5453 करोड़ की गुरुग्राम मेट्रो परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, हिसार क्लस्टर और एम्स माजरा की प्रगति भी परखी गई

5453 करोड़ की गुरुग्राम मेट्रो परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, हिसार क्लस्टर और एम्स माजरा की प्रगति भी परखी गई

हरियाणा में बड़े बुनियादी ढांचा और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी और विभागीय समन्वय पर जोर बढ़ाया है। 16 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में प्रगति और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें गुरुग्राम मेट्रो, हिसार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, एम्स माजरा रेवाड़ी, नांगल चौधरी के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और विद्युत संप्रेषण से जुड़ी परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करना नहीं था, बल्कि उन प्रशासनिक और तकनीकी मामलों की पहचान करना भी था जिनके कारण काम की गति प्रभावित हो सकती है। जमीन, विभागीय मंजूरी, निविदा प्रक्रिया, बाहरी कनेक्टिविटी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई।

हरियाणा में गुरुग्राम और हिसार जैसे शहर तेजी से आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं। ऐसे में परिवहन, उद्योग, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और बिजली नेटवर्क से जुड़ा बुनियादी ढांचा राज्य की भविष्य की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से बड़ी परियोजनाओं के अलग-अलग चरणों की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गुरुग्राम मेट्रो परियोजना पर रहा विशेष फोकस

बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की प्रगति पर रहा। हरियाणा सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार परियोजना की अनुमानित लागत 5,452.72 करोड़ रुपये है। इसका प्रमुख कॉरिडोर मिलेनियम सिटी सेंटर को साइबर सिटी से जोड़ेगा और इसमें द्वारका एक्सप्रेसवे की ओर कनेक्टिविटी भी शामिल है। सरकारी भूमि के उपयोग से संबंधित कार्य अनुमति मिलने के बाद संबंधित स्थानों पर साइट गतिविधियां शुरू होने की जानकारी बैठक में दी गई।

गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड के अनुसार स्वीकृत कॉरिडोर की कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 28.5 किलोमीटर है और इसमें 27 एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं। मुख्य कॉरिडोर मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक जाएगा, जबकि बसई गांव की ओर से द्वारका एक्सप्रेसवे क्षेत्र को जोड़ने के लिए एक स्पर भी योजना का हिस्सा है।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद गुरुग्राम के पुराने और नए हिस्सों के बीच सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ने की उम्मीद है। शहर में आवासीय सेक्टर, औद्योगिक क्षेत्र, कॉरपोरेट हब और व्यावसायिक इलाकों के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। इसलिए नया मेट्रो कॉरिडोर केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि शहर के अलग-अलग आर्थिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क भी होगा।

मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक बनेगा नया नेटवर्क

मिलेनियम सिटी सेंटर पहले से दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्टेशन है। प्रस्तावित गुरुग्राम मेट्रो इसे शहर के अंदर स्थित कई सेक्टरों और रोजगार केंद्रों से जोड़ेगी। योजना में सेक्टर 45, साइबर पार्क, सुभाष चौक, सेक्टर 48, हीरो होंडा चौक, सेक्टर 10, सेक्टर 37, बसई गांव, सेक्टर 9, पालम विहार, उद्योग विहार और साइबर सिटी जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी शामिल है।

गुरुग्राम में अभी दिल्ली मेट्रो और रैपिड मेट्रो की सेवाएं मौजूद हैं, लेकिन शहर का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में इन नेटवर्कों से काफी आगे बढ़ा है। द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास भी नए आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित हुए हैं। ऐसे में नए मेट्रो कॉरिडोर का उद्देश्य उन इलाकों तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाना है जहां बड़ी आबादी और कार्यबल के लिए सड़क परिवहन अभी प्रमुख साधन है।

मेट्रो जैसी परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन केवल निर्माण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट रूप से किया जा सकता है। हालांकि बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने से यात्रियों को सड़क आधारित निजी परिवहन के अतिरिक्त एक और विकल्प मिलने की संभावना रहती है।

द्वारका एक्सप्रेसवे क्षेत्र तक कनेक्टिविटी पर जोर

द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर आवासीय और वाणिज्यिक विकास हुआ है। गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए बसई गांव से लगभग 1.85 किलोमीटर के स्पर का प्रावधान किया गया है। मुख्य कॉरिडोर और स्पर मिलाकर स्वीकृत नेटवर्क की लंबाई लगभग 28.5 किलोमीटर है।

यह कनेक्टिविटी भविष्य में द्वारका एक्सप्रेसवे क्षेत्र के निवासियों और यहां विकसित हो रहे व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हालांकि किसी भी बड़े मेट्रो प्रोजेक्ट में निर्माण, सिस्टम इंस्टॉलेशन, परीक्षण और संचालन शुरू होने तक कई अलग-अलग चरण पूरे किए जाते हैं।

इसी कारण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में जमीन उपलब्ध कराने से लेकर निर्माण एजेंसियों और अन्य सरकारी विभागों के बीच तालमेल तक अलग-अलग मुद्दों की निगरानी की जा रही है।

सरकारी भूमि पर कार्य की अनुमति मिलने के बाद बढ़ी गतिविधियां

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जमीन की उपलब्धता और संबंधित विभागों की अनुमति निर्माण प्रक्रिया के शुरुआती और महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल होती है। गुरुग्राम मेट्रो के मामले में सरकारी भूमि के उपयोग के लिए आवश्यक कार्य अनुमति मिलने के बाद साइट पर काम शुरू होने की जानकारी अधिकारियों ने दी।

इसके बावजूद पूरे मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण एक ही समय पर समान स्थिति में नहीं होता। अलग-अलग हिस्सों के लिए सिविल कार्य, डिपो निर्माण, निविदाएं, तकनीकी कार्य और अन्य प्रक्रियाएं अपने निर्धारित चरणों के अनुसार आगे बढ़ती हैं। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड ने भी कॉरिडोर और डिपो से संबंधित अलग-अलग सिविल टेंडर जारी किए हैं।

इस प्रकार किसी एक स्थान पर निर्माण शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे कॉरिडोर पर सभी तरह के कार्य एक साथ शुरू हो गए हैं। प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति को विभिन्न पैकेजों और निर्माण चरणों के आधार पर देखना अधिक उपयोगी होता है।

हिसार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में महत्वपूर्ण प्रगति

बैठक में हिसार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर यानी IMC की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 4,679 करोड़ रुपये बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना के लिए आवश्यक पूरी भूमि सरकार के नियंत्रण में आ चुकी है और जरूरी पर्यावरण मंजूरी भी प्राप्त हो गई है।

किसी बड़े औद्योगिक क्लस्टर के विकास में जमीन और पर्यावरण संबंधी अनुमति दो अहम शुरुआती आवश्यकताएं होती हैं। इनके बाद सड़कों, जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली और अन्य औद्योगिक सुविधाओं से संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

हिसार में प्रस्तावित यह परियोजना अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ी औद्योगिक विकास योजना का हिस्सा है। करीब 2,988 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित क्लस्टर के लिए ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

707 करोड़ रुपये के EPC टेंडर पर चल रहा मूल्यांकन

हिसार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 707 करोड़ रुपये का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन यानी EPC टेंडर भी प्रक्रिया में है। हरियाणा सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस टेंडर के लिए 10 निविदाएं प्राप्त हुई हैं और उनका मूल्यांकन किया जा रहा है।

EPC मॉडल के तहत चयनित एजेंसी को आमतौर पर परियोजना के डिजाइन, आवश्यक सामग्री और उपकरणों की खरीद तथा निर्माण से जुड़े निर्धारित कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती है। हिसार परियोजना में ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास औद्योगिक इकाइयों के लिए मूलभूत सुविधाएं तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण होगा।

इस तरह की परियोजनाओं में निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद तकनीकी और वित्तीय शर्तों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। इसलिए परियोजना की प्रगति को केवल कुल निवेश राशि के बजाय भूमि, मंजूरी, टेंडर और वास्तविक निर्माण जैसे अलग-अलग चरणों के आधार पर समझना जरूरी है।

औद्योगिक विकास के लिए हिसार की लोकेशन महत्वपूर्ण

हिसार पहले से कृषि, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। शहर के आसपास सड़क नेटवर्क और महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के विकास के साथ बड़े औद्योगिक निवेश की संभावनाओं पर भी ध्यान बढ़ा है।

इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का उद्देश्य ऐसी जगह तैयार करना है जहां विभिन्न प्रकार की विनिर्माण इकाइयों को नियोजित औद्योगिक बुनियादी ढांचा मिल सके। इसमें आंतरिक सड़कें, पानी, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।

औद्योगिक क्लस्टर से निवेश और रोजगार की संभावनाएं जुड़ी रहती हैं, लेकिन इनका वास्तविक स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में कितनी कंपनियां यहां निवेश करती हैं, किस प्रकार के उद्योग स्थापित होते हैं और परियोजना के अलग-अलग चरण किस समय तक पूरे होते हैं। इसलिए संभावित आर्थिक लाभों को परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन के साथ देखा जाना चाहिए।

एम्स माजरा रेवाड़ी की कनेक्टिविटी पर भी समीक्षा

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में एम्स माजरा, रेवाड़ी का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहा। इस परियोजना की लागत 1,646.43 करोड़ रुपये बताई गई है। बैठक में रेवाड़ी के उपायुक्त ने सड़क और रेल ओवरब्रिज से जुड़ी कनेक्टिविटी की स्थिति की जानकारी दी।

सरकारी जानकारी के अनुसार कनेक्टिविटी कार्य के लिए 236 करोड़ रुपये की तकनीकी स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि करीब 169 करोड़ रुपये की निविदा सूचना यानी NIT तैयार की गई है।

बड़े स्वास्थ्य संस्थान तक सुगम पहुंच केवल मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों, कर्मचारियों, एम्बुलेंस सेवाओं, मेडिकल सप्लाई और आसपास के क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। इसी वजह से एम्स परिसर के निर्माण के साथ सड़क और रेल नेटवर्क से संबंधित कनेक्टिविटी कार्यों की भी निगरानी की जा रही है।

नांगल चौधरी मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब का काम आगे बढ़ा

हरियाणा की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में नांगल चौधरी स्थित इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब भी शामिल है। बैठक में इस परियोजना की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई।

इसके प्रथम चरण में लगभग 408 एकड़ भूमि शामिल है। यह भूमि संबंधित स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी SPV को हस्तांतरित की जा चुकी है। बाहरी कनेक्टिविटी और आंतरिक रेल यार्ड से संबंधित कार्य पूरे होने की जानकारी भी बैठक में दी गई। अब कंसेशनियर के चयन के लिए Request for Proposal यानी RFP की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब ऐसी जगह होती है जहां सड़क और रेल जैसे विभिन्न परिवहन साधनों के जरिए माल की आवाजाही को एकीकृत करने का प्रयास किया जाता है। इससे औद्योगिक इकाइयों और माल परिवहन कंपनियों को सप्लाई चेन प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।

हरियाणा की दिल्ली-एनसीआर से निकटता और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से कनेक्टिविटी के कारण लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर राज्य के औद्योगिक विकास से सीधे जुड़ा विषय है।

वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की प्रगति पर चर्चा

बैठक में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़े कार्यों की स्थिति भी समीक्षा के दायरे में रही। फ्रेट कॉरिडोर मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए विकसित समर्पित रेल नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य यात्री रेल नेटवर्क से अलग माल परिवहन क्षमता बढ़ाना है।

हरियाणा में औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स पार्क और विनिर्माण केंद्र विकसित होने के साथ माल परिवहन नेटवर्क का महत्व भी बढ़ता है। यदि औद्योगिक परियोजनाओं को बेहतर सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी मिलती है तो उत्पादों और कच्चे माल की आवाजाही अधिक व्यवस्थित की जा सकती है।

इसी कारण लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक क्लस्टर जैसी परियोजनाओं को बड़े परिवहन नेटवर्क से जोड़ने वाले कार्य भी सरकारी समीक्षा बैठकों का हिस्सा बने हुए हैं।

विद्युत संप्रेषण परियोजनाओं की स्थिति भी जांची गई

बड़े औद्योगिक, परिवहन और शहरी विकास प्रोजेक्ट्स के साथ बिजली की मांग भी बढ़ती है। बैठक में हरियाणा में चल रही विभिन्न विद्युत संप्रेषण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

विद्युत संप्रेषण नेटवर्क का काम बिजली उत्पादन केंद्रों या ग्रिड से बिजली को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने की उच्च क्षमता वाली व्यवस्था उपलब्ध कराना है। नए औद्योगिक क्लस्टर, व्यावसायिक क्षेत्र और तेजी से विकसित होते शहरों के लिए भरोसेमंद बिजली नेटवर्क बुनियादी आवश्यकता है।

इसी वजह से परिवहन और उद्योग परियोजनाओं के साथ ऊर्जा क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी व्यापक विकास योजना का हिस्सा माना जाता है।

विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बैठक के दौरान संबंधित विभागों, जिला प्रशासन, केंद्र सरकार के मंत्रालयों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने परियोजनाओं के कार्य में तेजी लाने और उन्हें निर्धारित समय के भीतर आगे बढ़ाने के लिए आपसी समन्वय सुनिश्चित करने को कहा।

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में आमतौर पर एक विभाग अकेले काम नहीं करता। जमीन किसी दूसरे विभाग के अधिकार क्षेत्र में हो सकती है, पर्यावरण संबंधी अनुमति अलग एजेंसी से मिलती है, सड़क कनेक्टिविटी के लिए अन्य विभाग की जरूरत पड़ सकती है और बिजली या पानी की सुविधा दूसरी संस्था उपलब्ध कराती है।

ऐसे में किसी एक स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रिया लंबित रहने से दूसरे चरण का काम भी प्रभावित हो सकता है। नियमित समीक्षा का उद्देश्य ऐसी निर्भरताओं को समय पर पहचानना और संबंधित विभाग तक मामला पहुंचाना होता है।

जमीन, मंजूरी और निविदा प्रक्रिया प्रोजेक्ट की रफ्तार के लिए अहम

बैठक में सामने आई अलग-अलग परियोजनाओं की स्थिति यह भी दिखाती है कि बड़े विकास प्रोजेक्ट केवल निर्माण गतिविधियों तक सीमित नहीं होते। निर्माण शुरू होने से पहले जमीन का हस्तांतरण, पर्यावरण अनुमति, तकनीकी स्वीकृति, टेंडर, एजेंसी चयन और कनेक्टिविटी जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं।

हिसार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में भूमि और पर्यावरण मंजूरी का चरण पूरा होना, गुरुग्राम मेट्रो के लिए सरकारी भूमि पर कार्य अनुमति और नांगल चौधरी लॉजिस्टिक्स हब में भूमि हस्तांतरण इसी प्रक्रिया के अलग-अलग उदाहरण हैं।

इसके बाद भी परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति उनके निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, निर्धारित समयसीमा और संचालन से जुड़े अगले चरणों पर निर्भर करेगी।

आने वाले चरणों में इन परियोजनाओं पर रहेगी नजर

हरियाणा में फिलहाल परिवहन, उद्योग, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं। आने वाले समय में गुरुग्राम मेट्रो के निर्माण पैकेजों की प्रगति, हिसार मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के EPC टेंडर का परिणाम, एम्स माजरा की कनेक्टिविटी और नांगल चौधरी लॉजिस्टिक्स हब के कंसेशनियर चयन जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

इन परियोजनाओं के बारे में वास्तविक प्रगति का आकलन आधिकारिक टेंडर, निर्माण गतिविधियों, स्वीकृतियों और संबंधित सरकारी एजेंसियों के अपडेट के आधार पर किया जाना अधिक विश्वसनीय होगा। नियमित मॉनिटरिंग से यह भी स्पष्ट होता रहेगा कि कौन-सा प्रोजेक्ट किस चरण में पहुंचा है और उसके अगले प्रमुख कार्य क्या हैं।

सरकार की 16 सितंबर की समीक्षा में अधिकारियों को परियोजनाओं की रफ्तार बनाए रखने और विभागों तथा एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर करने के निर्देश दिए गए। अब इन परियोजनाओं के अगले चरणों में प्रशासनिक स्वीकृतियों को वास्तविक निर्माण और क्रियान्वयन में बदलने की प्रक्रिया प्रमुख रहेगी।