हरियाणा में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अक्टूबर से राशन व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के गुलाबी यानी अंत्योदय परिवारों के राशन कार्ड धारकों को अब गेहूं के साथ बाजरा भी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार ने प्रति कार्ड 12 किलो बाजरा देने की व्यवस्था करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रदेश में बाजरे की सरकारी खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
सरकार की योजना के मुताबिक अक्टूबर महीने से पात्र परिवारों को गेहूं के निर्धारित कोटे के साथ बाजरा दिया जाएगा। बाजरे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों की ओर से खरीद और भंडारण की तैयारियां की जा रही हैं। इस वर्ष प्रदेश में बाजरे का उत्पादन भी पर्याप्त रहने की संभावना है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अनाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने भी गुलाबी कार्ड धारक परिवारों को बाजरा उपलब्ध कराने की पुष्टि की है। सरकार के इस फैसले से उन परिवारों को लाभ मिलेगा जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर महीने सरकारी राशन प्राप्त करते हैं।
अक्टूबर से शुरू होगी नई व्यवस्था
प्रदेश में अंत्योदय परिवारों को फिलहाल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गेहूं के साथ सरसों का तेल और अन्य निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अब इसमें बाजरे को भी शामिल किया जा रहा है। अक्टूबर से पात्र राशन कार्ड धारकों को प्रति कार्ड 12 किलो बाजरा दिए जाने की योजना है।
सरकार की ओर से बाजरे की खरीद के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। एक अक्टूबर के आसपास सरकारी खरीद शुरू होने की संभावना है। खरीद शुरू होने के बाद मंडियों में किसानों से बाजरा लिया जाएगा और आवश्यक मात्रा में अनाज का भंडारण कर राशन वितरण व्यवस्था के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
बाजरे की खरीद का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्ष सरकारी एजेंसियों ने खराब गुणवत्ता वाले दानों की वजह से बाजरे की खरीद नहीं की थी। खरीद नहीं होने के कारण सरकारी स्तर पर बाजरे का भंडारण भी नहीं हो सका था। ऐसे में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बाजरे को शामिल करने के लिए इस साल की फसल और सरकारी खरीद पर निर्भरता रहेगी।
एक कार्ड पर मिलेगा 12 किलो बाजरा
नई व्यवस्था में प्रत्येक पात्र गुलाबी कार्ड धारक को 12 किलो बाजरा उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि सितंबर महीने में गेहूं के उठान की स्थिति के आधार पर अक्टूबर में मिलने वाले गेहूं और बाजरे की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
दरअसल, अंत्योदय परिवारों के लिए दो महीने के गेहूं का कुल कोटा 58 किलो है। परिवार अपनी सुविधा के अनुसार सितंबर में एक साथ दोनों महीने का गेहूं भी ले सकता है। ऐसे में राशन वितरण की तारीख और पहले से उठाए गए गेहूं के कोटे का असर अक्टूबर में मिलने वाली सामग्री पर पड़ेगा।
यदि कोई परिवार सितंबर में केवल उसी महीने का गेहूं लेता है और अगले महीने का गेहूं नहीं उठाता, तो उसे अक्टूबर में 23 किलो गेहूं के साथ 12 किलो बाजरा उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, यदि किसी परिवार ने सितंबर में ही सितंबर और अक्टूबर दोनों महीनों का गेहूं यानी कुल 58 किलो गेहूं ले लिया है, तो अक्टूबर में उसे गेहूं नहीं मिलेगा। ऐसे परिवार को अक्टूबर में केवल 12 किलो बाजरा दिया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य राशन के कुल निर्धारित कोटे में बदलाव करना नहीं, बल्कि बाजरे को खाद्यान्न वितरण प्रणाली में शामिल करना है। इसलिए जिन परिवारों ने पहले ही दो महीने का गेहूं उठा लिया है, उनके अक्टूबर के वितरण में केवल बाजरे का हिस्सा बचा रहेगा।
सितंबर में गेहूं लेने वालों के लिए स्थिति स्पष्ट
राशन वितरण को लेकर कार्ड धारकों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे, इसके लिए सितंबर और अक्टूबर के कोटे को समझना जरूरी होगा। सितंबर में यदि परिवार ने केवल एक महीने का गेहूं लिया है तो अक्टूबर में उसे बकाया गेहूं के साथ बाजरा मिलेगा। दूसरी ओर, जिन परिवारों ने पहले ही दो महीने का गेहूं उठा लिया है, उन्हें अक्टूबर में केवल बाजरा दिया जाएगा।
इससे राशन की मात्रा परिवार द्वारा पहले किए गए उठान पर निर्भर करेगी। विभागीय स्तर पर राशन डिपो के माध्यम से पात्र परिवारों को निर्धारित खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार की ओर से राशन डिपो संचालकों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी वितरण व्यवस्था के अनुसार स्टॉक उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर में बाजरे का वितरण शुरू होने के साथ इसकी उपलब्धता और उठान पर भी निगरानी रखी जाएगी।
पिछले साल नहीं हुई थी सरकारी खरीद
बाजरे को लेकर इस बार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त सरकारी स्टॉक तैयार करने की है। पिछले वर्ष सरकारी एजेंसियों ने बाजरे की खरीद नहीं की थी। इसकी मुख्य वजह बाजरे के दानों की गुणवत्ता खराब होना बताई गई थी। खरीद नहीं होने के कारण सरकारी गोदामों में बाजरे का भंडारण नहीं हो पाया था।
इस बार सरकार ने पहले से ही बाजरे की खरीद की तैयारी शुरू कर दी है। मंडियों में फसल की आवक शुरू होने के साथ सरकारी एजेंसियों की खरीद प्रक्रिया सक्रिय होने की उम्मीद है। खरीद के बाद बाजरे को आवश्यकतानुसार भंडारित किया जाएगा और फिर राशन वितरण व्यवस्था के लिए डिपो तक पहुंचाया जाएगा।
सरकार के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी अहम है क्योंकि बाजरे को अब अंत्योदय परिवारों के राशन में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में अक्टूबर से शुरू होने वाले वितरण के लिए पर्याप्त मात्रा में अनाज उपलब्ध रखना जरूरी होगा।
करीब तीन लाख हेक्टेयर में हुई बाजरे की बुवाई
इस वर्ष हरियाणा में बाजरे की खेती का रकबा करीब तीन लाख हेक्टेयर बताया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों ने खरीफ सीजन के दौरान बाजरे की बुवाई की है। फसल की सरकारी खरीद शुरू होने के बाद मंडियों में इसकी आवक बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार की कोशिश है कि किसानों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत बाजरे की खरीद की जाए और इसका उपयोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भी किया जा सके। इससे एक तरफ किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ राशन वितरण के लिए आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सकेगा।
बाजरा हरियाणा की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। दक्षिणी हरियाणा के कई क्षेत्रों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। कम पानी में भी उत्पादन देने वाली इस फसल को किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार सरकारी खरीद की प्रक्रिया शुरू होने से मंडियों में बाजरे की आवक के साथ खरीद व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।
राशन व्यवस्था में बाजरे की वापसी
हरियाणा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बाजरे को शामिल किए जाने से राशन व्यवस्था में एक और खाद्यान्न जुड़ जाएगा। सरकार की ओर से पहले से ही अंत्योदय परिवारों को गेहूं समेत विभिन्न निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अब 12 किलो बाजरा दिए जाने से पात्र परिवारों को अनाज की एक अतिरिक्त किस्म उपलब्ध होगी।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के लिए अक्टूबर से वितरण व्यवस्था को सुचारु रखना महत्वपूर्ण होगा। खासकर उन परिवारों के लिए अलग-अलग स्थिति बन रही है, जिन्होंने सितंबर में एक महीने का गेहूं लिया है और जिन्होंने दो महीने का कोटा पहले ही उठा लिया है।
इसलिए अक्टूबर के राशन वितरण में परिवार के पिछले उठान का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण रहेगा। जिस परिवार का अक्टूबर का गेहूं कोटा पहले ही सितंबर में जारी हो चुका है, उसे अक्टूबर में केवल बाजरा मिलेगा। वहीं, सितंबर में केवल एक महीने का गेहूं लेने वाले परिवार को अक्टूबर में शेष 23 किलो गेहूं के साथ 12 किलो बाजरा दिया जाएगा।
सरकार की ओर से बाजरे की खरीद और वितरण की तैयारी शुरू होने के बाद आने वाले दिनों में मंडियों में खरीद, सरकारी स्टॉक और राशन डिपो तक आपूर्ति की स्थिति स्पष्ट होगी। अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था के तहत प्रदेश के लाखों अंत्योदय परिवारों को बाजरा मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।




