चंडीगढ़। हरियाणा रोडवेज में यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद खान-पान की सुविधा देने के लिए परिवहन विभाग अब रेलवे की तर्ज पर एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। बस अड्डों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और कीमतों को लेकर लगातार उठने वाली शिकायतों के बीच परिवहन मंत्री अनिल विज ने रोडवेज के लिए अलग कैटरिंग कॉर्पोरेशन गठित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित कॉर्पोरेशन का उद्देश्य यात्रियों को साफ-सुथरा, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित दरों पर भोजन उपलब्ध कराना होगा।
परिवहन विभाग की योजना केवल बस अड्डों तक सीमित नहीं रहने वाली है। नई व्यवस्था के तहत यात्रियों को डिजिटल सुविधा भी देने की तैयारी है। प्रस्तावित मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए यात्री बस की लाइव लोकेशन देखने के साथ सफर के दौरान भोजन भी बुक कर सकेंगे। यात्री जिस बस में सफर कर रहा होगा, उसके अगले निर्धारित बस अड्डे पर उसके लिए खाना तैयार रखा जा सकेगा। इससे यात्रियों को बस से उतरकर खाने की तलाश करने या लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत कम होगी।
इस पूरी योजना को लेकर परिवहन मंत्री अनिल विज ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को रोडवेज के लिए स्वतंत्र कैटरिंग कॉर्पोरेशन का विस्तृत प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे सरकार के समक्ष रखा जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद गठन और संचालन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
अनिल विज का कहना है कि हरियाणा रोडवेज से रोजाना बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। इनमें नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी, व्यापारी, महिलाएं, बुजुर्ग और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री शामिल हैं। कई यात्रियों को सफर के दौरान बस अड्डों पर भोजन और पेय पदार्थ खरीदने पड़ते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उन्हें जो भोजन मिले, वह स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित हो और उसके लिए मनमाने दाम न वसूले जाएं।
परिवहन मंत्री लंबे समय से बस अड्डों पर मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। उनके निर्देश पर कई स्थानों पर निरीक्षण और जांच की कार्रवाई भी की गई है। घटिया या संदिग्ध खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित खान-पान उपलब्ध कराना है। अब विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने के लिए पूरी कैटरिंग व्यवस्था को एक संगठित मॉडल में बदलने की तैयारी कर रहा है।
प्रस्तावित मॉडल को रेलवे की खान-पान व्यवस्था की तर्ज पर विकसित करने का विचार है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में कैटरिंग सेवाओं को एक संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित किया जाता है। इसी तरह हरियाणा रोडवेज में भी खान-पान से संबंधित सेवाओं को अलग-अलग ठेकेदारों पर निर्भर रखने के बजाय एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत लाने की योजना है।
सरकार का मानना है कि यदि कैटरिंग सेवा के लिए स्पष्ट मानक तय किए जाएं तो खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी रखी जा सकती है। भोजन तैयार करने से लेकर उसकी पैकिंग, भंडारण और यात्रियों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया के लिए मानक निर्धारित किए जा सकते हैं। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की कीमतें भी तय की जा सकती हैं, जिससे यात्रियों से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतों पर रोक लगाई जा सके।
नई व्यवस्था में स्वच्छता को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। कैटरिंग से जुड़े कर्मचारियों के लिए साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा और भोजन संभालने के नियमों का पालन अनिवार्य किया जा सकता है। बस अड्डों पर खाना तैयार करने और बेचने वाले स्थानों की नियमित जांच भी व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है। विभाग का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसमें यात्री भोजन की गुणवत्ता और कीमत दोनों को लेकर आश्वस्त रह सकें।
परिवहन विभाग की योजना में तकनीक का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। प्रस्तावित मोबाइल ऐप के जरिए यात्रियों को बस से संबंधित कई सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की तैयारी है। ऐप पर बस की लाइव लोकेशन देखने के अलावा यात्री भोजन की उपलब्धता और उसे ऑर्डर करने की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई यात्री लंबी दूरी की बस में सफर कर रहा है और उसे अगले बस अड्डे पर खाना चाहिए तो वह ऐप के माध्यम से पहले ही ऑर्डर कर सकेगा। संबंधित कैटरिंग सेंटर को यात्री की बस और उसके संभावित पहुंचने के समय की जानकारी मिल जाएगी। इसके बाद भोजन तैयार करके निर्धारित स्थान पर उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और खान-पान की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
डिजिटल व्यवस्था के जरिए भुगतान को भी आसान बनाने की संभावना है। ऑनलाइन ऑर्डर और डिजिटल भुगतान के कारण नकद लेनदेन कम होगा और प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। विभाग भविष्य में इस प्लेटफॉर्म पर अन्य यात्री सुविधाओं को भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार कर सकता है।
नई कैटरिंग व्यवस्था को एक साथ पूरे प्रदेश में लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की तैयारी है। पहले चरण में पांच प्रमुख बस अड्डों को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इनमें अंबाला कैंट, करनाल, पानीपत, सोनीपत और हिसार शामिल हैं। इन बस अड्डों पर नई कैटरिंग व्यवस्था, खाद्य गुणवत्ता नियंत्रण और डिजिटल ऑर्डर सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान यह देखा जाएगा कि यात्रियों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है, भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने में कितनी सफलता मिलती है, ऑर्डर की डिलीवरी कितनी प्रभावी रहती है और निर्धारित दरों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जा सकता है। यदि शुरुआती चरण के परिणाम संतोषजनक रहते हैं तो इस मॉडल को प्रदेश के अन्य प्रमुख बस अड्डों तक विस्तार देने की योजना बनाई जाएगी।
इस योजना को लेकर पहले भी प्रयास किया जा चुका है। बस अड्डों पर बेहतर खान-पान और आधुनिक फूड कोर्ट विकसित करने के लिए हरियाणा पर्यटन विभाग की मदद लेने का प्रस्ताव बनाया गया था। विचार था कि पर्यटन विभाग अपने अनुभव और विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए बस अड्डों पर आधुनिक कैफेटेरिया और फूड स्टॉल विकसित करे। हालांकि यह योजना अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।
बताया गया कि तकनीकी और विभागीय स्तर पर सहमति से जुड़े कारणों के चलते पर्यटन विभाग के माध्यम से प्रस्तावित मॉडल को लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद योजना को समाप्त करने के बजाय परिवहन विभाग ने इसे अपने स्तर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है। अब रोडवेज के लिए अलग कॉर्पोरेशन बनाने का प्रस्ताव इसी दिशा में नया कदम माना जा रहा है।
परिवहन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना होगी जो गुणवत्ता और कीमत दोनों के स्तर पर प्रभावी साबित हो। सरकारी व्यवस्था के तहत भोजन उपलब्ध कराने के बावजूद यदि गुणवत्ता की निगरानी कमजोर रहती है तो उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए कैटरिंग कॉर्पोरेशन के गठन के साथ खाद्य सुरक्षा, निरीक्षण, शिकायत निवारण और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था बनाना भी जरूरी होगा।
यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए भी डिजिटल माध्यम विकसित किया जा सकता है। यदि किसी यात्री को भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, कीमत या सेवा को लेकर समस्या होती है तो वह ऐप के जरिए शिकायत दर्ज करा सकेगा। इससे शिकायतों का रिकॉर्ड भी तैयार होगा और विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर किस तरह की समस्या बार-बार सामने आ रही है।
अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि रोडवेज बस अड्डों पर खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेताओं को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा। मिलावटी सामान, खराब भोजन या निर्धारित दरों से अधिक वसूली की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
नई व्यवस्था का एक और संभावित लाभ यह होगा कि बस अड्डों पर खान-पान के कारोबार को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा। वर्तमान में अलग-अलग दुकानों और स्टॉलों पर अलग-अलग तरीके से भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध होते हैं। यदि कैटरिंग कॉर्पोरेशन एक समान मानक लागू करता है तो भोजन की गुणवत्ता, कीमत और स्वच्छता में समानता लाने में मदद मिल सकती है।
हरियाणा रोडवेज की लंबी दूरी की बस सेवाओं में इस व्यवस्था का महत्व और बढ़ सकता है। लंबी यात्रा करने वाले यात्रियों को कई घंटे बस में बिताने पड़ते हैं और रास्ते में भोजन की आवश्यकता होती है। ऐसे यात्रियों के लिए यदि पहले से भरोसेमंद भोजन बुक करने की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सकती है।
इसके अलावा परिवार के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी यह सुविधा उपयोगी हो सकती है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्वच्छ भोजन की उपलब्धता यात्रा के दौरान विशेष महत्व रखती है। विभाग का उद्देश्य इसी तरह की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रोडवेज को केवल परिवहन सेवा नहीं बल्कि बेहतर यात्री अनुभव देने वाली व्यवस्था बनाना है।
प्रस्तावित कैटरिंग कॉर्पोरेशन के जरिए भविष्य में स्थानीय और क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों को भी शामिल किए जाने की संभावना हो सकती है। हालांकि इसके लिए गुणवत्ता, पोषण, स्वच्छता और कीमत से संबंधित स्पष्ट मानक तय करने होंगे। सरकार की कोशिश होगी कि यात्रियों को विकल्प उपलब्ध हों, लेकिन हर विकल्प निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
परिवहन विभाग का यह कदम रोडवेज की यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। बसों की लाइव ट्रैकिंग और ऑनलाइन भोजन बुकिंग जैसी सुविधाओं को एक ही ऐप से जोड़ने पर यात्रियों को सफर की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। इससे रोडवेज की सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण प्रस्तावित कॉर्पोरेशन के गठन का है। अधिकारियों को इसका विस्तृत प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसमें संगठन की संरचना, संचालन व्यवस्था, वित्तीय मॉडल, खाद्य गुणवत्ता के मानक, स्टाफिंग, डिजिटल सिस्टम और बस अड्डों पर कैटरिंग संचालन की पूरी रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके बाद सरकार के स्तर पर प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा।
यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है और सरकार की मंजूरी के बाद योजना प्रदेशभर में लागू होती है तो हरियाणा रोडवेज के यात्रियों के लिए खान-पान की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बस अड्डे पर मनमाने दाम या गुणवत्ता को लेकर शिकायतों के बजाय यात्रियों को निर्धारित कीमत पर मानकीकृत भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
कुल मिलाकर, हरियाणा परिवहन विभाग अब बस यात्रा को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की सुविधा के बजाय यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक अनुभव बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रेलवे की तर्ज पर प्रस्तावित कैटरिंग कॉर्पोरेशन और मोबाइल ऐप के जरिए भोजन ऑर्डर करने की सुविधा इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं। शुरुआत पांच बड़े बस अड्डों से होने की तैयारी है और प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जा सकता है। इससे रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को स्वच्छ भोजन, तय कीमत और डिजिटल सुविधा एक ही व्यवस्था के तहत मिलने की उम्मीद है।




