‘2022 की हालत से आज तक बड़ा बदलाव’, सिसोदिया ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था का रखा रिपोर्ट कार्ड

‘2022 की हालत से आज तक बड़ा बदलाव’, सिसोदिया ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था का रखा रिपोर्ट कार्ड

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर विपक्षी दलों के सवालों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत ब्योरा सामने रखते हुए कहा कि पंजाब की सरकारी शिक्षा व्यवस्था का सही आकलन तभी हो सकता है, जब वर्ष 2022 की स्थिति और मौजूदा हालात की निष्पक्ष तुलना की जाए।

सिसोदिया ने कहा कि जब वर्ष 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने सत्ता संभाली थी, उस समय राज्य के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक थी। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में स्कूलों में पर्याप्त शौचालय नहीं थे, करीब चार लाख विद्यार्थी फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे और हजारों स्कूलों में पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इसके बाद सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी बड़े स्तर पर काम किया।

सिसोदिया के मुताबिक, पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान पंजाब के लगभग 20 हजार सरकारी स्कूलों में व्यापक स्तर पर सुधार किए गए हैं। इस अवधि में 9 हजार से अधिक नए क्लासरूम और लैब तैयार किए गए। विद्यार्थियों के लिए 13,920 नए शौचालय बनाए गए, जबकि करीब दो लाख नए डेस्क उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार से अधिक इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि 5,012 सरकारी स्कूलों में एडवांस्ड कंप्यूटर लैब स्थापित की गई हैं और सभी सरकारी स्कूलों में वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।

उन्होंने कहा कि स्कूलों के भौतिक ढांचे को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण तैयार करने पर भी ध्यान दिया गया है। सिसोदिया के अनुसार, राज्य के 99 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बाउंड्री वॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। पंजाब में आई दो बड़ी बाढ़ों से प्रभावित स्कूलों का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके मुताबिक, बाढ़ के कारण 7 हजार से अधिक स्कूल प्रभावित हुए थे, जिनमें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करीब 500 स्कूलों के पुनर्निर्माण का काम तेजी से चल रहा है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सिसोदिया ने कहा कि किसी भी सरकार के काम का मूल्यांकन अधूरी तस्वीर के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया और पत्रकारों से अपील की कि पंजाब के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखते समय केवल कमियों या राजनीतिक आरोपों पर ध्यान देने के बजाय पिछले वर्षों में हुए बदलावों को भी सामने रखा जाए।

सिसोदिया ने कहा कि यदि कांग्रेस और भाजपा के शासनकाल की तुलना करनी है तो केवल कुछ वर्षों या चुनिंदा आंकड़ों को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के 15 से 20 वर्षों के शासन के दौरान सरकारी स्कूलों की स्थिति और आम आदमी पार्टी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में हुए काम को समान आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि शिक्षा क्षेत्र में कितनी प्रगति हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मुद्दे पर अधूरे तथ्यों के आधार पर सरकार की आलोचना की जाती है तो आम आदमी पार्टी आंकड़ों और तथ्यों के साथ उसका जवाब देगी। सिसोदिया के मुताबिक, राजनीतिक बहस अपनी जगह है, लेकिन शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जनता को पूरी और तथ्यात्मक जानकारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्कूलों की सफलता केवल नई इमारतों, स्मार्ट क्लासरूम या आधुनिक सुविधाओं से तय नहीं होती। इसका सबसे महत्वपूर्ण पैमाना विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणाम और अभिभावकों का सरकारी स्कूलों पर भरोसा है। सिसोदिया ने दावा किया कि पंजाब में इस भरोसे में बड़ा बदलाव आया है और इसका सबसे बड़ा संकेत निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के बढ़ते दाखिले हैं।

उन्होंने बताया कि 3.64 लाख विद्यार्थी निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए हैं। सिसोदिया ने इसे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया। उनका कहना था कि यदि सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और पढ़ाई को लेकर लोगों का भरोसा नहीं बढ़ता तो इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी संस्थानों से सरकारी स्कूलों की ओर नहीं आते।

सिसोदिया ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पंजाब के विद्यार्थियों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि NEET क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 80 से बढ़कर 882 तक पहुंच गई है। उनके अनुसार, पिछले चार वर्षों में कुल 2,166 विद्यार्थियों ने NEET और 786 विद्यार्थियों ने JEE क्वालीफाई किया है। उन्होंने इन उपलब्धियों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का अहम संकेत बताया।

आम आदमी पार्टी नेता ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और कौशल विकास को शामिल किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां कक्षा पहली से 12वीं तक विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की पढ़ाई कराई जा रही है। उनका कहना था कि मौजूदा दौर में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, इसलिए बच्चों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने ‘बिजनेस ब्लास्टर्स’ कार्यक्रम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए करीब 2.30 लाख विद्यार्थियों को व्यवसाय शुरू करने और कारोबारी सोच विकसित करने का अनुभव दिया गया है। इसके अलावा राज्य में 40 स्किल एजुकेशन स्कूल शुरू किए गए हैं। सिसोदिया के अनुसार, इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार और उद्यमिता की बदलती जरूरतों के लिए तैयार करना है।

सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में शिक्षा सुधार का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और सरकारी स्कूलों में लगातार सुधार की जरूरत बनी रहेगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि दशकों से चली आ रही बुनियादी समस्याओं को दूर करने की दिशा में पिछले साढ़े चार वर्षों में उल्लेखनीय काम हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बदलाव केवल बजट बढ़ाने या भवन बनाने से संभव नहीं है। इसके लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, लगातार निगरानी और बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने वाली सोच जरूरी है। उनके मुताबिक, पंजाब सरकार ने इसी दिशा में काम किया है और इसके परिणाम स्कूलों की सुविधाओं, विद्यार्थियों के दाखिले, प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजों और अभिभावकों के बढ़ते भरोसे में दिखाई दे रहे हैं।

सिसोदिया ने कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर बहस होनी चाहिए, लेकिन यह बहस आंकड़ों और जमीनी हकीकत पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि वर्ष 2022 की स्थिति से आज तक हुए बदलावों को एक साथ देखने पर ही सरकारी स्कूलों में किए गए सुधारों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।