पंजाब में गुलजार सिंह की मौत और उसके बाद हुए अंतिम संस्कार को लेकर सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गुलजार सिंह के परिवार की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बाजवा ने सरकार से मांग की है कि चीमा को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग भी उठाई है।
बाजवा ने कहा कि गुलजार सिंह के परिवार ने अंतिम संस्कार को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार करवा दिया गया। परिवार की ओर से यह भी निर्णय लिया गया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक गुलजार सिंह का भोग नहीं किया जाएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी परिवार के लिए अपने सदस्य को खोना पहले ही असहनीय पीड़ा होती है, लेकिन यदि उसी परिवार को यह आरोप लगाना पड़े कि उसके प्रियजन का अंतिम संस्कार भी उसकी इच्छा के अनुरूप नहीं होने दिया गया, तो यह पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
प्रताप बाजवा ने सरकार से सवाल किया कि यदि प्रशासन और सरकार के पास इस मामले में छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो अंतिम संस्कार के दौरान इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती क्यों की गई। उन्होंने कहा कि परिवार की कथित इच्छा और सहमति को नजरअंदाज किए जाने की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में सरकार का पहला दायित्व पीड़ित परिवार को भरोसा देना और उसकी बात सुनना होना चाहिए, न कि ऐसी परिस्थितियां पैदा करना जिनसे संदेह और सवाल और गहरे हों।
बाजवा ने कहा कि गुलजार सिंह के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होना चाहिए कि घटनाक्रम में वास्तव में क्या हुआ, किसके निर्देश पर कार्रवाई की गई और अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस की इतनी बड़ी मौजूदगी की आवश्यकता क्यों पड़ी।
कांग्रेस नेता ने कानून के कथित दोहरे इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में कार्रवाई व्यक्ति के राजनीतिक या सरकारी पद के आधार पर अलग-अलग नहीं होनी चाहिए। बाजवा ने सरकारी अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या से जुड़े पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस घटनाक्रम में तत्कालीन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर का नाम सामने आया था। उनके मुताबिक, उस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, गिरफ्तारी हुई और बाद में चार्जशीट भी दाखिल की गई।
बाजवा ने इसी उदाहरण के आधार पर आम आदमी पार्टी सरकार से सवाल किया कि यदि किसी मंत्री के खिलाफ आरोप सामने आने पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है तो हरपाल सिंह चीमा से जुड़े मामले में अलग मानदंड क्यों अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी के लिए एक समान प्रक्रिया होनी चाहिए और किसी मंत्री या प्रभावशाली व्यक्ति को पद के कारण किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह प्रकरण में यदि परिवार के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है। बाजवा ने कथित तौर पर जबरन अंतिम संस्कार करवाने में भूमिका निभाने वाले सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि घटनाक्रम से जुड़े प्रत्येक पहलू की जांच की जानी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने विशेष रूप से हरपाल सिंह चीमा की गिरफ्तारी और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि जब किसी मंत्री के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार को कड़ा और पारदर्शी कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान किसी भी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव नहीं होना चाहिए।
बाजवा ने यह भी कहा कि इस मामले में केवल अंतिम संस्कार से जुड़ा विवाद ही नहीं, बल्कि गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियों और उसके बाद प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की भी गहन जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम से जुड़े सभी दस्तावेज, पुलिस कार्रवाई, अधिकारियों के निर्देश और परिवार के साथ हुई बातचीत की जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि जांच के लिए ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे पीड़ित परिवार को भरोसा हो कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो रही है। बाजवा ने कहा कि किसी भी जांच में समय की भी अहम भूमिका होती है। यदि किसी परिवार को लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़े तो उसके मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है। इसलिए जांच के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए और उसकी प्रगति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की उस अपील पर भी बाजवा ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने विपक्ष से मृतकों के शवों पर राजनीति नहीं करने का आग्रह किया था। बाजवा ने कहा कि किसी शोकाकुल परिवार द्वारा न्याय की मांग को राजनीति कहना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यदि कोई परिवार अपनी शिकायत सामने रखता है और सरकार से न्याय की गुहार लगाता है, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह उस परिवार की आवाज उठाए।
बाजवा ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि परिवार को न्याय दिलाने के मुद्दे के रूप में देख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी गुलजार सिंह के परिवार के साथ खड़ी रहेगी और जब तक परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक उसकी आवाज उठाती रहेगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी अपील की कि वे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर ठोस कदम उठाएं। बाजवा के मुताबिक, सरकार की जिम्मेदारी है कि वह परिवार के आरोपों की जांच करवाए और यदि किसी अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है और गंभीर आरोपों की जांच की मांग करना उसका कर्तव्य भी है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक की मौत और उसके बाद उसके परिवार के अधिकारों से जुड़े मामले को राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए।
बाजवा ने दोहराया कि गुलजार सिंह के मामले में परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच का विषय है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच, एफआईआर, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही और परिवार को न्याय दिलाना इस पूरे मामले में प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और कानून के शासन में विश्वास करती है तो उसे जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए। बाजवा ने मांग की कि गुलजार सिंह की मौत से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी घटनाक्रम श्रृंखला की स्वतंत्र जांच करवाई जाए और जो भी व्यक्ति कानून या प्रक्रिया का उल्लंघन करने का दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई की जाए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच गुलजार सिंह के परिवार की ओर से न्याय मिलने तक भोग न करने का फैसला मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ाता है। विपक्ष ने इसे सरकार के सामने एक गंभीर सवाल के रूप में रखा है, जबकि अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। कांग्रेस का कहना है कि परिवार की शिकायतों का समाधान और आरोपों की निष्पक्ष जांच ही इस विवाद को खत्म करने का सबसे उचित रास्ता है।




