8 सितंबर को पंजाब सरकार के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, 23 जिलों में प्रदर्शन और CM आवास घेरने का ऐलान

8 सितंबर को पंजाब सरकार के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, 23 जिलों में प्रदर्शन और CM आवास घेरने का ऐलान

पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पंजाब कांग्रेस आठ सितंबर को राज्य के सभी 23 जिलों में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने इन प्रदर्शनों के साथ मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की भी घोषणा की है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों के लंबित अधिकारों, महंगाई भत्ते, कानून-व्यवस्था और नशे सहित कई मुद्दों पर जवाब देना होगा।

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एसआईआर के चीफ कोऑर्डिनेटर हरदीप सिंह किंगरा ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के आंदोलन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब सरकार के खिलाफ मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुकी है और आठ सितंबर को प्रदेशभर में एक साथ प्रदर्शन किए जाएंगे।

किंगरा के मुताबिक, कांग्रेस का मुख्य फोकस सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े उन मुद्दों पर रहेगा, जिन्हें लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के करीब चार लाख सरकारी कर्मचारी और लगभग साढ़े तीन लाख सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने कई लंबित वित्तीय लाभों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में गंभीरता नहीं दिखा रही।

उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते का भुगतान, कर्मचारियों के अन्य लंबित वित्तीय लाभ और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे लगातार उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि सरकार के पास अब इन मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन हैं, इसके बावजूद कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

हरदीप सिंह किंगरा ने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों के मुद्दे को राजनीतिक रूप से भी प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनती है तो कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। उनके अनुसार, सरकारी कर्मचारियों को उनके अधिकार समय पर मिलना जरूरी है और किसी भी सरकार के लिए कर्मचारियों की समस्याओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है।

किंगरा ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पैदा हुए गंभीर आर्थिक संकट के कारण उस समय कर्मचारियों की कुछ मांगों को पूरा करने में कठिनाई आई थी। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव था और सरकार के सामने कई तरह की आर्थिक चुनौतियां थीं। हालांकि, उनका तर्क है कि मौजूदा सरकार को सत्ता में आए काफी समय हो चुका है और अब उसके पास कर्मचारियों के लंबित मामलों का समाधान करने के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार को इस संबंध में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों और पेंशनरों में अपने अधिकारों को लेकर लगातार नाराजगी बढ़ रही है और कांग्रेस इस नाराजगी को सरकार के सामने मजबूती से उठाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किंगरा ने पंजाब की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध और नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है और सरकार इस मोर्चे पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। उनका दावा था कि प्रदेश में नशे की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने संगरूर में युवक मोहनजीत के साथ कथित मारपीट के मामले को भी उठाया। किंगरा ने आरोप लगाया कि युवक की कथित पिटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने संबंधित थाना प्रभारी और डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कानून को सभी के लिए समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

किंगरा ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी पर किसी युवक के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार के आरोप लगते हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि संगरूर मामले में तथ्यों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

नशे के मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने पंजाब सरकार के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है। किंगरा ने आरोप लगाया कि नशे की समस्या को खत्म करने के लिए जिस स्तर की कार्रवाई की जरूरत है, वह अभी दिखाई नहीं दे रही।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी आठ सितंबर के प्रदर्शन में प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी का उद्देश्य जिला स्तर से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक सरकार पर दबाव बनाना है, ताकि इन मामलों में जवाबदेही तय हो सके।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने जंतर-मंतर पर युवाओं के साथ कथित मारपीट के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुना जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए युवाओं के साथ कथित व्यवहार की आलोचना की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किंगरा ने मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े पांच करोड़ रुपये के कथित रिश्वत मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों को लेकर उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को भेजे गए मानहानि नोटिस का भी विरोध किया। किंगरा ने कहा कि राजनीतिक नेताओं द्वारा सरकार और सत्ता से जुड़े लोगों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने खैरा को भेजे गए नोटिस को गलत बताते हुए इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।

हरदीप सिंह किंगरा ने कहा कि आठ सितंबर का आंदोलन केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभ, डीए, पेंशनरों के अधिकार, कानून-व्यवस्था, नशे और सरकार की कथित विफलताओं को लेकर जनता के बीच जाएगी। पार्टी की योजना सभी 23 जिलों में एक साथ प्रदर्शन कर सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की है।

कांग्रेस के इस ऐलान के बाद पंजाब की सियासत में आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं। एक तरफ सरकार कर्मचारियों और अन्य वर्गों से जुड़े मामलों पर अपने फैसलों और नीतियों को सामने रख रही है, वहीं विपक्षी कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।

किंगरा ने कहा कि कांग्रेस आठ सितंबर के कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करेगी और जिला मुख्यालयों पर कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास के घेराव के जरिए पार्टी राज्य सरकार तक अपनी बात सीधे पहुंचाने का प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जनता से किए गए कई वादों को पूरा करने में विफल रही है और अब पार्टी इन मुद्दों को विधानसभा से बाहर सड़क तक ले जाएगी।

आठ सितंबर को होने वाला यह प्रदर्शन ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पंजाब में कर्मचारियों से जुड़े डीए और अन्य वित्तीय लाभों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस ने इसी मुद्दे के साथ नशे, कानून-व्यवस्था और कथित प्रशासनिक विफलताओं को जोड़कर सरकार के खिलाफ व्यापक अभियान की तैयारी की है। अब आठ सितंबर के प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस कितना राजनीतिक दबाव बना पाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।