

सीबीआई पूछताछ के बाद राजबीर घुम्मण का आरोप- चुनाव करीब आते ही तेज हुई कार्रवाई, मान सरकार को बदनाम करने की कोशिश

मुख्यमंत्री के ओएसडी से साढ़े चार घंटे तक हुई पूछताछ, करीब 100 सवाल पूछे जाने का दावा; 31 अक्टूबर को फिर जांच एजेंसी के सामने होंगे पेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मण ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पूछताछ के बाद केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उनसे साढ़े चार घंटे तक पूछताछ की गई और इस दौरान करीब 100 सवाल पूछे गए। घुम्मण के मुताबिक, पूछे गए अधिकतर सवाल पहले की पूछताछ में भी सामने आ चुके थे। उन्होंने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आने के साथ जांच की गतिविधियां तेज होना राजनीतिक मंशा की ओर संकेत करता है।

पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री के ओएसडी ने कहा कि जांच एजेंसियों का गठन संविधान और कानून की रक्षा के लिए किया गया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके माध्यम से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और उनके कार्यालय की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। घुम्मण ने कहा कि ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी और वह जांच प्रक्रिया में सहयोग करते रहेंगे।

हालांकि, घुम्मण की ओर से लगाए गए राजनीतिक दबाव और बदनाम करने के आरोप उनके अपने दावे हैं। पूछताछ के दौरान सवालों की प्रकृति या जांच एजेंसी की कार्रवाई के उद्देश्य को लेकर सीबीआई का पक्ष इन बयानों में सामने नहीं आया है।

साढ़े चार घंटे की पूछताछ पर उठाए सवाल

राजबीर सिंह घुम्मण ने पूछताछ की अवधि और सवालों की प्रकृति को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि करीब साढ़े चार घंटे चली पूछताछ के दौरान लगभग 100 सवाल पूछे गए, जिनमें से अधिकतर सवाल पहले भी पूछे जा चुके थे।

उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, लेकिन यह जानना जरूरी है कि जांच एजेंसियों और अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव तो नहीं है। घुम्मण ने सवाल किया कि यदि जांच में कोई ठोस अनियमितता सामने आई थी, तो उसकी कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई और चुनावों के नजदीक आने पर जांच की गति क्यों बढ़ गई?

मुख्यमंत्री के ओएसडी ने कहा कि वह जांच प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहे हैं और अधिकारियों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसका इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल या सरकार को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए।

घुम्मण ने दोहराया कि वह जांच एजेंसी के सामने अपनी बात रखेंगे और पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह 31 अक्टूबर को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीबीआई के सामने फिर पेश होंगे।

चुनाव के समय कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दबाव का आरोप

घुम्मण ने जांच कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने से कार्रवाई की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि पंजाब में भी इसी तरह का तरीका अपनाया जा रहा है। उनके अनुसार, केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका असर राज्य की राजनीति और सरकार की छवि पर पड़ता है।

ओएसडी ने सवाल किया कि यदि किसी मामले में अनियमितता के प्रमाण मौजूद थे, तो सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग चार साल तक निष्क्रियता के बाद चुनाव नजदीक आने पर जांच की गति तेज की जा रही है।

इन आरोपों के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी जांच की टाइमिंग अपने आप में राजनीतिक हस्तक्षेप का प्रमाण नहीं होती। कार्रवाई के कारणों और जांच की दिशा का आकलन संबंधित मामले के तथ्यों तथा जांच एजेंसियों के आधिकारिक पक्ष के आधार पर ही किया जा सकता है।

सरकारी दफ्तरों में ईडी की कार्रवाई पर भी निशाना

राजबीर सिंह घुम्मण ने सरकारी कार्यालयों में प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी और फाइलें जब्त किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों को निशाना बनाकर पंजाब सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

घुम्मण के अनुसार, सरकारी दफ्तरों में जांच संबंधी कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है, खासकर तब जब इसे राजनीतिक घटनाक्रम के साथ जोड़कर देखा जा रहा हो। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का उद्देश्य सरकार की छवि को प्रभावित करना है।

हालांकि, उन्होंने अपने बयान में जिन कार्रवाइयों का उल्लेख किया, उनके संबंध में विस्तृत दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। इसलिए उनके आरोपों और जांच एजेंसियों की वास्तविक कार्रवाई के बीच अंतर को ध्यान में रखना आवश्यक है। किसी भी जांच में रिकॉर्ड जब्त करना या पूछताछ करना कानून के तहत प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है; उसकी वैधता और उद्देश्य का निर्धारण उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है।

बिक्रम सिंह मजीठिया पर भी साधा निशाना

पूछताछ के बाद बातचीत के दौरान घुम्मण ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मजीठिया बार-बार उनका नाम नशे, खनन और अन्य विवादों से जोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन इससे उनकी छवि को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

घुम्मण ने कहा कि उन्होंने मजीठिया को कथित तौर पर बेबुनियाद आरोपों से उनका नाम जोड़ने की कोशिशों को लेकर कानूनी नोटिस भेजा है। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति को बिना ठोस आधार के विवादों से जोड़ना उचित नहीं है और ऐसी स्थिति में कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।

उन्होंने नशे से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए मजीठिया पर पलटवार किया और कहा कि जनता पहले से जानती है कि इन विवादों में किन लोगों के नाम सामने आते रहे हैं। यह बयान दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा करता है।

अमेरिका में रहने को लेकर मजीठिया से जवाब मांगा

राजबीर सिंह घुम्मण ने मजीठिया को चुनौती देते हुए उनके अमेरिका में रहने से संबंधित सवालों के जवाब देने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि मजीठिया अमेरिका क्यों गए थे और वहां कहां रहे। घुम्मण ने कहा कि यदि मजीठिया इन सवालों का जवाब नहीं देते, तो वह उस घर से संबंधित जानकारी साझा करने पर विचार करेंगे, जहां उनके अनुसार मजीठिया रहते थे।

यह टिप्पणी भी दोनों नेताओं के बीच जारी राजनीतिक विवाद का हिस्सा है। घुम्मण ने अपने बयान में मजीठिया के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि वह अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

मजीठिया की ओर से इन ताजा टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है। ऐसे में अमेरिका में उनके रहने को लेकर घुम्मण की ओर से उठाए गए सवालों को उनके आरोप और राजनीतिक चुनौती के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

भगवंत मान के प्रति भरोसा जताया

मुख्यमंत्री के ओएसडी ने भगवंत सिंह मान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए उन्हें पंजाब के इतिहास के सबसे ईमानदार मुख्यमंत्रियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय की छवि खराब करने के प्रयास सफल नहीं होंगे।

घुम्मण ने दावा किया कि पंजाब सरकार के खिलाफ राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन इससे सरकार की कार्यशैली पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अपने दायित्व निभाते रहेंगे और जांच प्रक्रिया में भी सहयोग करेंगे।

उनके बयान से स्पष्ट है कि वह सीबीआई की पूछताछ को केवल एक जांच प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में चल रहे व्यापक टकराव के संदर्भ में देख रहे हैं। आम आदमी पार्टी और विपक्षी दलों के बीच केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर पहले से ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।

31 अक्टूबर को फिर सीबीआई के सामने होंगे पेश

राजबीर सिंह घुम्मण ने पुष्टि की कि वह 31 अक्टूबर को तय कार्यक्रम के अनुसार सीबीआई के सामने पेश होंगे। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी जब भी उन्हें बुलाएगी, वह सहयोग करेंगे।

उनकी अगली पेशी को देखते हुए अब यह महत्वपूर्ण होगा कि जांच प्रक्रिया में उनसे किन मुद्दों पर जानकारी मांगी जाती है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है। फिलहाल घुम्मण ने पूछताछ की अवधि, सवालों की पुनरावृत्ति और चुनाव के नजदीक कार्रवाई तेज होने को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब में केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका और राज्य सरकार के साथ उनके संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। एक ओर मुख्यमंत्री के ओएसडी ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से प्रेरित बताया है, वहीं जांच के वास्तविक आधार और उद्देश्य को समझने के लिए सीबीआई का आधिकारिक पक्ष तथा मामले से जुड़े तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।

घुम्मण ने फिलहाल जांच में सहयोग जारी रखने की बात कही है। 31 अक्टूबर को होने वाली उनकी अगली पेशी से इस मामले में आगे की पूछताछ और संभावित घटनाक्रम को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।