आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने जसवंत सिंह खालड़ा अपहरण एवं हत्या मामले के दोषी पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह की कथित समय से पहले रिहाई को लेकर चल रही चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान या पंजाब सरकार का इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं है और सोशल मीडिया तथा कुछ मीडिया संस्थानों में प्रसारित की जा रही खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की छवि खराब करने और जनता को भ्रमित करने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से झूठा प्रचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाले दावे को बताया पूरी तरह गलत
बलतेज पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आरोपी जसपाल सिंह की माफी या समय से पहले रिहाई से संबंधित किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार के स्तर पर ऐसी कोई फाइल न तो चली है और न ही किसी प्रकार की प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई गई है।
उनके अनुसार कुछ राजनीतिक दल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यह प्रचार कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद मामला राज्यपाल के पास लंबित है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार के पास ऐसी कोई फाइल आई ही नहीं, तो मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर का दावा कैसे किया जा सकता है। इसलिए इस तरह की खबरों को तथ्यात्मक नहीं माना जा सकता।
केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला
पन्नू ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी। चूंकि यह सीबीआई जांच वाला मामला है, इसलिए दोषी की समय से पहले रिहाई या दया याचिका पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के पास है।
उन्होंने बताया कि नए कानूनी प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में राज्य सरकार निर्णय लेने वाली प्राधिकरण नहीं होती। इसलिए पंजाब सरकार को इस विषय में जिम्मेदार ठहराना तथ्यों के विपरीत है।
रिहाई के लिए पहले भी हो चुके हैं आवेदन
प्रेस वार्ता के दौरान बलतेज पन्नू ने घटनाक्रम का क्रमवार उल्लेख करते हुए बताया कि आरोपी जसपाल सिंह ने वर्ष 2017 में समय से पहले रिहाई के लिए आवेदन किया था।
उन्होंने कहा कि उस समय केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस आवेदन पर विचार किया था और वर्ष 2018 में तत्कालीन राज्यपाल स्तर पर भी इसे मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद 2019 और फिर 2023 में भी यह मामला केंद्र सरकार के स्तर पर ही विचाराधीन रहा।
पन्नू का कहना था कि इस पूरे घटनाक्रम में पंजाब सरकार की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं रही।
विपक्ष पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल जानबूझकर राज्य सरकार को विवाद में घसीटने का प्रयास कर रहे हैं।
बलतेज पन्नू ने विशेष रूप से शिरोमणि अकाली दल (बादल) पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी राजनीतिक जमीन कमजोर होने के बाद अब वह झूठे आरोपों के सहारे जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से बिना तथ्य जांचे दावे किए जा रहे हैं, जिनका वास्तविक रिकॉर्ड से कोई संबंध नहीं है।
अकाली दल के पुराने रुख पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल की पूर्व सरकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने बीबी परमजीत कौर खालड़ा के हालिया सार्वजनिक बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि जसवंत सिंह खालड़ा मामले में न्याय दिलाने के जो वादे किए गए थे, वे सत्ता में आने के बाद पूरे नहीं किए गए।
पन्नू ने आरोप लगाया कि उस समय दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के बजाय कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। उन्होंने कहा कि आज जो दल न्याय की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने कार्यकाल का जवाब देना चाहिए।
फिल्म ‘सतलुज’ विवाद का भी किया उल्लेख
आम आदमी पार्टी ने प्रेस वार्ता के दौरान हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई फिल्म ‘सतलुज’ का मुद्दा भी उठाया।
बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया कि फिल्म को कुछ ही समय बाद प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक दल नहीं चाहते कि अतीत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विषय पर भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल का रवैया कई प्रश्न पैदा करता है। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई अतिरिक्त दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
मीडिया से तथ्य जांचने की अपील
प्रेस वार्ता के दौरान बलतेज पन्नू ने कुछ मीडिया संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि बिना आधिकारिक पुष्टि के संवेदनशील मामलों में खबरें प्रकाशित करने से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। मीडिया संस्थानों को किसी भी जानकारी को प्रकाशित करने से पहले संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग से ही जनता तक सही जानकारी पहुंच सकती है।
अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग
आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार से अपील की कि जानबूझकर झूठी जानकारी फैलाने और भ्रामक खबरें प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
बलतेज पन्नू ने कहा कि गलत सूचनाएं केवल राजनीतिक विवाद ही पैदा नहीं करतीं, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास का वातावरण भी बनाती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद
जसवंत सिंह खालड़ा मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से पंजाब की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां राज्य सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं आम आदमी पार्टी लगातार यह कह रही है कि मामले में निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और पंजाब सरकार को विवाद में घसीटना राजनीतिक दुष्प्रचार का हिस्सा है।
अब इस मुद्दे पर आगे क्या कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आते हैं, इस पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।




