राज्यपाल की मंजूरी के बाद पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने जारी की अधिसूचना, पशु क्रूरता रोकने से लेकर बेसहारा पशुओं के पुनर्वास तक की जिम्मेदारी संभालेगा बोर्ड
हरियाणा सरकार ने राज्य में पशु कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी बनाने और पशुधन के संरक्षण एवं विकास संबंधी कार्यों में समन्वय बढ़ाने के लिए पशु कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन किया है। सरकार ने बोर्ड में छह गैर-सरकारी सदस्यों को नियुक्त किया है। इनमें गोसेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन श्रवण गर्ग के अलावा नरेश नैन, भानी राम मंगला, जगदीश तनेजा, राकेश मलिक और विजय सेठी शामिल हैं।
राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने बोर्ड के पुनर्गठन और छह गैर-सरकारी सदस्यों को नामित करने संबंधी अधिसूचना जारी की है। वहीं, बोर्ड में शामिल सरकारी सदस्य 18 अक्टूबर 2022 को जारी अधिसूचना के अनुसार पहले की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
सरकार के इस फैसले के तहत पशु कल्याण बोर्ड राज्य में पशुओं के संरक्षण, उनके प्रति क्रूरता की रोकथाम और पशुधन के विकास से संबंधित विभिन्न मामलों पर निगरानी रखेगा। बोर्ड की भूमिका केवल पशुओं के संरक्षण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि गोशालाओं की स्थापना, बेसहारा पशुओं के प्रबंधन, चारे की उपलब्धता और पशुधन से जुड़ी योजनाओं के समन्वय में भी महत्वपूर्ण रहेगी।
पशु संरक्षण से जुड़े कानूनों के पालन पर रहेगा जोर
पुनर्गठित बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारियों में राज्य में पशु कल्याण से संबंधित कानूनों और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना शामिल है। बोर्ड पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम अधिनियम, 1960 के प्रावधानों के अनुपालन से जुड़े मामलों पर नजर रखेगा। इसके साथ ही पंजाब गाय वध (हरियाणा संशोधन) निषेध अधिनियम, 1980, मवेशी अपराध अधिनियम, 1871 और हरियाणा में लागू पशु कल्याण से संबंधित अन्य कानूनों एवं विनियमों के कार्यान्वयन में भी इसकी भूमिका होगी।
इन कानूनों का उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा, उनके प्रति क्रूर व्यवहार की रोकथाम और संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। बोर्ड इनसे जुड़े मामलों की समीक्षा करने तथा विभिन्न विभागों और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में भूमिका निभाएगा।
राज्य में पशु कल्याण से संबंधित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभागीय स्तर पर तालमेल जरूरी है। ऐसे में बोर्ड के पुनर्गठन को पशु संरक्षण से जुड़े कार्यों की निगरानी और योजनाओं की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुधन विकास पर भी ध्यान
हरियाणा में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में बोर्ड पशुधन के संरक्षण और विकास से जुड़े मामलों पर भी नजर रखेगा। इसकी जिम्मेदारियों में मवेशियों के संरक्षण, उनके बेहतर रखरखाव और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उपायों की समीक्षा शामिल है।
बोर्ड गोशालाओं की स्थापना और उनसे जुड़े मामलों पर भी ध्यान देगा। गोशालाओं के संचालन, पशुओं की देखभाल और उनके लिए आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़े विषय पशु कल्याण के व्यापक दायरे में आते हैं। इन मामलों में विभिन्न विभागों और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना बोर्ड की जिम्मेदारियों का हिस्सा होगा।
पशुधन के विकास से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के दौरान पशुओं के रखरखाव, उनके लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता और संरक्षण संबंधी जरूरतों को भी महत्व दिया जाएगा। इसके साथ ही पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी।
चारा उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं की समीक्षा
पशुओं के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता पशुपालन व्यवस्था का अहम पहलू है। बोर्ड को फीड और चारे के उत्पादन में वृद्धि से संबंधित योजनाओं के समन्वय और समीक्षा की जिम्मेदारी भी दी गई है।
चारे की उपलब्धता का सीधा संबंध पशुओं के स्वास्थ्य, रखरखाव और दुग्ध उत्पादन से है। इसलिए चारा उत्पादन बढ़ाने के उपायों तथा पशुधन से संबंधित अन्य योजनाओं की समीक्षा के माध्यम से संबंधित विभागों के कामकाज में बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर रहेगा।
इसके अलावा शुष्क मवेशियों के बचाव और बछड़ों की देखभाल से जुड़े मामलों पर भी बोर्ड ध्यान देगा। इन गतिविधियों के तहत पशुओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय की समीक्षा की जाएगी।
बेसहारा पशुओं को पकड़ने और पुनर्वास पर रहेगी नजर
राज्य में बेसहारा पशुओं का प्रबंधन भी पशु कल्याण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। बोर्ड को ऐसे पशुओं को पकड़ने और उनके उचित पुनर्वास के संबंध में संचालित योजनाओं के समन्वय एवं समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बेसहारा पशुओं के लिए उचित व्यवस्था करना पशुओं की सुरक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर उनकी मौजूदगी से पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इस दिशा में संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों और पशु संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं के बीच तालमेल की आवश्यकता रहती है।
बोर्ड विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के माध्यम से यह देखेगा कि बेसहारा पशुओं के प्रबंधन, उनकी देखभाल और पुनर्वास से संबंधित कार्यों को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है। हालांकि, इन जिम्मेदारियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों और संस्थाओं की भूमिका भी अहम रहेगी।
सरकारी सदस्य पहले की तरह करते रहेंगे काम
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, बोर्ड में गैर-सरकारी सदस्यों की नियुक्ति के साथ सरकारी सदस्यों की व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया है। सरकारी सदस्य 18 अक्टूबर 2022 की अधिसूचना के अनुसार पहले की तरह अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
छह गैर-सरकारी सदस्यों के नामांकन के बाद बोर्ड में पशु कल्याण से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श और योजनाओं की समीक्षा के लिए पुनर्गठित व्यवस्था लागू होगी। बोर्ड की जिम्मेदारियों में कानूनों के अनुपालन से लेकर पशुधन विकास, गोशालाओं, चारे की उपलब्धता और बेसहारा पशुओं के पुनर्वास तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
हरियाणा सरकार का यह कदम राज्य में पशु कल्याण से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित करने और विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अब बोर्ड की भूमिका इन जिम्मेदारियों के तहत संबंधित कानूनों, योजनाओं और पशु संरक्षण से जुड़े कार्यों की निगरानी में रहेगी।




