पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी की सियासत एक बार फिर दिल्ली तक पहुंच गई है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने बुधवार को संसद भवन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, पार्टी संगठन की स्थिति और कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर विस्तार से बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इस मुलाकात को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन से जुड़े मुद्दों को लेकर कई वरिष्ठ नेता अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रताप सिंह बाजवा ने राहुल गांधी के सामने पंजाब कांग्रेस के कई विधायकों की चिंताओं को रखा। उन्होंने पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों और संगठनात्मक स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी भी दी। बताया जा रहा है कि बाजवा ने राहुल गांधी से पंजाब कांग्रेस के विधायकों के साथ अलग से बैठक करने के लिए समय भी मांगा है। यदि हाईकमान की ओर से इस बैठक के लिए समय दिया जाता है तो आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के विधायकों के साथ सीधी बातचीत के जरिए पार्टी की अंदरूनी स्थिति को समझने की कोशिश की जा सकती है।
बाजवा की राहुल गांधी से मुलाकात से पहले और बाद में दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई है। बुधवार को ही बाजवा ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की। इसी दौरान पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की भी वेणुगोपाल के साथ बैठक हुई। इन बैठकों को पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव, नेतृत्व से जुड़े मतभेदों और आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं की बैठक हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह, सांसद डॉ. धर्मबीर गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद शेर सिंह घुबाया शामिल हुए। बैठक में पंजाब की राजनीतिक स्थिति और कांग्रेस के भीतर चल रहे घटनाक्रम पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि बैठक में लिए गए निर्णयों को लेकर नेताओं की ओर से सार्वजनिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
पंजाब कांग्रेस में चल रही खींचतान का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदेश संगठन और नेतृत्व को लेकर माना जा रहा है। पार्टी के भीतर एक वर्ग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने के फैसले से असहमत बताया जा रहा है। यह गुट लगातार हाईकमान के सामने संगठन में बदलाव की मांग उठाता रहा है। दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक प्रदेश संगठन को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में दिल्ली में पंजाब के नेताओं की लगातार हो रही बैठकों ने संगठनात्मक बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल के हालिया पंजाब दौरे के बाद पार्टी के भीतर मतभेद और अधिक स्पष्ट होकर सामने आए थे। बघेल ने अपने करीब 10 दिन के पंजाब दौरे के दौरान कई जिलों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर संगठन की जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश की थी। इस दौरान उन्हें कई जगहों पर पार्टी के अंदर विरोध का सामना भी करना पड़ा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बघेल के दौरे के दौरान करीब 18 जिलों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की ओर से उनके और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के खिलाफ नारेबाजी तथा विरोध प्रदर्शन किया गया था।
इन घटनाओं ने हाईकमान की चिंता बढ़ाई है, क्योंकि पार्टी पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के सामने एक तरफ आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्षी अभियान तैयार करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ उसे अपने ही संगठन के भीतर चल रही खींचतान को नियंत्रित करना है। यदि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद चुनावी तैयारियों के दौरान भी जारी रहते हैं तो इसका असर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि भूपेश बघेल ने पंजाब में अपने दौरे के दौरान पार्टी नेताओं से मिले फीडबैक के आधार पर हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में संगठन की मौजूदा स्थिति, नेताओं के बीच तालमेल और पार्टी की चुनावी तैयारियों से जुड़े मुद्दों का आकलन शामिल बताया जा रहा है। अब दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक में इस रिपोर्ट पर भी चर्चा हो सकती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस को लेकर अगले सप्ताह दिल्ली में हाईकमान की एक अहम बैठक आयोजित की जा सकती है। इस बैठक में प्रदेश संगठन की स्थिति के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष के भविष्य, संगठन में संभावित फेरबदल, वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय और चुनावी तैयारियों को लेकर पार्टी नेतृत्व कोई दिशा तय कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राहुल गांधी की टीम द्वारा पंजाब को लेकर किए गए सर्वे की भी चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि इस सर्वे में पंजाब के राजनीतिक हालात के साथ-साथ कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की स्थिति को लेकर भी फीडबैक जुटाया गया है। इसमें भूपेश बघेल के दौरे के दौरान सामने आए घटनाक्रम, राजा वड़िंग की संगठन में स्थिति और चरणजीत सिंह चन्नी के राजनीतिक प्रभाव को लेकर जानकारी शामिल होने की बात कही जा रही है।
पंजाब कांग्रेस के भीतर एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी के अलग-अलग गुट अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। चरणजीत सिंह चन्नी समर्थक नेताओं की सक्रियता और संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने पार्टी हाईकमान के सामने चुनौती बढ़ा दी है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के समर्थक संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में हाईकमान के सामने संतुलन कायम करना आसान नहीं होगा।
प्रताप सिंह बाजवा की राहुल गांधी से हुई मुलाकात को इसी व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। बाजवा लंबे समय से पंजाब कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सरकार के खिलाफ लगातार मोर्चा संभालते रहे हैं। ऐसे में विधायकों की चिंताओं को सीधे राहुल गांधी के सामने रखना पार्टी के भीतर चल रही असंतुष्टि को हाईकमान तक पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में यदि राहुल गांधी पंजाब कांग्रेस के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक करते हैं तो पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अलग-अलग गुटों को साथ लेकर संगठन को चुनावी मोड में कैसे लाया जाए। पंजाब में कांग्रेस को सत्ता की लड़ाई में प्रभावी दावेदार बनने के लिए केवल सरकार विरोधी माहौल पर निर्भर रहने के बजाय मजबूत संगठन, स्पष्ट नेतृत्व और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी।
इसी बीच यह भी चर्चा है कि राहुल गांधी इसी महीने पंजाब का दौरा कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इसे राज्य में कांग्रेस के आगामी चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। राहुल गांधी के दौरे के दौरान पार्टी संगठन, नेताओं की भूमिका और चुनावी तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को संदेश दिए जाने की संभावना है।
फिलहाल पंजाब कांग्रेस में दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। वरिष्ठ नेताओं की हाईकमान के साथ बैठकों का सिलसिला, विधायकों की चिंताओं का मुद्दा और प्रदेश संगठन को लेकर जारी मतभेद इस बात के संकेत हैं कि पार्टी नेतृत्व अब पंजाब की स्थिति को लेकर कोई ठोस रणनीति बनाने की तैयारी में है। अगले सप्ताह प्रस्तावित हाईकमान बैठक और उसके बाद होने वाले फैसले यह तय कर सकते हैं कि पंजाब कांग्रेस मौजूदा गुटबाजी को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ती है या संगठन के भीतर चल रही खींचतान आने वाले महीनों में भी जारी रहती है।




