भगवंत मान का ऐलान: नशा तस्करों पर कार्रवाई के लिए पुलिस को खुली छूट, डीएसपी को मिलेंगे 117 नए वाहन

भगवंत मान का ऐलान: नशा तस्करों पर कार्रवाई के लिए पुलिस को खुली छूट, डीएसपी को मिलेंगे 117 नए वाहन

फिल्लौर में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा, मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ जन आंदोलन बनाने का किया आह्वान; केंद्र पर पंजाब को बदनाम करने का आरोप, सीमा पार से नशे की आमद रोकने की मांग

पंजाब में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पुलिस को बिना किसी राजनीतिक दबाव और सिफारिश के कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि नशे का खात्मा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) को 117 नए वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस और सरकार के भरोसे नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए हर परिवार, गांव, मोहल्ले और नागरिक को आगे आना होगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस अकादमी में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा बैठक के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ कार्रवाई की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नशा तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना और पंजाब की युवा पीढ़ी को इस सामाजिक बुराई से बचाना है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी नशे की समस्या मौजूद है, लेकिन पंजाब को जानबूझकर निशाना बनाकर राज्य और पंजाबियों को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र से अपील की कि पंजाब पर आरोप लगाने के बजाय अंतरराष्ट्रीय सीमा और गुजरात के रास्ते नशीले पदार्थों की आमद रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने मानसा में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि इस अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी समीक्षा बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस को नशे के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई है और किसी भी अधिकारी को अपना कर्तव्य निभाने के लिए राजनीतिक सिफारिश या दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारियों के लिए 117 नए वाहनों को मंजूरी दी गई है। इन वाहनों से अधिकारियों की क्षेत्र में आवाजाही और कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वाहनों की तैनाती और उनके इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग से सामने आनी बाकी है।

मान ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य को नशे के कलंक से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पंजाब की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुओं और पीरों की पवित्र धरती को नशे के कारण बदनाम नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से महाराजा रणजीत सिंह के न्याय के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर ‘रंगला पंजाब’ बनाने के लिए एकजुट होने की अपील की।

‘युद्ध नशों विरुद्ध’ को जन आंदोलन बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले रहा है। इसका उद्देश्य केवल मौजूदा समय में नशे की समस्या पर नियंत्रण पाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करना भी है।

उन्होंने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक अभिशाप है। इसकी वजह से हजारों युवाओं के सपने, आकांक्षाएं और जीवन प्रभावित हो रहे हैं। नशे की समस्या परिवारों को भी प्रभावित करती है और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती है। इसलिए इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस अपना काम कर सकती है, लेकिन समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना नशे के खिलाफ स्थायी सफलता हासिल करना मुश्किल है। हर परिवार, गांव, मोहल्ले और जिम्मेदार नागरिक को इस संघर्ष में भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि पंजाब का भविष्य दांव पर लगा है और अब चुप बैठने का समय नहीं है।

मान ने लोगों से अपील की कि वे नशा तस्करी से संबंधित जानकारी बिना किसी डर के अधिकारियों के साथ साझा करें और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सहयोग दें। उन्होंने कहा कि तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रशासन और आम लोगों के बीच भरोसा मजबूत होना जरूरी है।

आपूर्ति और मांग, दोनों मोर्चों पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे की समस्या से निपटने के लिए आपूर्ति और मांग, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई है। आपूर्ति के मोर्चे पर नशा तस्करों और उनके नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, ताकि नशीले पदार्थों की उपलब्धता कम की जा सके।

उन्होंने कहा कि तस्करी की श्रृंखला को तोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। नशे का कारोबार करने वाले लोग अपने मुनाफे के लिए पंजाब के युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे लोगों को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार तस्करों को आम लोगों के परिवार उजाड़ने और फिर कानून से बच निकलने की अनुमति नहीं देगी।

मांग के मोर्चे पर सरकार का जोर नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार और सामान्य जीवन में लौटने का अवसर उपलब्ध कराने पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की लत में फंसे लोगों को केवल अपराधी मानना उचित नहीं है। उन्हें पीड़ित के रूप में देखकर देखभाल, सहानुभूति और उपचार की जरूरत के अनुसार मदद देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नशे की लत से बाहर निकलने वाले लोगों को समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन शुरू करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए परिवारों, समुदायों और संबंधित संस्थाओं का सहयोग महत्वपूर्ण है। सरकार की रणनीति में नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्ती और नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के बीच अंतर किया गया है।

तस्करों को चेतावनी, युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वालों को नहीं मिलेगी राहत

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं की नसों में नशा भरकर मुनाफा कमाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार, नशे की लत से जूझ रहे लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए समाज को सहयोग करना चाहिए, लेकिन नशे के कारोबार के जरिए दूसरों की जिंदगी बर्बाद करने वालों को कानून का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य नशा तस्करी के लिए जिम्मेदार नेटवर्क को ध्वस्त करना और कार्रवाई का लाभ पंजाब के हर गांव तथा शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए पुलिस को कार्रवाई की स्वतंत्रता देने के साथ-साथ लोगों का सहयोग भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल छिटपुट गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार की रणनीति में तस्करी की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई करने पर जोर रहेगा, जो युवाओं तक नशीले पदार्थ पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं।

केंद्र पर निशाना, सीमा पार से नशे की आमद रोकने की मांग

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशे की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी नशीले पदार्थों की बिक्री और दुरुपयोग की समस्या है, लेकिन पंजाब को अलग से निशाना बनाया जा रहा है।

मान ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य को बदनाम करने के बजाय नशे की आपूर्ति के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा और गुजरात के रास्ते नशीले पदार्थों की आमद रोकने की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री के इस बयान से नशे के मुद्दे पर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच राजनीतिक मतभेद भी सामने आए। हालांकि, नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए अलग-अलग राज्यों, केंद्रीय एजेंसियों और सीमा सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं के बीच समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान और संबंधित एजेंसियों के बीच सहयोग आवश्यक है।

मानसा में सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या पर भी सख्त रुख

मुख्यमंत्री ने मानसा में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी। इस बयान के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध के मामलों में दोषियों को जवाबदेह बनाने के लिए सरकार सख्त रुख अपनाएगी।

मानसा में परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के बाद नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा और नशा तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले का उल्लेख करते हुए दोषियों को सजा दिलाने की प्रतिबद्धता दोहराई। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

खेलों के जरिए युवाओं को नशे से दूर रखने की पहल

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नशे के खिलाफ लड़ाई में खेलों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेल सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक हैं। खेलों से अनुशासन, टीम भावना, मेहनत और दृढ़ संकल्प जैसे गुण विकसित होते हैं। इसके साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने और अपने भविष्य के लिए सकारात्मक लक्ष्य निर्धारित करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि खेल का मैदान नशे के अड्डों के खिलाफ मजबूत ढाल बन सकता है, क्योंकि खेल युवाओं को एक लक्ष्य, टीम और सपना देते हैं। सरकार चाहती है कि युवा नशे की गिरफ्त में आने के बजाय खेल किट लेकर मैदान में उतरें, पदक जीतें और अपने परिवार तथा राज्य का नाम रोशन करें।

मान के अनुसार, राज्य सरकार गांवों, कस्बों और शहरों में खेल बुनियादी ढांचे तथा अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और नशामुक्त पीढ़ी का निर्माण करना भी है।

सरकार का लक्ष्य: सख्ती, उपचार और सामाजिक भागीदारी

‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस कार्रवाई, सामाजिक सहयोग, नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और खेलों को बढ़ावा देने जैसे पहलुओं को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया। सरकार का कहना है कि तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्ती के साथ-साथ युवाओं को नशे से दूर रखने और प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

डीएसपी के लिए 117 नए वाहनों की मंजूरी को पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में पेश किया गया है। वहीं, राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना कार्रवाई की स्वतंत्रता देने का ऐलान पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और कामकाज को लेकर सरकार के रुख को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि नशे के खिलाफ अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार, पुलिस, परिवारों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। उनके अनुसार, नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नशे की लत से प्रभावित लोगों का उपचार और युवाओं के लिए खेल तथा सकारात्मक अवसर उपलब्ध कराना ही पंजाब को इस सामाजिक अभिशाप से बाहर निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।