हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अचानक नई दिल्ली रवाना होने के बाद राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब सरकार के मंत्रिमंडल में एक पद लंबे समय से खाली है और विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी अभी तक भरा नहीं जा सका है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार और संगठन दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री गुरुवार दोपहर बाद नई दिल्ली के लिए रवाना हुए। उनके कार्यक्रम के अनुसार वे अगले कुछ दिनों तक शिमला में उपलब्ध नहीं रहेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी आम लोगों को सूचित किया गया है कि इस अवधि के दौरान वे मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए सचिवालय न पहुंचें। सीएमओ की इस सूचना के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मुख्यमंत्री का दौरा सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू शुक्रवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकें करेंगे। इन बैठकों में प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली, आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय तथा विधानसभा के मानसून सत्र से पहले किए जाने वाले संभावित बदलावों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का भी आकलन करेगा और आने वाले समय की रणनीति तय करेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। हिमाचल मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद लंबे समय से रिक्त है। इस पद को भरने की मांग कांग्रेस के कई नेता और विधायक लगातार उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि हाईकमान के साथ विचार-विमर्श के बाद इस पद पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि सहमति बनती है तो जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा भी संभव है।
केवल नए मंत्री को शामिल करने का मुद्दा ही चर्चा में नहीं है, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से विभागों का पुनर्वितरण किया जा सकता है। पिछले कुछ समय से विभिन्न विभागों के प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक स्तर पर समीक्षा की चर्चा होती रही है। ऐसे में हाईकमान के साथ होने वाली बैठक इन विषयों पर निर्णायक साबित हो सकती है।
इसके अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी लंबे समय से रिक्त है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा है और सरकार पर संवैधानिक पदों को समय पर नहीं भरने का आरोप लगाता रहा है। अब संभावना जताई जा रही है कि मानसून सत्र से पहले इस पद पर भी किसी वरिष्ठ विधायक के नाम पर सहमति बनाई जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो सरकार विधानसभा की कार्यवाही से पहले संगठनात्मक और संवैधानिक दोनों मोर्चों पर अपनी तैयारियां पूरी कर लेगी।
मंत्रिमंडल में संभावित नए चेहरे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा कुल्लू सदर से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की हो रही है। पार्टी और सरकार के भीतर उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके कार्यों की सराहना कर चुके हैं और संकेत दे चुके हैं कि उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के साथ ही सुंदर सिंह ठाकुर के नाम की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक किसी भी नाम पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान और मुख्यमंत्री के बीच विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। इसलिए जब तक औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक किसी भी नाम को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो इसमें केवल क्षेत्रीय संतुलन ही नहीं, बल्कि जातीय और राजनीतिक समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि प्रदेश के सभी प्रमुख क्षेत्रों को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले संगठन और सरकार दोनों मजबूत स्थिति में दिखाई दें।
इस बीच मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को लेकर विपक्ष भी नजर बनाए हुए है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार मंत्रिमंडल विस्तार करती है तो उसे जनता से जुड़े मुद्दों पर भी समान गंभीरता दिखानी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर आवश्यक निर्णय समय-समय पर लेती रही है और यह दौरा भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
दिल्ली में बैठकों का दौर पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सीधे हिमाचल लौटने का नहीं है। जानकारी के अनुसार वे राष्ट्रीय राजधानी से सीधे चंबा जाएंगे, जहां अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऐतिहासिक मिंजर मेले के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। मिंजर मेला हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रमुख आयोजन माना जाता है और इसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से भी पर्यटक पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री मेले के उद्घाटन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य सरकारी आयोजनों में शामिल हो सकते हैं।
चंबा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री स्थानीय विकास परियोजनाओं की समीक्षा भी कर सकते हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की विकास योजनाओं और लंबित परियोजनाओं पर चर्चा होने की भी संभावना जताई जा रही है। इसके बाद मुख्यमंत्री दो या तीन अगस्त को शिमला लौट सकते हैं और नियमित सरकारी कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
फिलहाल पूरे हिमाचल की राजनीतिक निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी हुई हैं। यह दौरा केवल एक सामान्य राजनीतिक मुलाकात नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे सरकार के भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि हाईकमान की बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों के पुनर्वितरण और विधानसभा उपाध्यक्ष के नाम पर सहमति बन जाती है, तो आने वाले दिनों में हिमाचल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि फैसला कुछ समय के लिए टलता है, तो राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे ने प्रदेश की सियासत को नई चर्चा दे दी है और कांग्रेस के भीतर होने वाले संभावित बदलावों को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।



