हरियाणा में पानी से स्टार्टअप तक बड़े फैसले, कोचिंग संस्थानों पर भी शिकंजा; कैबिनेट ने दी कई प्रस्तावों को मंजूरी

हरियाणा में पानी से स्टार्टअप तक बड़े फैसले, कोचिंग संस्थानों पर भी शिकंजा; कैबिनेट ने दी कई प्रस्तावों को मंजूरी

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था, महिला उद्यमिता, शिक्षा, निजी कोचिंग संस्थानों के नियमन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त 2026 से बुलाने को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही विश्व बैंक के सहयोग से प्रस्तावित 5,714.80 करोड़ रुपये के ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

सरकार का दावा है कि इस बहुआयामी जल कार्यक्रम से प्रदेश में सिंचाई ढांचे को आधुनिक बनाने, पानी की बचत करने, जलभराव की समस्या से प्रभावित भूमि को सुधारने और किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन की दिशा में प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम को प्रदेश के 15 प्राथमिक सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा और इसके दायरे में करीब 48.94 लाख एकड़ क्षेत्र को शामिल करने की योजना है। इससे लगभग 45 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के तहत सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 104 नहर चैनलों का आधुनिकीकरण और नवीनीकरण किया जाएगा। इसके अलावा नई जल संरचनाएं विकसित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। सरकार के अनुसार, करीब 248 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 131 नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा।

प्रदेश में मौजूदा जलमार्गों की स्थिति सुधारने के लिए भी बड़ा प्रावधान किया गया है। लगभग 900 करोड़ रुपये खर्च कर 620 जलमार्गों में सुधार का प्रस्ताव है। इससे नहरों और जल वितरण व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ खेतों तक पानी की आपूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने नहर आधारित माइक्रो-इरिगेशन को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। करीब 600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 120 नहर आधारित माइक्रो-इरिगेशन परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। माइक्रो-इरिगेशन के माध्यम से कम पानी में सिंचाई की दक्षता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसानों को पानी के सीमित संसाधनों का अधिक बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

जल संरक्षण के साथ-साथ उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल की दिशा में भी कदम उठाया गया है। कार्यक्रम के तहत चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग करने की योजना है। इस पर करीब 282.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे जहां ताजे पानी की मांग कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं उपचारित पानी को उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता भी खुलेगा।

हरियाणा में कई इलाकों में जलभराव कृषि के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने करीब दो लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि के सुधार की योजना बनाई है। इसके लिए वर्टिकल ड्रेनेज और सब-सर्फेस ड्रेनेज तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसी भूमि को फिर से कृषि उपयोग के लिए अधिक उत्पादक बनाना है।

कृषि क्षेत्र में पानी की खपत कम करने के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस यानी डीएसआर तकनीक को भी बढ़ावा दिया जाएगा। करीब पांच लाख एकड़ क्षेत्र में डीएसआर को प्रोत्साहित करने की योजना है। इस तकनीक में धान की रोपाई के पारंपरिक तरीके की तुलना में पानी की बचत की संभावना रहती है, इसलिए सरकार इसे जल संरक्षण की रणनीति से जोड़ रही है।

इसी तरह ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत करीब 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को अधिक पानी खपत वाली फसलों के विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कैबिनेट बैठक में महिला उद्यमियों और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति-2022 में संशोधन और पूरक प्रावधानों को भी मंजूरी दी गई। सरकार का लक्ष्य महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को वित्तीय और संस्थागत सहायता देकर नए कारोबार शुरू करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।

नई व्यवस्था के तहत महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को एक वर्ष तक लीज किराये में 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा ऐसे स्टार्टअप को सात वर्ष तक नेट एसजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा। सामान्य स्टार्टअप के लिए सात साल तक एसजीएसटी प्रतिपूर्ति 50 प्रतिशत रखने का प्रावधान किया गया है।

तकनीक आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग अथवा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, पर्यावरण अनुकूल ग्रामीण उत्पाद, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य उत्पाद और स्वदेशी खाद्य उत्पादों से जुड़े महिला स्टार्टअप के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक के सूक्ष्म अनुदान की व्यवस्था की गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में राज्य के स्टार्टअप की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। सामान्य स्टार्टअप को ऐसे आयोजनों में भाग लेने के लिए सालाना पांच लाख रुपये तक और महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को सात लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकेगी।

गुणवत्ता प्रमाण-पत्र हासिल करने वाले पात्र स्टार्टअप को प्रमाणन की लागत की 50 प्रतिशत एकमुश्त प्रतिपूर्ति दी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्टार्टअप को गुणवत्ता मानकों को पूरा करने और बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

सरकारी खरीद में भी हरियाणा के पात्र स्टार्टअप को अवसर देने की व्यवस्था की गई है। विभागीय स्तर पर होने वाली वार्षिक खरीद का 10 प्रतिशत हिस्सा पात्र हरियाणा स्टार्टअप के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। इससे नए उद्यमों को सरकारी बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

कॉरपोरेट कंपनियों और स्थानीय स्टार्टअप के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए भी सरकार ने प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। हरियाणा में कार्यरत कॉरपोरेट कंपनियों को स्थानीय स्टार्टअप के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दी जा सकेगी।

निजी निवेश आकर्षित करने के लिए सीड-फंड मैचिंग व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इसके तहत प्रत्येक 25 लाख रुपये के निजी या एंजल निवेश पर सरकार की ओर से 25 लाख रुपये तक का सह-निवेश अथवा मैचिंग ग्रांट उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है। इससे शुरुआती चरण में पूंजी की जरूरत वाले स्टार्टअप को सहायता मिलने की उम्मीद है।

स्टार्टअप में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने के लिए प्रति अप्रेंटिस हर महीने 7,500 रुपये तक के वजीफे की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी। यह सुविधा एक इकाई में अधिकतम 50 अप्रेंटिस प्रति वर्ष तक सीमित रहेगी।

तकनीकी खर्चों को कम करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज पर भी राहत दी गई है। पात्र स्टार्टअप को इन खर्चों पर 75 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति मिल सकेगी। इसकी अधिकतम सीमा 2.5 लाख रुपये सालाना और अवधि पांच वर्ष तक निर्धारित की गई है।

सरकार ने चंडीगढ़ में पंजीकृत कार्यालय वाले स्टार्टअप को भी नीति के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। ऐसे स्टार्टअप को श्रेणी-2 स्टार्टअप माना जाएगा और वे हरियाणा स्टार्टअप नीति के तहत उपलब्ध लाभों के पात्र हो सकेंगे।

स्कूली स्तर पर भी उद्यमिता और नवाचार की संस्कृति विकसित करने के लिए कैबिनेट ने महत्वपूर्ण प्रावधान किया है। प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों को 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ यानी डीआईवाई किट वितरित की जाएंगी। इन किट के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोग, नवाचार और समस्या समाधान आधारित गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसके अलावा हरियाणा में विश्वस्तरीय ‘एच-हब’ इन्क्यूबेटर स्थापित करने की योजना है। इसमें स्टार्टअप, कॉरपोरेट जगत और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग विकसित करने पर जोर रहेगा। सरकार की कोशिश है कि विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को शुरुआती स्तर पर मार्गदर्शन, संसाधन और नेटवर्क उपलब्ध कराया जा सके।

कैबिनेट ने निजी कोचिंग संस्थानों को लेकर भी अहम फैसला किया है। ‘हरियाणा प्राइवेट कोचिंग संस्थान, रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन नियम, 2026’ को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत प्रदेश में संचालित सभी मौजूदा और भविष्य में खुलने वाले निजी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों को बंद करना या उनकी गतिविधियों पर अनावश्यक रोक लगाना नहीं है। मकसद यह है कि इन संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता आए और विद्यार्थियों के हित तथा सुरक्षा सुनिश्चित हो।

नए नियमों के तहत निजी कोचिंग संस्थानों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण करवाना होगा। संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। इनमें स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त बिजली व्यवस्था, फायर सेफ्टी और मेडिकल फर्स्ट-एड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

कोचिंग संस्थानों को अपने संस्थान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवानी होगी। इसमें विद्यार्थियों की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी और नियमों के अनुरूप अन्य विवरण शामिल किए जाने की व्यवस्था होगी। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को संस्थान के बारे में अधिक पारदर्शी जानकारी मिल सकेगी।

नियमों के जरिए कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान देने की तैयारी है। बड़े स्तर पर चलने वाले कोचिंग केंद्रों में एक साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहते हैं, ऐसे में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित व्यवस्था जरूरी होगी। नए नियमन के माध्यम से इन पहलुओं को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है।

कैबिनेट ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर भी बड़ा बदलाव मंजूर किया है। अब डॉक्टर अपने स्वामित्व वाले रिहायशी प्लॉट के अलावा लीज पर लिए गए रिहायशी प्लॉट पर भी नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। इससे ऐसे डॉक्टरों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं स्थापित करना आसान हो सकता है, जो अपनी जमीन के बजाय लीज की संपत्ति पर चिकित्सा केंद्र शुरू करना चाहते हैं।

यह सुविधा उन एलोपैथिक और आयुष चिकित्सकों के लिए होगी जो संबंधित मेडिकल या आयुष काउंसिल में पंजीकृत हों, वर्तमान में प्रैक्टिस कर रहे हों और स्थानीय आईएमए शाखा में पंजीकरण की निर्धारित शर्त पूरी करते हों।

रिहायशी प्लॉट पर नर्सिंग होम संचालित करने के लिए मरीजों के दाखिले और इनडोर उपचार की सुविधा से संबंधित निर्धारित कन्वर्जन शुल्क देना होगा। लीज पर लिए गए प्लॉट पर नर्सिंग होम की अनुमति लीज की अवधि तक ही प्रभावी रहेगी। यानी लीज समाप्त होने के साथ संबंधित अनुमति की वैधता भी समाप्त हो जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस नीति में बदलाव से रिहायशी क्षेत्रों के आसपास चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा। लोगों को छोटी और मध्यम स्तर की चिकित्सा जरूरतों के लिए अपने क्षेत्र में ही स्वास्थ्य सुविधा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

इन सभी फैसलों के साथ हरियाणा सरकार ने एक तरफ जल सुरक्षा और कृषि में पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है, तो दूसरी ओर महिला उद्यमिता, स्टार्टअप और युवाओं में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन का दायरा बढ़ाया है। निजी कोचिंग संस्थानों के नियमन और नर्सिंग होम से जुड़े नियमों में बदलाव के जरिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी व्यवस्था को अधिक संगठित करने का प्रयास किया गया है।

कैबिनेट बैठक में विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख तय होना भी महत्वपूर्ण निर्णय रहा। हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त 2026 से शुरू होगा। सत्र के दौरान सरकार की ओर से हाल के फैसलों, विकास योजनाओं और राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

कुल मिलाकर मंत्रिमंडल के फैसलों में जल प्रबंधन से लेकर रोजगार और उद्यमिता, शिक्षा नियमन से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के जरिए बड़े पैमाने पर सिंचाई और जल संरचनाओं को मजबूत करने की योजना है, जबकि स्टार्टअप नीति में बदलाव से खासतौर पर महिला उद्यमियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रयास किया गया है। वहीं निजी कोचिंग संस्थानों के अनिवार्य पंजीकरण और रिहायशी प्लॉटों पर नर्सिंग होम की अनुमति से जुड़े फैसलों का सीधा असर विद्यार्थियों, अभिभावकों, डॉक्टरों और आम नागरिकों पर पड़ सकता है।