पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे को लेकर प्रदेश कांग्रेस में हलचल बढ़ गई है। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और गुटबाजी के बीच राहुल गांधी का यह दौरा संगठन के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के सितंबर के दूसरे सप्ताह तक पंजाब पहुंचने की संभावना है। उनके दौरे का अंतिम कार्यक्रम कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी के बाद अगले दो-तीन दिनों में जारी किया जा सकता है।
राहुल गांधी के दौरे को लेकर पंजाब कांग्रेस ने प्रारंभिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में राहुल गांधी अपने दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर उन्हें चुनावी तैयारियों में एक साथ आगे बढ़ने का संदेश दे सकते हैं।
राहुल गांधी के पंजाब दौरे की चर्चा उस समय तेज हुई थी, जब संसद के मानसून सत्र के दौरान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने उनसे मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान पंजाब की राजनीतिक स्थिति, संगठन की गतिविधियों और पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने राहुल गांधी को पंजाब आने का न्योता भी दिया था।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को केवल राजनीतिक सभा तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक संगठनात्मक कार्यक्रम के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसी के तहत कांग्रेस की बस यात्रा निकालने की योजना है। बताया जा रहा है कि यात्रा की शुरुआत अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब से की जा सकती है। इसके जरिए कांग्रेस पंजाब में अपने जनसंपर्क अभियान को गति देने और पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश करेगी।
प्रस्तावित यात्रा के पहले चरण में लगभग 135 किलोमीटर की दूरी तय करने की योजना है। इस दौरान 15 से अधिक जिलों को कवर किए जाने की संभावना है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ दिल्ली से कांग्रेस के कुछ बड़े नेता भी यात्रा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि यात्रा का अंतिम रूट और कार्यक्रम हाईकमान की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
राहुल गांधी के दौरे से पहले उनकी टीम की ओर से पंजाब में तैयारियों का जायजा भी लिया जा चुका है। टीम के सदस्यों ने प्रदेश में संगठनात्मक स्थिति और प्रस्तावित कार्यक्रमों से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी की यात्रा को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वह पार्टी के विभिन्न गुटों के नेताओं और कार्यकर्ताओं तक पहुंच सकें।
दौरे के दौरान राहुल गांधी की पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें होने की भी संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के अलावा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठन और चुनावी रणनीति पर बातचीत हो सकती है।
पार्टी के लिए इन बैठकों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पंजाब कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक मतभेदों का सामना कर रही है। अलग-अलग नेताओं के समर्थक अपने-अपने राजनीतिक समीकरणों के अनुसार सक्रिय हैं और कई मौकों पर पार्टी के भीतर मतभेद सार्वजनिक रूप से भी सामने आ चुके हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान इन मतभेदों को कम करने और नेताओं को एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
एक जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए 21 सदस्यीय विभिन्न चुनाव समितियों का गठन किया था। समितियों की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस में असंतोष के स्वर भी सुनाई दिए। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे से जुड़े कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते हुए उन्हें बदलने की मांग तक उठा दी थी।
हालांकि पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष को बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन को चुनावी तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया जा रहा है। इसके साथ ही चुनाव समितियों में विस्तार की संभावना भी बनी हुई है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले कुछ नई नियुक्तियों और समितियों के विस्तार की घोषणा की जा सकती है।
कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि प्रदेश के प्रमुख नेताओं के बीच समन्वय कैसे स्थापित किया जाए। हाल के पार्टी कार्यक्रमों में नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी ने गुटबाजी की चर्चाओं को और हवा दी है। चंडीगढ़ में महंगाई के मुद्दे पर आयोजित राजा वड़िंग के कार्यक्रम में चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी थी।
दूसरी ओर, बाबा बकाला साहिब में राखड़ पुन्नियां मेले से जुड़े कांग्रेस के कार्यक्रम में चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जबकि राजा वड़िंग वहां दिखाई नहीं दिए। इन अलग-अलग कार्यक्रमों में नेताओं की मौजूदगी ने प्रदेश कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ाया है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर नेताओं के बीच तालमेल कायम करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन, चुनावी समितियों, संगठनात्मक नियुक्तियों और प्रचार अभियान को लेकर जल्द ही महत्वपूर्ण फैसले लेने होंगे।
राहुल गांधी के संभावित दौरे को इसी व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी चाहती है कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले प्रदेश स्तर पर नेतृत्व के बीच मतभेद कम हों और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा मिले। राहुल गांधी अपने दौरे में कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और राज्य सरकार के खिलाफ पार्टी की रणनीति को लेकर भी नेताओं से चर्चा कर सकते हैं।
बस यात्रा को भी कांग्रेस की इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि यात्रा श्री हरमंदिर साहिब से शुरू होती है और विभिन्न जिलों से गुजरती है तो इससे पार्टी को कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही राहुल गांधी और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में पार्टी अपने चुनावी अभियान की शुरुआती दिशा भी तय कर सकती है।
पंजाब में कांग्रेस के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी को आम आदमी पार्टी और भाजपा के साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल की संभावित सक्रियता से भी मुकाबला करना पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस को संगठनात्मक स्तर पर मजबूती के साथ-साथ स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की आवश्यकता है।
पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि राहुल गांधी का दौरा केवल एक जनसभा या यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। उनके सामने प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों को साथ लाने, वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद बढ़ाने और कार्यकर्ताओं में चुनावी उत्साह पैदा करने की चुनौती भी होगी। यदि दौरे के दौरान संगठनात्मक स्तर पर कोई महत्वपूर्ण घोषणा होती है तो इससे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में नई दिशा तय हो सकती है।
फिलहाल सभी की नजर राहुल गांधी के पंजाब दौरे की आधिकारिक तारीख और कार्यक्रम पर टिकी है। हाईकमान से मंजूरी मिलने के बाद यात्रा का रूट, जिलों में होने वाले कार्यक्रम और नेताओं की भागीदारी की तस्वीर साफ होगी। इसके साथ ही चुनाव समितियों के संभावित विस्तार और संगठनात्मक बदलावों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राहुल गांधी के दौरे से पहले कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रदेश संगठन को एक मंच पर लाना है। यदि पार्टी अपने अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित करने में सफल रहती है तो आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मजबूती मिल सकती है। वहीं, यदि गुटबाजी जारी रही तो कांग्रेस के चुनावी अभियान पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में राहुल गांधी का प्रस्तावित पंजाब दौरा प्रदेश कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता और चुनावी रणनीति, दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




