हिमाचल सरकार ने आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव, अब वित्त विभाग की मंजूरी के बाद ही होगी नई नियुक्ति

हिमाचल सरकार ने आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था में किया बड़ा बदलाव, अब वित्त विभाग की मंजूरी के बाद ही होगी नई नियुक्ति

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर नई नीति लागू करते हुए प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी विभाग को वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना नए आउटसोर्स कर्मचारी रखने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही वर्ष 2022 में जारी पुराने दिशा-निर्देशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।

सरकार का कहना है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था केवल सीमित परिस्थितियों में प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने का माध्यम है। इसे नियमित सरकारी भर्ती का विकल्प या स्थायी रोजगार का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसी उद्देश्य से सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थाओं के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

वित्त विभाग की अनुमति होगी अनिवार्य

नई अधिसूचना के अनुसार अब कोई भी सरकारी विभाग, कार्यालय, बोर्ड या सार्वजनिक उपक्रम अपनी ओर से नए आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त नहीं कर सकेगा। किसी भी प्रकार की नई आउटसोर्स सेवा लेने से पहले संबंधित विभाग को वित्त विभाग से लिखित स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।

सरकार ने साफ किया है कि यदि किसी विभाग ने बिना पूर्व अनुमति के आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त किए या सेवाएं लीं, तो ऐसी नियुक्तियां अनधिकृत मानी जाएंगी। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

केवल अस्थायी जरूरतों के लिए होगी आउटसोर्सिंग

नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आउटसोर्सिंग का उपयोग केवल उन्हीं परिस्थितियों में किया जाएगा, जहां अस्थायी कार्य, सीमित अवधि की परियोजनाएं, मौसमी आवश्यकताएं या विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत हो।

सरकार ने दोहराया है कि नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए स्थायी नियुक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन पदों पर नियमित भर्ती संभव है, वहां लंबे समय तक आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति को समाप्त किया जाएगा।

कई विभागों में मिली अनियमितताएं

सरकार के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जहां विभागों ने स्वीकृत पदों की संख्या से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात कर रखा है। कुछ स्थानों पर ऐसे कार्यों के लिए भी आउटसोर्स कर्मचारी लगाए गए हैं, जिनके लिए नियमित कर्मचारी पहले से उपलब्ध हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने सभी विभागों को अपने यहां कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। जहां आवश्यकता से अधिक कर्मचारी तैनात हैं या व्यवस्था नियमों के अनुरूप नहीं है, वहां कर्मचारियों की संख्या का पुनर्गठन और युक्तिकरण किया जाएगा।

नियमित भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

राज्य सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को स्थायी प्रकृति के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का मानना है कि लंबे समय तक आउटसोर्सिंग पर निर्भर रहने से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। इसलिए जिन पदों पर नियमित नियुक्तियां की जा सकती हैं, वहां भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के प्रयास किए जाएंगे।

स्थायी रोजगार का विकल्प नहीं

नई नीति में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कार्यों में अस्थायी सहयोग उपलब्ध कराना है। इसे सरकारी सेवा में प्रवेश का स्थायी माध्यम या नियमित नियुक्ति का विकल्प नहीं माना जाएगा।

सरकार का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं आवश्यकता आधारित होंगी और संबंधित कार्य की अवधि तथा विभागीय जरूरतों के अनुसार ही उनका उपयोग किया जाएगा।

हाईकोर्ट के आदेश का भी रखा गया ध्यान

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह फैसला उच्च न्यायालय के निर्देशों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

इसका अर्थ यह है कि फिलहाल जो कर्मचारी विभिन्न विभागों में आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं, उनकी सेवाएं यथावत जारी रहेंगी। हालांकि भविष्य में उनकी नियुक्तियों और सेवाओं से जुड़े मामलों में नई नीति के प्रावधान लागू होंगे।

सभी विभागों को दिए गए सख्त निर्देश

वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों और अधीनस्थ कार्यालयों को भेज दी गई है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी न हो।

सरकार ने यह भी कहा है कि विभाग समय-समय पर अपनी मानव संसाधन आवश्यकता का मूल्यांकन करें और केवल वास्तविक जरूरत होने पर ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत आउटसोर्स सेवाओं का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजें।

पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर जोर

नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी विभागों में मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरकार चाहती है कि आउटसोर्स नियुक्तियों में एकरूपता बनी रहे और अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचा जा सके।

वित्त विभाग की पूर्व मंजूरी की व्यवस्था लागू होने से प्रत्येक प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति वास्तव में आवश्यक है और उसका कोई उपयुक्त नियमित विकल्प उपलब्ध नहीं है।

नई नीति के जरिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था अब केवल आवश्यकता आधारित और सीमित दायरे में ही संचालित होगी। नियमित पदों पर स्थायी भर्ती को प्राथमिकता देते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति पर सख्त निगरानी रखी जाएगी, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और वित्तीय रूप से अनुशासित बन सके।