हिमाचल में फर्जी खबरों पर लगाम की तैयारी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बन सकते हैं नए नियम

हिमाचल में फर्जी खबरों पर लगाम की तैयारी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बन सकते हैं नए नियम

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही भ्रामक सूचनाओं, अपुष्ट खबरों और तथ्यहीन दावों को लेकर अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। इंटरनेट आधारित समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के बीच सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे फर्जी खबरों के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके और जिम्मेदार डिजिटल पत्रकारिता को बढ़ावा मिले।

इसी उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की पहली बैठक 30 जून को आयोजित होगी। इस बैठक में राज्य में संचालित विभिन्न वेब पोर्टल, फेसबुक आधारित समाचार प्लेटफॉर्म, यूट्यूब चैनल तथा अन्य डिजिटल माध्यमों के संचालन से जुड़े संभावित नियमों और निगरानी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया सूचना का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है, लेकिन इसके साथ ही अपुष्ट और भ्रामक सामग्री के प्रसार की घटनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सामने आए हैं, जो बिना किसी औपचारिक पंजीकरण, संपादकीय व्यवस्था या पत्रकारिता के स्थापित मानकों का पालन किए बिना समाचार प्रसारित कर रहे हैं। ऐसे मामलों में कई बार अधूरी या गलत जानकारी लोगों तक पहुंचने से भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।

सरकारी स्तर पर माना जा रहा है कि वर्तमान व्यवस्था में डिजिटल समाचार माध्यमों की स्पष्ट पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी कारण उपसमिति इस दिशा में ऐसे सुझाव तैयार करेगी, जिनके आधार पर भविष्य में नई नीति बनाई जा सके।

बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर विचार होने की संभावना है, उनमें सोशल मीडिया आधारित समाचार प्लेटफॉर्म्स की पहचान, संचालन संबंधी मानदंड, सूचना के सत्यापन की व्यवस्था और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शामिल है। सरकार इस बात पर भी मंथन करेगी कि डिजिटल माध्यमों के लिए किस प्रकार का नियामक तंत्र विकसित किया जाए, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में संचालित सभी समाचार वेब पोर्टलों और फेसबुक आधारित न्यूज चैनलों के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) के साथ पंजीकरण की व्यवस्था लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है। यदि ऐसा प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण कराना होगा, जिससे उनकी पहचान और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल अथवा साइबर विंग गठित करने का प्रस्ताव भी चर्चा का विषय रहेगा। यह इकाई विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रही सामग्री पर नजर रखेगी और यदि किसी पोस्ट या वीडियो में भ्रामक अथवा तथ्यहीन जानकारी पाई जाती है तो उसे तत्काल संबंधित एजेंसियों के संज्ञान में लाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकेगी।

सरकार का मानना है कि पिछले कुछ समय में कई घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट जानकारियों ने प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा कीं। विशेष रूप से पिछले वर्ष मानसून आपदा के दौरान कई पुराने वीडियो और तस्वीरों को नए घटनाक्रम बताकर साझा किया गया। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने पुल टूटने, सड़कें बंद होने और अन्य आपदा संबंधी पुराने वीडियो इस तरह प्रसारित किए कि लोगों में भ्रम और भय का माहौल बन गया। इसका असर पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों पर भी पड़ा और प्रशासन को बार-बार वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

इसी तरह सरकारी नौकरियों, भर्ती प्रक्रियाओं, पेंशन योजनाओं और बजट संबंधी घोषणाओं को लेकर भी कई बार सोशल मीडिया पर अपुष्ट सूचनाएं वायरल हुईं। कई अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स ने आधी-अधूरी जानकारी या बिना आधिकारिक पुष्टि के खबरें प्रकाशित कीं, जिससे युवाओं, कर्मचारियों और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। सरकार का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करती हैं बल्कि लोगों का भरोसा भी कमजोर करती हैं।

इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अब डिजिटल माध्यमों के लिए अधिक स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की दिशा में प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। सरकार चाहती है कि समाचार प्रकाशित करने वाले सभी प्लेटफॉर्म्स न्यूनतम पेशेवर मानकों का पालन करें और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही जानकारी सार्वजनिक करें। साथ ही यदि कोई जानबूझकर गलत सूचना फैलाता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए भी स्पष्ट प्रक्रिया तय की जा सके।

हालांकि प्रस्तावित व्यवस्था का अंतिम स्वरूप उपसमिति की सिफारिशों और उसके बाद सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सुझाव लिए जाएंगे और मौजूदा कानूनी प्रावधानों का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद तैयार की गई सिफारिशों के आधार पर आगे की नीति निर्धारित की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में किसी भी नियामक व्यवस्था का उद्देश्य गलत और भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाना होना चाहिए, जबकि जिम्मेदार पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी समान रूप से संरक्षित रखा जाना आवश्यक है।

अब सबकी नजर 30 जून को होने वाली मंत्रिमंडलीय उपसमिति की पहली बैठक पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में लिए गए प्रारंभिक निर्णय हिमाचल प्रदेश में डिजिटल समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के संचालन से जुड़े भविष्य के नियमों की दिशा तय कर सकते हैं। यदि प्रस्तावों को सरकार की मंजूरी मिलती है तो राज्य में ऑनलाइन समाचार प्लेटफॉर्म्स के लिए पंजीकरण, निगरानी और जवाबदेही से संबंधित नई व्यवस्था लागू किए जाने का रास्ता खुल सकता है।