कनाडा में पंजाबी छात्रों के वर्क परमिट संकट पर भड़के लालचंद कटारुचक, केंद्र से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग

कनाडा में पंजाबी छात्रों के वर्क परमिट संकट पर भड़के लालचंद कटारुचक, केंद्र से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग

पंजाब के कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारुचक ने कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट को लेकर मुश्किलों का सामना कर रहे भारतीय छात्रों, विशेषकर पंजाब के युवाओं के मामले में केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ाई के लिए लाखों रुपये खर्च करने और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद यदि भारतीय छात्रों को अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। मंत्री ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय से अपील की कि वह कनाडा सरकार के साथ उच्च स्तर पर बातचीत शुरू करे और प्रभावित छात्रों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

लालचंद कटारुचक ने कहा कि कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से जाते हैं। इनमें पंजाब के युवाओं की संख्या भी काफी अधिक है। छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां के नियमों के तहत पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के माध्यम से रोजगार हासिल करने और अपने करियर को आगे बढ़ाने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में नियमों में बदलाव के कारण यदि उनके वर्क परमिट का रास्ता अचानक बंद हो जाता है, तो उनके सामने आर्थिक, कानूनी और मानसिक परेशानियों का बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।

मंत्री के अनुसार ब्रैम्पटन स्थित पोर्टेज कॉलेज में वर्ष 2024 में दाखिला लेने वाले कई भारतीय छात्रों ने अपनी दो वर्षीय पोस्ट-ग्रेजुएशन पढ़ाई पूरी कर ली है। इन छात्रों ने अपनी शिक्षा पर भारी रकम खर्च की और पढ़ाई के दौरान कनाडा के निर्धारित नियमों का पालन किया। अब पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट की उम्मीद थी, ताकि वे रोजगार प्राप्त कर सकें और अपने भविष्य को सुरक्षित बना सकें। लेकिन कथित तौर पर नियमों में हुए बदलावों के कारण इन छात्रों के सामने वर्क परमिट का संकट पैदा हो गया है।

कटारुचक ने आरोप लगाया कि छात्रों ने जब कनाडा में शिक्षा के लिए प्रवेश लिया था, तब जिन नियमों और व्यवस्थाओं के आधार पर उन्होंने अपना भविष्य तय किया, उनमें बाद में बदलाव होने से उन्हें गंभीर नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी तरफ से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की। उन्होंने फीस जमा की, निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा किया और संबंधित प्रक्रियाओं का पालन किया। इसके बावजूद आज उन्हें अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या पंजाब के युवाओं की है। पंजाब के अनेक परिवारों ने अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खर्च की है। कई परिवारों ने शिक्षा का खर्च उठाने के लिए जमीन, संपत्ति या अन्य संसाधनों का सहारा लिया। ऐसे में यदि पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों को रोजगार और वर्क परमिट का अवसर नहीं मिलता, तो इसका सीधा असर उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि कई भारतीय छात्र अपनी मांगों को लेकर कनाडा में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हैं। भारी बारिश के बीच छात्रों के सड़कों पर टेंट लगाकर प्रदर्शन करने की स्थिति बेहद पीड़ादायक है। कटारुचक ने कहा कि जिन युवाओं के हाथों में किताबें और डिग्रियां होनी चाहिए थीं, वे आज अपने अधिकारों के लिए खुले में संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।

मंत्री ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों और छात्रों की समस्याओं को लेकर भारत सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कुछ छात्रों के वर्क परमिट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों परिवारों की उम्मीदें और युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है। इसलिए केंद्र सरकार को इसे प्राथमिकता के आधार पर कनाडा सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।

कटारुचक ने विदेश मंत्रालय से विशेष तौर पर मांग की कि भारत और कनाडा के बीच उपलब्ध राजनयिक माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए प्रभावित छात्रों की समस्या का समाधान खोजा जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को कनाडा के संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन छात्रों ने पहले से लागू नियमों के आधार पर अपनी पढ़ाई शुरू की थी, उनके भविष्य को बाद में किए गए बदलावों से प्रभावित न होने दिया जाए।

उन्होंने कहा कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। पंजाब सरकार इस मुद्दे को अपने स्तर पर उठा सकती है और छात्रों की सहायता के लिए आवाज बुलंद कर सकती है, लेकिन कनाडा सरकार के साथ औपचारिक एवं प्रभावी कूटनीतिक बातचीत केंद्र के स्तर पर ही संभव है। इसलिए इस मामले में केंद्र सरकार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब के पठानकोट, गुरदासपुर और अन्य जिलों के कई परिवारों की भावनाएं इस समय अपने बच्चों के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विदेश भेजा था। उन्हें उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके बच्चे अपने पैरों पर खड़े होंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे। लेकिन मौजूदा संकट ने इन परिवारों को चिंता और असमंजस में डाल दिया है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस विषय को गंभीरता से देख रही है और अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार की कोशिश है कि प्रभावित छात्रों की आवाज संबंधित स्तर तक पहुंचाई जाए और उन्हें आवश्यक सहायता मिल सके। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में अंतिम और प्रभावी समाधान के लिए भारत सरकार को कनाडा के साथ बातचीत करनी होगी।

कटारुचक ने केंद्र से अपील करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विदेश में पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र अपने परिवार की उम्मीदों, मेहनत और निवेश का प्रतिनिधित्व करता है। जब ऐसे छात्र किसी नीति परिवर्तन के कारण अचानक अनिश्चितता में फंस जाते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके हितों की रक्षा के लिए उचित मंच पर आवाज उठाए।

उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से कनाडा जाने वाले छात्रों और प्रवासी भारतीयों के साथ गहरे सामाजिक एवं पारिवारिक संबंधों के लिए जाना जाता है। राज्य के हजारों परिवारों के रिश्तेदार कनाडा में रहते हैं और बड़ी संख्या में पंजाबी युवा वहां शिक्षा और रोजगार के लिए जाते हैं। इसलिए कनाडा की इमिग्रेशन और वर्क परमिट नीतियों में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव पंजाब के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर सीधा असर डालता है।

मंत्री ने कहा कि विदेश जाकर शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं ने अपने करियर को बेहतर बनाने के लिए बड़ा आर्थिक और व्यक्तिगत जोखिम उठाया है। कई छात्र पढ़ाई के साथ-साथ काम करके अपने खर्चों को पूरा करते हैं। ऐसे में पढ़ाई पूरी होने के बाद यदि उन्हें कानूनी रूप से काम करने का अवसर नहीं मिलता, तो उनकी स्थिति और कठिन हो जाती है। उन्होंने कहा कि सरकारों को ऐसी नीतियां बनाते समय उन छात्रों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए, जो पहले से ही निर्धारित नियमों के तहत अपनी पढ़ाई शुरू कर चुके हैं।

कटारुचक ने कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे को दलगत राजनीति से अलग रखते हुए मानवीय और कूटनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए। प्रभावित छात्रों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि भारत सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी समस्या को उचित स्तर पर उठाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि छात्रों को समय रहते राहत नहीं मिलती, तो उनके सामने कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। वर्क परमिट न मिलने की स्थिति में रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं और उन्हें अपने भविष्य की योजनाओं पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। कई छात्रों के सामने कनाडा में रहने की वैधता से जुड़ी चिंताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में समस्या का समाधान जितनी जल्दी निकले, उतना ही बेहतर होगा।

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को कनाडा प्रशासन के समक्ष यह मामला मजबूती से उठाते हुए प्रभावित भारतीय छात्रों के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन छात्रों ने पहले से उपलब्ध नियमों और अनुमतियों के आधार पर अपने पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था, उनके मामलों पर मानवीय एवं संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत विचार किया जाए।

लालचंद कटारुचक ने दोहराया कि पंजाब सरकार प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं करेगी। राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए हरसंभव सहयोग और सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि लेकिन इस संकट का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब केंद्र सरकार सक्रिय होकर कनाडा के साथ प्रभावी बातचीत करे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान ले और विदेश मंत्रालय को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ रहे भारतीय युवाओं का भविष्य देश के लिए महत्वपूर्ण है और किसी भी परिस्थिति में उन्हें अकेला महसूस नहीं होना चाहिए।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब के युवाओं ने हमेशा अपनी मेहनत, प्रतिभा और काबिलियत के दम पर दुनिया में पहचान बनाई है। ऐसे युवाओं को यदि शिक्षा पूरी करने के बाद केवल प्रशासनिक या नीतिगत बदलावों के कारण अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, तो सरकारों को संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और कनाडा के बीच बातचीत के माध्यम से इस मामले का जल्द समाधान निकलेगा और प्रभावित छात्रों को अपने करियर को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने अंत में कहा कि आज जरूरत राजनीतिक बयानबाजी की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की है। भारतीय छात्रों ने अपने भविष्य के लिए विदेश में जाकर शिक्षा हासिल की है और अब वे अपने अधिकार तथा करियर की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार को उनकी आवाज को गंभीरता से सुनते हुए कनाडा सरकार के साथ तत्काल बातचीत करनी चाहिए, ताकि छात्रों को राहत मिल सके और उनके परिवारों की चिंता दूर हो।