एचआरटीसी की नई रणनीति: समतल और बेहतर सड़कों पर ही चलेंगी नई इलेक्ट्रिक बसें, ऊना-हमीरपुर को मिला सबसे बड़ा बेड़ा

एचआरटीसी की नई रणनीति: समतल और बेहतर सड़कों पर ही चलेंगी नई इलेक्ट्रिक बसें, ऊना-हमीरपुर को मिला सबसे बड़ा बेड़ा

हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की रणनीति में बदलाव किया है। निगम ने फैसला लिया है कि नई ई-बसों को फिलहाल उन मार्गों पर नहीं चलाया जाएगा, जहां सड़कें अत्यधिक खराब या दुर्गम हैं। इसके बजाय इन बसों का संचालन बेहतर सड़क संपर्क वाले मैदानी इलाकों और शहरों के आसपास के रूटों पर किया जाएगा, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध परिवहन सुविधा मिल सके।

निगम अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसें आधुनिक तकनीक से लैस हैं और इनके बेहतर संचालन के लिए सड़क की गुणवत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में कई ऐसे मार्ग हैं जहां सड़कें संकरी, उबड़-खाबड़ या क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे रूटों पर लगातार संचालन से बसों के प्रदर्शन, रखरखाव और बैटरी क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी कारण निगम ने शुरुआती चरण में अच्छी स्थिति वाली सड़कों पर इन बसों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया जारी

एचआरटीसी ने अपने बेड़े के आधुनिकीकरण के तहत कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का ऑर्डर दिया है। इनमें से 150 बसें कंपनी द्वारा निगम को सौंप दी गई हैं। इन बसों को प्रदेश के विभिन्न डिपो में चरणबद्ध तरीके से भेजा जा रहा है। शेष बसों की आपूर्ति भी आगामी समय में पूरी होने की उम्मीद है।

निगम के अनुसार, बसों को नियमित सेवा में शामिल करने से पहले प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (पीडीआई), तकनीकी परीक्षण और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सभी मानकों पर संतोषजनक पाए जाने के बाद इन्हें निर्धारित रूटों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री दिखाएंगे हरी झंडी

नई इलेक्ट्रिक बसों के औपचारिक संचालन की शुरुआत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाथों कराए जाने की तैयारी है। इसके लिए एचआरटीसी प्रबंधन ने मुख्यमंत्री कार्यालय से समय का अनुरोध किया है। कार्यक्रम की तिथि तय होने के बाद मुख्यमंत्री इन बसों को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न रूटों के लिए रवाना करेंगे।

निगम का मानना है कि यह पहल प्रदेश में स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण कम होगा, ईंधन पर होने वाला खर्च घटेगा और यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिवहन सेवा मिलेगी।

मैदानी क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस

अब तक एचआरटीसी की इलेक्ट्रिक बसें मुख्य रूप से शिमला, मनाली, मंडी और धर्मशाला जैसे बड़े शहरों में संचालित हो रही थीं। नई योजना के तहत पहली बार मैदानी जिलों और अपेक्षाकृत बेहतर सड़क नेटवर्क वाले क्षेत्रों में इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। निगम का उद्देश्य अधिक से अधिक यात्रियों को इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ उपलब्ध कराना है।

अधिकारियों का कहना है कि जहां सड़कों की स्थिति बेहतर होगी, वहां इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से भी लाभदायक रहेगा। इससे बसों की बैटरी दक्षता, रखरखाव और परिचालन लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ऊना और हमीरपुर को सबसे अधिक बसें

एचआरटीसी द्वारा जारी आवंटन सूची के अनुसार नई इलेक्ट्रिक बसों का सबसे बड़ा हिस्सा ऊना और हमीरपुर डिपो को दिया गया है। दोनों डिपो को 35-35 बसें आवंटित की गई हैं, जिससे इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का विस्तार तेजी से होगा।

इसके अलावा बिलासपुर डिपो को 20 बसें दी गई हैं। नालागढ़ और नाहन डिपो को 15-15 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। देहरा और पालमपुर डिपो को 10-10 बसें मिली हैं, जबकि धर्मशाला और तारादेवी (शिमला) डिपो को पांच-पांच बसें दी गई हैं। शेष बसों का आवंटन अन्य डिपो की आवश्यकता और संचालन योजना के अनुसार एक या दो बसों के रूप में किया जाएगा।

ट्रायल के दौरान सामने आई तकनीकी चुनौतियां

नई बसों के संचालन से पहले एचआरटीसी ने विभिन्न क्षेत्रों के 36 रूटों पर परीक्षण किया था। इस दौरान अधिकांश मार्गों पर बसों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा, लेकिन एक रूट पर परीक्षण सफल नहीं हो सका। संबंधित कंपनी का कहना है कि बस में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि सड़क की खराब स्थिति के कारण संचालन प्रभावित हुआ।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एचआरटीसी ने विस्तृत जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। समिति में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियरों को भी शामिल किया गया है। समिति संबंधित मार्ग का निरीक्षण कर यह आकलन करेगी कि समस्या सड़क की स्थिति के कारण उत्पन्न हुई या किसी अन्य तकनीकी कारण से। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद निगम आगे की रणनीति तय करेगा।

बेहतर परिवहन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

एचआरटीसी का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। डीजल आधारित बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल हैं और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक हैं। इसके अलावा इनका संचालन अपेक्षाकृत शांत, आरामदायक और ऊर्जा दक्ष माना जाता है।

निगम का उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों का दायरा बढ़ाना है, ताकि भविष्य में अधिक से अधिक रूटों पर पर्यावरण अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि इसके लिए सड़कों की गुणवत्ता में सुधार भी आवश्यक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जहां आवश्यक होगा, वहां संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

फिलहाल निगम नई ई-बसों के सफल संचालन की तैयारियों में जुटा है और तकनीकी परीक्षण पूरा होते ही इन्हें निर्धारित मार्गों पर यात्रियों की सेवा के लिए उतार दिया जाएगा। इससे प्रदेश के कई जिलों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।