दिड़बा घटना पर राहुल गांधी को मंत्री बरिंदर गोयल का पलटवार, बोले- पंजाब आकर जमीनी हकीकत देखें

दिड़बा घटना पर राहुल गांधी को मंत्री बरिंदर गोयल का पलटवार, बोले- पंजाब आकर जमीनी हकीकत देखें

पंजाब में दिड़बा की हालिया घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से घटना और नशे के मुद्दे पर की गई टिप्पणी पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। आप पंजाब के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे एक दुखद घटना को लेकर पीड़ित परिवार की भावनाओं और स्थानीय लोगों की इच्छा को समझने के बजाय इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटे हैं।

बरिंदर कुमार गोयल ने राहुल गांधी के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कांग्रेस को पंजाब सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या कोई नई समस्या नहीं है और लंबे समय से चली आ रही इस चुनौती के लिए पिछली सरकारों की नीतियां भी जिम्मेदार रही हैं। उनके अनुसार, मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार ने नशे के नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू की है और इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की बात की है, लेकिन उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि वर्ष 2017 में कांग्रेस ने पंजाब की सत्ता में आने से पहले नशे को लेकर बड़े दावे किए थे। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब कांग्रेस सरकार को प्रदेश में पांच साल तक शासन करने का अवसर मिला था, तब नशे के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए गए और उसके परिणाम क्या रहे।

गोयल ने कहा कि पंजाब की मौजूदा सरकार ने नशे के खिलाफ केवल बयानबाजी नहीं की, बल्कि इसे एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती मानते हुए अभियान के स्तर पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, तस्करों पर कार्रवाई करने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

कैबिनेट मंत्री ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनके पास सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस राजनीतिक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे संवेदनशील घटनाओं को राजनीतिक विवाद में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी परिवार के दुख और संकट के समय राजनीति करने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

गोयल ने कहा कि पंजाब की जनता हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखने वाली राजनीति को पसंद नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले धर्म और जाति जैसे मुद्दों के जरिए राजनीति करता रहा है और अब जब इन मुद्दों से अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिल रहा तो दुखद घटनाओं को लेकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति पंजाब की सामाजिक परंपरा और भाईचारे के अनुरूप नहीं है।

दिड़बा की घटना का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवार ने अपनी इच्छा के अनुसार गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया था। उनके मुताबिक परिवार की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर फैसला किए जाने के बावजूद विपक्षी नेताओं के वहां पहुंचने से मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश हुई।

उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने भी राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और उन्हें वहां से जाने के लिए कहा। गोयल के अनुसार, स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने स्तर पर एक कमेटी गठित कर ली है और मामले से जुड़े विषयों को वे स्वयं संभालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय लोग स्वयं किसी मामले को संभालने की बात कह रहे हों तो बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप से स्थिति को और जटिल बनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

आप नेता ने विपक्ष से अपील की कि वह पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करे और घटना को राजनीतिक मंच में बदलने से बचे। उन्होंने कहा कि दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े होने का अर्थ यह नहीं है कि हर संवेदनशील मामले को राजनीतिक बयानबाजी का विषय बना दिया जाए।

बरिंदर कुमार गोयल ने राहुल गांधी को पंजाब आकर दिड़बा के संबंधित गांव की स्थिति स्वयं देखने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में पंजाब में नशे और इससे जुड़े सामाजिक हालात को समझना चाहते हैं तो उन्हें केवल दिल्ली में बैठकर सोशल मीडिया पर बयान देने के बजाय पंजाब आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी गांव में जाएं, स्थानीय लोगों से बातचीत करें और उनसे पूछें कि वे क्या चाहते हैं। मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर लोगों की सोच और उनकी प्राथमिकताओं को समझे बिना केवल राजनीतिक बयान जारी करने से वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता।

गोयल ने कहा कि पंजाब के गांवों में लोग अपनी समस्याओं और जरूरतों को लेकर स्पष्ट हैं। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों से सीधे संवाद के जरिए ही यह समझा जा सकता है कि किसी घटना को लेकर उनकी वास्तविक मांग क्या है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे राजनीतिक बयान देने से पहले संबंधित परिवार और स्थानीय समुदाय की इच्छा को प्राथमिकता दें।

मंत्री ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या कई वर्षों से चली आ रही है और इसके लिए पिछली कांग्रेस तथा अकाली-भाजपा सरकारों के कार्यकाल की नीतियों पर भी सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार इस समस्या से निपटने के लिए नशा तस्करों के नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि नशे की सप्लाई चेन और तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करना भी है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई की जाए, जो इस अवैध कारोबार को बढ़ावा देते हैं।

गोयल ने विपक्षी दलों से सवाल किया कि यदि उन्हें वास्तव में पंजाब के युवाओं और नशे की समस्या की चिंता है तो उन्हें सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों में रचनात्मक सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशा एक सामाजिक चुनौती है और इसे केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकार के साथ समाज, परिवारों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भी भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि पंजाब की सामाजिक संरचना में भाईचारे और आपसी सहयोग की परंपरा रही है। ऐसे में किसी दुखद घटना के दौरान लोगों की भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी, जिसमें पीड़ित परिवार की पीड़ा से अधिक राजनीतिक प्रचार को महत्व दिया जाए।

कैबिनेट मंत्री ने एक बार फिर विपक्षी नेताओं के घटनास्थल पर पहुंचने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय लोगों ने पहले ही अपनी कमेटी बना ली थी और परिवार ने अपने स्तर पर अंतिम संस्कार का फैसला कर लिया था, तो राजनीतिक नेताओं को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का किसी भी घटना को दबाने या उससे बचने का कोई सवाल नहीं है। सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करने और लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन उन्होंने विपक्ष से यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप और बयानबाजी से पहले तथ्यों और स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझना चाहिए।

गोयल ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता जब भी पंजाब में कोई घटना होती है, तो मौके पर पहुंचने की होड़ में लग जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य कई बार पीड़ितों की मदद करने के बजाय राजनीतिक माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को इस प्रकार की राजनीति की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि पंजाब को ऐसे राजनीतिक माहौल की जरूरत है, जहां विभिन्न समुदाय और वर्ग मिलकर सामाजिक समस्याओं का समाधान तलाशें। नशे के खिलाफ लड़ाई को भी इसी सामूहिक भावना के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई के साथ परिवारों और समाज को भी युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्रियों और विधायकों को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों में कोई आधार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो आप के किसी मंत्री और न ही किसी विधायक का दिड़बा की घटना से कोई संबंध है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से बिना तथ्यों के आरोप लगाने से बचने की अपील की।

गोयल ने कहा कि किसी भी घटना की जांच और कानूनी कार्रवाई संबंधित एजेंसियों के स्तर पर की जाती है। राजनीतिक दलों को जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के बजाय कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास मामले से संबंधित कोई तथ्य या प्रमाण है तो उसे उचित कानूनी मंच पर रखना चाहिए, न कि केवल सार्वजनिक बयानबाजी के माध्यम से राजनीतिक माहौल बनाना चाहिए।

उन्होंने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से कहा कि पंजाब के बारे में कोई भी राय बनाने से पहले वे यहां के लोगों से संवाद करें। गांवों में जाकर किसानों, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय परिवारों की समस्याओं को सुनें। उन्होंने कहा कि जमीन पर लोगों से मिलने के बाद ही पंजाब की वास्तविक तस्वीर को समझा जा सकता है।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार नशे के खिलाफ अपनी मुहिम को लगातार आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश को नशे की समस्या से मुक्त करने की दिशा में ठोस कार्रवाई करना है। इसके लिए तस्करी के नेटवर्क पर प्रहार के साथ-साथ युवाओं के पुनर्वास और जागरूकता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि वह राजनीतिक मतभेदों को अपनी जगह रखते हुए नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर सरकार के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक दल के लिए राजनीति से बड़ा विषय होना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि पंजाब के लोग शांतिपूर्ण और भाईचारे वाले माहौल में विश्वास रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय समस्याओं के वास्तविक समाधान की अपेक्षा करती है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करें और दुखद घटनाओं को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल न करें।

अंत में बरिंदर कुमार गोयल ने विपक्ष से एक बार फिर अपील की कि वह दिड़बा की घटना को लेकर की जा रही कथित राजनीतिक बयानबाजी से दूर रहे। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का इंतजार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी और पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान को पूरी गंभीरता के साथ जारी रखा जाएगा।