पंजाब में नशा तस्करों पर शिकंजा, 500 दिन में 73 हजार गिरफ्तार; स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने गिनाईं उपलब्धियां

पंजाब में नशा तस्करों पर शिकंजा, 500 दिन में 73 हजार गिरफ्तार; स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने गिनाईं उपलब्धियां

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अपने प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ के 500 दिन पूरे होने पर इसे राज्य में नशे के खिलाफ सबसे व्यापक और बहुआयामी अभियान बताते हुए दावा किया है कि सख्त कानूनी कार्रवाई, आधुनिक उपचार व्यवस्था, पुनर्वास और जनभागीदारी के जरिए नशे के नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में एक मार्च 2025 को शुरू किया गया यह अभियान अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देना है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की सोच के अनुरूप इस अभियान की शुरुआत की थी। सरकार ने शुरुआत से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल तस्करों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज और पुनर्वास उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी रणनीति ‘प्रोटेक्ट, हील एंड प्रिवेंट’ यानी सुरक्षा, उपचार और रोकथाम के सिद्धांत पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि पिछले 500 दिनों में पंजाब पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, जेल विभाग, खेल विभाग और सामाजिक सुरक्षा विभाग ने मिलकर समन्वित तरीके से काम किया है। इसी का परिणाम है कि अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 52,432 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 73,300 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 621 ऐसे बड़े तस्कर भी शामिल हैं, जो संगठित स्तर पर नशे का कारोबार चला रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि आम लोगों का बढ़ता विश्वास है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शुरू की गई ‘सेफ पंजाब हेल्पलाइन’ (97791-00200) पर पिछले 500 दिनों में 46,342 सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर 22,960 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों की सक्रिय भागीदारी यह साबित करती है कि अब समाज भी नशे के खिलाफ खुलकर सामने आ रहा है और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है।

डॉ. बलबीर सिंह ने पिछली सरकारों की तुलना करते हुए कहा कि अकाली दल सरकार के दस वर्षों में 2,817 किलोग्राम और कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों में 2,412 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। इस प्रकार 15 वर्षों में कुल 5,229 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई, जबकि भगवंत मान सरकार ने केवल चार वर्षों में 6,608 किलोग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह अंतर सरकार की स्पष्ट नीति और लगातार चल रही कार्रवाई का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने केवल गिरफ्तारियां ही नहीं कीं, बल्कि नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। अब तक 847 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। उनके अनुसार, अपराधियों की आर्थिक ताकत को खत्म करना भी सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है ताकि वे दोबारा इस कारोबार को खड़ा न कर सकें।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के मामलों में पंजाब ने 89 प्रतिशत दोषसिद्धि दर हासिल की है, जो देश में सबसे अधिक मानी जाने वाली दोषसिद्धि दरों में शामिल है। उन्होंने इसे पुलिस जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन का परिणाम बताया।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार ने नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज और पुनर्वास को भी समान प्राथमिकता दी है। वर्तमान में पंजाब में 213 सरकारी एवं निजी नशा मुक्ति केंद्र, 90 पुनर्वास केंद्र और 547 आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। सभी सरकारी केंद्रों में उपचार पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ओओएटी कार्यक्रम के तहत अब तक 10 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि अभियान शुरू होने के बाद 38 हजार से अधिक मरीजों को सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कर उपचार दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए के तहत 10,917 लोगों को कानूनी कार्रवाई से राहत देकर उन्हें उपचार का अवसर प्रदान किया है, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। जेलों में भी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य की सभी 19 जेलों में ओओएटी सुविधा शुरू की गई है, जबकि 10 केंद्रीय जेलों में विशेष नशा मुक्ति एवं वेलबीइंग क्लीनिक स्थापित किए गए हैं।

डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि सरकार ने ‘सूरमा–एंबेसडर ऑफ रिकवरी’ कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत नशे की लत से पूरी तरह बाहर आ चुके लोग अब अन्य मरीजों को प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ के माध्यम से युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य और नशा रोकथाम के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्कूलों में शिक्षकों को मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे विद्यार्थियों में नशे के शुरुआती संकेत पहचान सकें और समय रहते उचित सहायता उपलब्ध करा सकें। स्कूलों में माइंडफुलनेस सत्र और जागरूकता कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों की क्षमता 1,500 बिस्तरों से बढ़ाकर 5,000 बिस्तर कर दी है। मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में काउंसलर तथा क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नियुक्त किए गए हैं। इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले मरीजों के लिए छह सरकारी अस्पतालों में लिक्विड मेथाडोन थेरेपी शुरू की गई है और मरीजों को दोबारा नशे की ओर लौटने से रोकने के लिए सामुदायिक फॉलो-अप कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

मंत्री ने बताया कि राज्यभर में 12 हजार से अधिक ग्राम रक्षा समितियां, जिनमें 1.25 लाख से अधिक सदस्य शामिल हैं, नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और तस्करों की सूचना देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ‘पिंडां दा हाल एक्शन प्लान’ और राज्यव्यापी ई-रिक्शा जागरूकता अभियान के जरिए भी लोगों को इस मुहिम से जोड़ा गया है।

सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और एंटी-ड्रोन प्रणाली को और मजबूत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब पाकिस्तान से सटी सीमा होने के कारण लगातार नशा तस्करों के निशाने पर रहता है। राज्य सरकार ने अपने स्तर पर आधुनिक तकनीक और कानून व्यवस्था को मजबूत किया है, लेकिन सीमा सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और पंजाब के बाहर से संचालित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की आवश्यकता जताई।

प्रेस वार्ता के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल पुलिस या सरकार अकेले नहीं जीत सकती। इसके लिए समाज, परिवार, शिक्षण संस्थानों और प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि भगवंत मान सरकार कानून प्रवर्तन, उपचार, पुनर्वास और जनजागरूकता को समान महत्व देते हुए पंजाब को पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए इसी तरह निरंतर प्रयास करती रहेगी।