पूर्व सीएम बोले- दो साल की सेवा वाले अनुबंधित कर्मियों के लिए मॉडल अपनाए भाजपा सरकार, सफाई कर्मियों समेत सभी विभागों के कर्मचारियों को मिले नियमितीकरण का लाभ
हरियाणा में आंदोलनरत सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि सरकार वास्तव में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहती है तो उसे हिमाचल प्रदेश की नियमितीकरण नीति का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में दो साल की लगातार सेवा पूरी करने वाले अनुबंधित कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रावधान मौजूद है और हरियाणा सरकार को भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करनी चाहिए।
हुड्डा ने केवल सफाई कर्मचारियों तक अपनी मांग सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से अनुबंध, डेली वेजिज या अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य पर भी सरकार को स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। उनके मुताबिक जो कर्मचारी वर्षों से सरकारी विभागों के कामकाज का हिस्सा बने हुए हैं, उन्हें अस्थायी व्यवस्था में रखने के बजाय नीति बनाकर नियमित सेवा का अवसर दिया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मचारियों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और सरकार को बातचीत के जरिए इसका समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना है कि नियमितीकरण की मांग को टालने के बजाय सरकार को दूसरे राज्यों में लागू नीतियों का अध्ययन कर व्यवहारिक रास्ता निकालना चाहिए।
विधानसभा में सरकार के बयान का दिया हवाला
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा में सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर हुई चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था। उनके मुताबिक, सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने सदन में कहा था कि देश में ऐसी कोई नीति नहीं है जिसके तहत दो साल की सेवा पूरी करने वाले कच्चे कर्मचारियों को नियमित किया जा सके।
हुड्डा के अनुसार मंत्री ने यह भी कहा था कि यदि ऐसी कोई नीति सामने लाई जाती है तो सरकार आंदोलनरत सफाई कर्मचारियों को नियमित करने पर विचार करने के लिए तैयार है। अब हुड्डा ने हिमाचल प्रदेश में लागू नियमितीकरण संबंधी प्रावधानों को सरकार के सामने उदाहरण के तौर पर रखा है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि दूसरे राज्य में अनुबंधित कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि के आधार पर नियमितीकरण की व्यवस्था बनाई जा सकती है तो हरियाणा में इस दिशा में पहल क्यों नहीं की जा सकती। उन्होंने भाजपा सरकार से सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का समाधान निकालने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य अस्थायी कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
कांग्रेस के कार्यकाल की नीति का भी किया जिक्र
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय हरियाणा में तीन साल से लगातार सेवा दे रहे कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए नीति बनाई गई थी। उन्होंने भाजपा सरकार से कहा कि यदि वह कांग्रेस सरकार की पुरानी नीति को लागू नहीं करना चाहती तो कम से कम दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन कर सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक हिमाचल प्रदेश की नीति को आधार बनाकर हरियाणा में भी लंबे समय से सेवाएं दे रहे अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का समाधान होगा, बल्कि अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को भी भविष्य को लेकर स्पष्टता मिल सकती है।
हुड्डा का तर्क है कि सरकारी विभागों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों ने व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनकी सेवा शर्तों और रोजगार की सुरक्षा पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हिमाचल में अनुबंधित कर्मचारियों के लिए दो साल की सेवा का प्रावधान
हुड्डा ने अपने दावे के समर्थन में हिमाचल प्रदेश की नियमितीकरण नीति के प्रावधानों का उल्लेख किया। उनके अनुसार हिमाचल सरकार की अनुबंधित कर्मचारियों के नियमितीकरण संबंधी व्यवस्था में दो साल की लगातार सेवा को महत्वपूर्ण पात्रता अवधि माना गया है।
एक अप्रैल 2026 को जारी कार्मिक विभाग के निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिन अनुबंधित कर्मचारियों ने 31 मार्च 2026 तक दो वर्ष की लगातार सेवा पूरी कर ली है, उन्हें नीति के तहत नियमितीकरण के लिए विचार में लिया जा सकता है।
इसी तरह जिन कर्मचारियों की दो वर्ष की सेवा 30 सितंबर 2026 तक पूरी होगी, उनके मामलों को भी 30 सितंबर के बाद नियमितीकरण की प्रक्रिया में लिया जाना है। इसके अलावा दो अप्रैल 2026 के निर्देशों में उन अनुबंधित कर्मचारियों के लिए भी पात्रता स्पष्ट की गई है, जिन्होंने 30 सितंबर 2024 या 30 सितंबर 2025 तक दो साल की लगातार सेवा पूरी कर ली थी।
हालांकि, नियमितीकरण के लिए केवल सेवा अवधि पूरी करना ही पर्याप्त नहीं है। संबंधित नीति में निर्धारित अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना जरूरी है और विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निर्णय होता है।
डेली वेज कर्मचारियों की स्थिति अलग
हुड्डा के बयान के साथ सामने आए नीति संबंधी विवरण में यह अंतर भी महत्वपूर्ण है कि सभी ‘कच्चे कर्मचारियों’ के लिए एक समान नियम नहीं हैं। अनुबंधित कर्मचारियों और दैनिक वेतन अथवा कंटीजेंट कर्मचारियों के नियमितीकरण की शर्तें अलग-अलग हैं।
यदि कर्मचारी डेली वेज या कंटीजेंट पेड श्रेणी में आता है तो हिमाचल प्रदेश की 2026-27 की नीति में उसके लिए चार वर्ष की लगातार सेवा का प्रावधान बताया गया है। सामान्य क्षेत्रों में इसके साथ प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में न्यूनतम 240 दिन काम करने की शर्त भी जुड़ी है।
इसके अलावा ऐसे कर्मचारियों का नियमितीकरण उपलब्ध स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध किया जाना है। इसलिए डेली वेज या कंटीजेंट कर्मचारियों के मामले में दो साल की सेवा वाला नियम लागू नहीं होता।
यानी अनुबंधित और दैनिक वेतन कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण की व्यवस्था को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। अनुबंधित कर्मचारियों के लिए जहां दो वर्ष की लगातार सेवा महत्वपूर्ण पात्रता अवधि है, वहीं डेली वेज अथवा कंटीजेंट कर्मचारियों के लिए चार वर्ष की सेवा और निर्धारित कार्यदिवस जैसी शर्तें लागू हैं।
नियमितीकरण अपने आप नहीं होगा
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने मात्र से किसी कर्मचारी का नियमितीकरण स्वतः नहीं हो जाता। संबंधित कर्मचारी को नीति में दी गई अन्य सभी पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं।
इसके बाद विभागीय स्तर पर दस्तावेजों और सेवा रिकॉर्ड की जांच समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाती है। साथ ही उपलब्ध नियमित रिक्त पद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी कर्मचारी द्वारा आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर लेने का अर्थ यह नहीं है कि उसे तत्काल नियमित कर्मचारी का दर्जा मिल जाएगा।
हुड्डा की मांग राजनीतिक रूप से व्यापक है, लेकिन हिमाचल की नीति का उदाहरण देते समय इन शर्तों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। अनुबंधित कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित आदेश हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों से जुड़े 2024 के प्रावधानों के अधीन हैं।
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन पर टिकी नजर
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। कर्मचारी नियमितीकरण समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार की ओर से रिस्क अलाउंस जैसे फैसले भी लिए गए हैं, लेकिन नियमितीकरण की मांग अभी भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
ऐसे में हुड्डा द्वारा हिमाचल प्रदेश की नीति का उदाहरण दिए जाने से इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। विपक्ष जहां इसे कर्मचारियों के हितों से जोड़ रहा है, वहीं सरकार के सामने यह चुनौती होगी कि वह नियमितीकरण से जुड़े नियमों, वित्तीय प्रभाव और उपलब्ध पदों को ध्यान में रखते हुए अपना रुख स्पष्ट करे।
सभी अस्थायी कर्मचारियों के लिए नीति की मांग
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार को केवल आंदोलन कर रहे सफाई कर्मचारियों के मामले तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रदेश के अलग-अलग विभागों में अनुबंध या दैनिक वेतन के आधार पर वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए भी एक व्यापक नीति बनाई जानी चाहिए।
उनका कहना है कि लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था में काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार को सेवा अवधि, पद की आवश्यकता और विभागीय रिक्तियों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर नियमितीकरण की स्पष्ट व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार से मांग की कि वह हिमाचल प्रदेश की नीति का अध्ययन करे और यदि संभव हो तो हरियाणा की परिस्थितियों के अनुरूप ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिससे पात्र कर्मचारियों को नियमित सेवा का रास्ता मिल सके।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
हुड्डा के बयान के बाद सरकार के सामने इस मुद्दे पर दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है। एक ओर आंदोलनरत सफाई कर्मचारियों की मांगों का समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी नीति स्पष्ट करनी होगी।
नियमितीकरण के फैसले में सेवा अवधि के साथ-साथ पदों की उपलब्धता, भर्ती नियम, वित्तीय भार और विभागीय आवश्यकताओं जैसे कई पहलू जुड़े होते हैं। ऐसे में सरकार के लिए किसी भी नीति को लागू करने से पहले इन सभी पहलुओं का आकलन करना जरूरी होगा।
फिलहाल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हिमाचल प्रदेश की व्यवस्था को आधार बनाते हुए हरियाणा सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि यदि दो साल की लगातार सेवा वाले अनुबंधित कर्मचारियों के लिए दूसरे राज्य में नियमितीकरण का रास्ता मौजूद है तो हरियाणा सरकार को भी इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों सहित सभी पात्र अस्थायी कर्मचारियों के लिए ऐसी नीति बनाने की मांग की है, जिससे वर्षों से सरकारी सेवाओं में योगदान दे रहे कर्मचारियों को स्थायी रोजगार की दिशा में स्पष्ट अवसर मिल सके।




